भारतीय शेयर बाजार बढ़त के साथ बंद, अमेरिकी महंगाई के नरम आंकड़ों से आईटी शेयरों में लौटी तेजी

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Digital UP News Desk

नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को शुरुआती दबाव से उबरते हुए सकारात्मक रुख के साथ कारोबार समाप्त किया। दिन की शुरुआत हालांकि कमजोर रही, लेकिन कारोबार के दौरान निवेशकों का भरोसा बढ़ने से बाजार ने अच्छी वापसी की।

विशेष रूप से अमेरिकी महंगाई (Inflation) के अपेक्षा से नरम आंकड़े सामने आने के बाद वैश्विक बाजारों का माहौल सुधरा, जिसका सकारात्मक असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला।

इसके परिणामस्वरूप आईटी सेक्टर के शेयरों में मजबूत खरीदारी दर्ज की गई और प्रमुख सूचकांक हरे निशान में बंद हुए।

कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 151.28 अंक यानी 0.20 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,336.71 अंक पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 50, 40.60 अंक की तेजी के साथ 24,120.05 अंक पर बंद हुआ।

दिनभर के उतार-चढ़ाव के बावजूद बाजार में निवेशकों का विश्वास कायम रहा और अंतिम घंटों में खरीदारी तेज होने से बाजार मजबूती के साथ बंद होने में सफल रहा।

शुरुआती कमजोरी के बाद बाजार ने की दमदार वापसी

गुरुवार सुबह शेयर बाजार की शुरुआत दबाव के साथ हुई। वैश्विक संकेतों और शुरुआती मुनाफावसूली के चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में हल्की गिरावट देखने को मिली। हालांकि जैसे-जैसे कारोबार आगे बढ़ा, निवेशकों की धारणा सकारात्मक होती गई।

दरअसल, अमेरिकी महंगाई के ताजा आंकड़ों ने यह संकेत दिया कि वहां मुद्रास्फीति का दबाव पहले की तुलना में कुछ कम हुआ है। इससे यह उम्मीद मजबूत हुई कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व भविष्य में ब्याज दरों को लेकर अपेक्षाकृत संतुलित रुख अपना सकता है।

इस संभावना ने वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ाया और भारतीय बाजार को भी इसका लाभ मिला।

आईटी शेयरों में रही सबसे अधिक खरीदारी

दिन के कारोबार में सबसे अधिक मजबूती सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र के शेयरों में देखने को मिली। अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े सकारात्मक संकेतों का सबसे अधिक फायदा आईटी कंपनियों को मिला क्योंकि भारतीय आईटी उद्योग का बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजार पर निर्भर है।

निवेशकों ने प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयरों में जमकर खरीदारी की। इसके चलते निफ्टी आईटी इंडेक्स में करीब 1.6 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। सेक्टर में आई इस तेजी ने पूरे बाजार को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां स्थिर रहती हैं और अमेरिका में महंगाई नियंत्रित रहती है, तो आने वाले समय में आईटी सेक्टर निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रह सकता है।

अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों का क्यों पड़ता है असर?

भारतीय शेयर बाजार पर वैश्विक आर्थिक घटनाओं का सीधा प्रभाव पड़ता है। अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और वहां की आर्थिक नीतियां अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों को प्रभावित करती हैं।

जब अमेरिकी महंगाई अपेक्षा से कम रहती है, तब यह संभावना बढ़ जाती है कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में अधिक आक्रामक बढ़ोतरी नहीं करेगा। कम ब्याज दरें वैश्विक निवेश के लिए अनुकूल माहौल बनाती हैं और उभरते बाजारों, जैसे भारत, में विदेशी निवेश बढ़ने की संभावना भी मजबूत होती है।

इसी कारण अमेरिकी महंगाई के नरम आंकड़ों के बाद भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक माहौल देखने को मिला।

निवेशकों का भरोसा मजबूत

गुरुवार के कारोबार में यह स्पष्ट दिखाई दिया कि निवेशकों ने गिरावट को खरीदारी के अवसर के रूप में देखा। शुरुआती कमजोरी के बावजूद बाजार में घबराहट का माहौल नहीं बना। इसके विपरीत, संस्थागत निवेशकों और खुदरा निवेशकों दोनों ने चुनिंदा शेयरों में निवेश बढ़ाया।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत बुनियादी संकेतक, कॉर्पोरेट आय में सुधार की उम्मीद और वैश्विक परिस्थितियों में स्थिरता बाजार को आगे भी समर्थन दे सकती है।

अन्य सेक्टरों का प्रदर्शन

आईटी सेक्टर के अलावा कुछ अन्य क्षेत्रों में भी सकारात्मक रुझान देखने को मिला। हालांकि सभी सेक्टरों में समान तेजी नहीं रही, फिर भी बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और चुनिंदा ऑटो शेयरों में सीमित खरीदारी दर्ज की गई।

दूसरी ओर, कुछ रक्षात्मक क्षेत्रों में निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। इसके बावजूद व्यापक बाजार का रुझान सकारात्मक बना रहा और अधिकांश प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए।

विदेशी और घरेलू कारकों पर रहेगी नजर

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर कई महत्वपूर्ण घरेलू और वैश्विक घटनाक्रमों पर रहेगी। इनमें अमेरिकी केंद्रीय बैंक की भविष्य की नीतियां, वैश्विक महंगाई के आंकड़े, कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का निवेश और कंपनियों के तिमाही वित्तीय परिणाम प्रमुख रहेंगे।

यदि ये संकेतक अनुकूल रहते हैं, तो भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक रुझान आगे भी जारी रह सकता है। हालांकि वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण बाजार में समय-समय पर उतार-चढ़ाव बना रहना स्वाभाविक है।

निवेशकों के लिए क्या संकेत?

विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह देते हैं कि बाजार में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से घबराने के बजाय दीर्घकालिक निवेश रणनीति अपनानी चाहिए। मजबूत बुनियादी स्थिति वाली कंपनियों में चरणबद्ध निवेश करना अपेक्षाकृत बेहतर विकल्प माना जाता है।

इसके साथ ही निवेशकों को किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय लेना और जोखिम क्षमता का आकलन करना चाहिए। बाजार में तेजी और गिरावट दोनों सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं, इसलिए संतुलित निवेश दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।

गुरुवार का कारोबारी सत्र भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक रहा। शुरुआती कमजोरी के बावजूद बाजार ने शानदार वापसी करते हुए हरे निशान में कारोबार समाप्त किया।

अमेरिकी महंगाई के नरम आंकड़ों से वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ा, जिसका सीधा लाभ भारतीय आईटी शेयरों को मिला। परिणामस्वरूप सेंसेक्स 151.28 अंक और निफ्टी 40.60 अंक की बढ़त के साथ बंद हुए।

आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक आर्थिक संकेतों, कंपनियों के तिमाही नतीजों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर करेगी। फिलहाल निवेशकों के लिए यह सत्र इस बात का संकेत है कि मजबूत वैश्विक संकेत मिलने पर भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक गति बनी रह सकती है।

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