कानपुर देहात में राजस्व वसूली और लंबित मामलों पर सख्ती, डीएम कपिल सिंह ने दिए समयबद्ध निस्तारण के निर्देश

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रिपोर्ट – विशाल मिश्रा 

कानपुर देहात: जनपद में राजस्व वसूली में तेजी लाने और आमजन की शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी कपिल सिंह ने अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए हैं। गुरुवार को कलेक्ट्रेट स्थित मां मुक्तेश्वरी देवी सभागार में कर-करेत्तर एवं राजस्व कार्यों की मासिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इसमें विभिन्न विभागों की राजस्व वसूली, लंबित राजस्व वादों, जनशिकायतों और सरकारी भूमि से अवैध कब्जे हटाने से जुड़े मामलों की विस्तार से समीक्षा की गई।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्धारित मासिक और वार्षिक लक्ष्यों की शत-प्रतिशत प्राप्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही, उन्होंने स्पष्ट किया कि लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए, ताकि आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके अलावा, आईजीआरएस, तहसील दिवस, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और जनप्रतिनिधियों से प्राप्त शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण पर भी जोर दिया गया।

राजस्व वसूली के लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाने के निर्देश

मासिक समीक्षा बैठक में स्टाम्प, आबकारी, वाणिज्यकर, परिवहन, विद्युत, वन, खनिज और बाट-माप समेत विभिन्न विभागों की राजस्व वसूली की प्रगति का आकलन किया गया। जिलाधिकारी कपिल सिंह ने अधिकारियों से कहा कि वे निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप कार्ययोजना तैयार करें और उसके आधार पर राजस्व संग्रह में तेजी लाएं।

उन्होंने निर्देश दिए कि राजस्व वसूली की नियमित निगरानी की जाए, ताकि मासिक और वार्षिक लक्ष्यों को समय पर हासिल किया जा सके। वहीं, बड़े बकायेदारों के विरुद्ध नियमानुसार प्रभावी कार्रवाई करने को भी कहा गया।

जिलाधिकारी ने विभागीय अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में राजस्व संग्रह की स्थिति पर ध्यान देने और निर्धारित लक्ष्य हासिल करने के लिए समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए। समीक्षा बैठक का उद्देश्य राजस्व संबंधी कार्यों की प्रगति का आकलन करना और जहां कमी दिखाई दे, वहां आवश्यक सुधार सुनिश्चित करना रहा।

तीन और पांच वर्ष से लंबित राजस्व वादों के निस्तारण पर जोर

बैठक में राजस्व वादों की समीक्षा के दौरान लंबे समय से लंबित मामलों को लेकर विशेष निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने तीन वर्ष और पांच वर्ष से अधिक समय से लंबित राजस्व वादों को प्राथमिकता के आधार पर आगामी माह तक निस्तारित करने को कहा।

इसके साथ ही स्टाम्प वादों, ऑडिट आपत्तियों और बेदखली से संबंधित मामलों के निस्तारण में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि राजस्व संबंधी मामलों में पारदर्शिता, समयबद्धता और गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए।

दरअसल, लंबे समय तक किसी मामले का समाधान नहीं होने से संबंधित पक्षों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं। ऐसे में मामलों की नियमित समीक्षा और समय पर निर्णय लेना जरूरी है। जिलाधिकारी ने इसी क्रम में लंबित प्रकरणों को अनावश्यक रूप से आगे बढ़ने से रोकने और निर्धारित समय-सीमा में कार्रवाई पूरी करने पर जोर दिया।

एंटी भू-माफिया अभियान के तहत सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराने के निर्देश

जिलाधिकारी कपिल सिंह ने एंटी भू-माफिया अभियान की भी समीक्षा की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों के मामलों में नियमानुसार प्रभावी कार्रवाई करने और भूमि को कब्जामुक्त कराने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा और उन पर अवैध कब्जों की रोकथाम के लिए संबंधित विभागों को सक्रिय रहना चाहिए। इसके लिए आवश्यक अभिलेखों की जांच, संबंधित मामलों की समीक्षा और नियमानुसार कार्रवाई पर ध्यान देने की जरूरत है।

