वृंदावन में प्राचीन मंदिर की संपत्ति को लेकर विवाद, मुख्यमंत्री योगी से की गई शिकायत
रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज
वृंदावन: उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले की तीर्थनगरी वृंदावन में अठखंभा स्थित प्राचीन मंदिर ठाकुर मुरली मनोहर जी महाराज, सेवासखी कुंज की संपत्ति को लेकर विवाद सामने आया है। सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता प्रहलादकृष्ण शुक्ला ने इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत कर मंदिर की संपत्ति को सुरक्षित रखने की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मंदिर की देवत्र संपत्ति के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है और वहां बहुमंजिला दुकान व शोरूम का निर्माण कराया जा रहा है।
शिकायतकर्ता ने संबंधित निर्माण, संपत्ति के कथित हस्तांतरण और मंदिर के पुराने हिस्सों को हटाए जाने की जांच कराने की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित विभागों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
प्राचीन मंदिर की संपत्ति को लेकर उठे सवाल
प्रहलादकृष्ण शुक्ला की ओर से मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र के अनुसार, अठखंभा स्थित ठाकुर मुरली मनोहर जी महाराज, सेवासखी कुंज मंदिर सौ वर्ष से अधिक पुराना बताया गया है। शिकायत में दावा किया गया है कि कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों और लिखापढ़ी के आधार पर मंदिर की संपत्ति का हस्तांतरण किया गया।
शिकायतकर्ता का कहना है कि मंदिर परिसर के गर्भगृह, चौक, भंडारण कक्ष और कोठरियों जैसे पुराने हिस्सों को हटाया गया है। इसके कारण मंदिर की ऐतिहासिक संरचना और संपत्ति के संरक्षण को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
इसके अतिरिक्त, शिकायत में मंदिर के सेवित विग्रह ठाकुर मुरली मनोहर जी महाराज को उनके पूर्व स्थान से हटाए जाने का भी आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता ने इस पूरे मामले की जांच कराकर मंदिर की संपत्ति और धार्मिक स्वरूप को सुरक्षित रखने की मांग की है।
मंदिर के हिस्से में तीन मंजिला दुकान परिसर के निर्माण का आरोप
शिकायत में मंदिर की संपत्ति के एक हिस्से को कथित तौर पर किसी अन्य व्यक्ति को बेचे जाने और वहां तीन मंजिला दुकान अथवा शोरूम का निर्माण कराए जाने का आरोप लगाया गया है। प्रहलादकृष्ण शुक्ला के अनुसार, इस निर्माण के संबंध में नगर निगम मथुरा-वृंदावन से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) और विकास प्राधिकरण से नक्शा स्वीकृत होने की बात कही गई है।
शिकायतकर्ता ने संबंधित अनुमतियों और संपत्ति के हस्तांतरण की वैधता की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि संपत्ति देवत्र है, तो उसके हस्तांतरण और उस पर निर्माण की प्रक्रिया में लागू कानूनी प्रावधानों का पालन किया जाना आवश्यक है।
हालांकि, उपलब्ध शिकायत के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि संबंधित निर्माण अवैध घोषित हो चुका है या विभागों की ओर से जारी अनुमतियां नियमों के विरुद्ध हैं। इन बिंदुओं पर वास्तविक स्थिति संबंधित दस्तावेजों, स्वीकृत नक्शे और सक्षम अधिकारियों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
देवत्र संपत्ति के अधिकारों को लेकर कानूनी सवाल
शिकायत में मंदिर की संपत्ति पर विराजमान देवता के अधिकारों का मुद्दा भी उठाया गया है। प्रहलादकृष्ण शुक्ला का तर्क है कि मंदिर की देवत्र संपत्ति के संबंध में पुजारी या देखरेख करने वाले व्यक्ति को मनमाने ढंग से मालिकाना अधिकारों में बदलाव करने अथवा संपत्ति का हस्तांतरण करने का अधिकार नहीं है।
उन्होंने अपने पत्र में इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का भी उल्लेख किया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि संपत्ति से जुड़े कथित लेन-देन और निर्माण की प्रक्रिया में कानूनी प्रावधानों की अनदेखी हुई है। हालांकि, शिकायत में उल्लिखित न्यायालय के आदेश का विवरण और इस मामले पर उसकी लागू होने की स्थिति स्वतंत्र रूप से सत्यापित किया जाना आवश्यक है।
देवत्र संपत्ति के मामलों में संपत्ति के दस्तावेज, मंदिर के प्रबंधन की व्यवस्था, संबंधित न्यायिक आदेश और लागू कानून महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए किसी भी विवाद पर अंतिम निष्कर्ष दस्तावेजों और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
मुख्यमंत्री से संपत्ति की सुरक्षा और जांच की मांग
प्रहलादकृष्ण शुक्ला ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि ठाकुर मुरली मनोहर जी महाराज, सेवासखी कुंज की संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही उन्होंने मंदिर की संपत्ति से संबंधित कथित फर्जी रजिस्ट्री की जांच कराकर कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि संपत्ति का हस्तांतरण नियमों के विरुद्ध हुआ है, तो संबंधित दस्तावेजों की जांच कर उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। वहीं, मंदिर के पुराने हिस्सों और धार्मिक महत्व से जुड़े स्थानों के संरक्षण की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है।
फिलहाल, यह मामला शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों और उठाई गई मांगों के रूप में सामने आया है। संबंधित नगर निगम, विकास प्राधिकरण, संपत्ति से जुड़े पक्षों और प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर मामले की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
निष्कर्ष: वृंदावन के अठखंभा स्थित प्राचीन मंदिर की संपत्ति को लेकर उठे विवाद में अब मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की गई है। मामले में संपत्ति के दस्तावेजों, निर्माण की अनुमतियों और मंदिर के प्रबंधन से जुड़े तथ्यों की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण होगी, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके और कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जा सके।