इसके अलावा, बेदखली से संबंधित लंबित मामलों को भी प्राथमिकता से निपटाने के निर्देश दिए गए। प्रशासनिक स्तर पर इन मामलों की प्रगति की निगरानी करने से कार्रवाई में आने वाली बाधाओं की पहचान करने और उनका समाधान करने में मदद मिल सकती है।

आईजीआरएस और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की शिकायतों पर विशेष ध्यान

बैठक में जनशिकायतों के निस्तारण की स्थिति की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने आईजीआरएस, तहसील दिवस, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और जनप्रतिनिधियों के माध्यम से प्राप्त संदर्भों एवं शिकायतों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर निस्तारित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि शिकायतों के निस्तारण में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। साथ ही, अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रत्येक शिकायतकर्ता से संपर्क स्थापित कर उसका फीडबैक अनिवार्य रूप से प्राप्त किया जाए।

इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल शिकायत को निस्तारित दिखाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि संबंधित व्यक्ति की समस्या का वास्तविक समाधान हुआ है या नहीं। इसलिए शिकायतों की गुणवत्ता की जांच और शिकायतकर्ता की संतुष्टि को भी महत्वपूर्ण माना गया।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों से कहा कि शिकायतों के निस्तारण में पारदर्शिता बनाए रखें और प्रत्येक मामले में उपलब्ध तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई करें।

रोजाना सुबह 10 से दोपहर 12 बजे तक होगी जनसुनवाई

आमजन की समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता देते हुए जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को प्रत्येक कार्यदिवस सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक अपने कार्यालयों में नियमित जनसुनवाई करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि जनसुनवाई के दौरान नागरिकों की समस्याओं को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना जाए। साथ ही, शिकायतकर्ताओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाए और उनकी समस्याओं का त्वरित एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जाए।

जिलाधिकारी के अनुसार, शासन की जनकल्याणकारी व्यवस्था का लाभ आमजन तक पहुंचाना अधिकारियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ऐसे में जनसुनवाई को केवल औपचारिकता के रूप में न लेकर शिकायतों के समाधान का प्रभावी माध्यम बनाया जाना चाहिए।

इसके अलावा, अधिकारियों को शिकायतों से संबंधित कार्रवाई की निगरानी करने और जरूरत पड़ने पर संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने पर भी ध्यान देना होगा।

मंडियों के निरीक्षण और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर जोर

बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को मंडियों का नियमित निरीक्षण करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने मंडी समितियों की ओर से कराए जा रहे निर्माण कार्यों और अन्य विकास कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने को कहा।

उन्होंने निर्देश दिए कि सभी कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप और तय समय-सीमा के भीतर पूरे कराए जाएं। निरीक्षण के दौरान यदि कोई कमी सामने आती है, तो उसे तत्काल दूर कराया जाए।

इस संबंध में अधिकारियों को निर्माण कार्यों की प्रगति पर नजर रखने और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण करने को कहा गया। इससे कार्यों को निर्धारित मानकों के अनुसार पूरा कराने में मदद मिल सकती है।

बैठक में कई विभागों के अधिकारी रहे मौजूद

कलेक्ट्रेट स्थित मां मुक्तेश्वरी देवी सभागार में आयोजित इस समीक्षा बैठक में अपर जिलाधिकारी प्रशासन अंकित शुक्ला, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व दुष्यंत कुमार मौर्य और अपर जिलाधिकारी न्यायिक दिग्विजय सिंह उपस्थित रहे।

इसके अतिरिक्त परिवहन, विद्युत, वाणिज्यकर और आबकारी विभाग के अधिकारियों के साथ सभी उपजिलाधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार तथा नगर निकायों के अधिशासी अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए।

बैठक में राजस्व वसूली, लंबित मामलों और जनशिकायतों के निस्तारण को लेकर विभागवार समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप काम करते हुए लंबित प्रकरणों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करें।

कुल मिलाकर, कानपुर देहात प्रशासन की इस मासिक समीक्षा बैठक में राजस्व संग्रह बढ़ाने, पुराने वादों को निस्तारित करने, सरकारी भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराने और जनशिकायतों के गुणवत्तापूर्ण समाधान पर विशेष जोर दिया गया। अब संबंधित विभागों की जिम्मेदारी होगी कि वे इन निर्देशों के अनुरूप कार्य करते हुए निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित करें।

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