IAS से इस्तीफे के बाद दिव्या मित्तल की राजनीति में एंट्री, बोलीं- किसी दल से नहीं जुड़ूंगी
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश कैडर की पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने के बाद अपनी अगली पारी को लेकर तस्वीर साफ कर दी है। उन्होंने राजनीति में प्रवेश करने का ऐलान किया है। मंगलवार को जारी किए गए वीडियो संदेश में दिव्या मित्तल ने कहा कि वह किसी राजनीतिक दल के साथ नहीं जुड़ेंगी, बल्कि आम लोगों के साथ मिलकर अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू करेंगी। उन्होंने उत्तर प्रदेश को अपनी कर्मभूमि बताते हुए यहीं से स्वतंत्र राजनीतिक पहल शुरू करने की बात कही।
दिव्या मित्तल का यह ऐलान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उनके आईएएस पद से इस्तीफा देने के बाद से ही उनके अगले कदम को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं चल रही थीं। हालांकि, अब उन्होंने खुद वीडियो संदेश के जरिए अपनी दिशा स्पष्ट कर दी है। उनका कहना है कि वह किसी राजनीतिक दल के मंच से अपनी नई यात्रा शुरू करने के बजाय सीधे जनता के बीच जाकर काम करना चाहती हैं।
13 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद बदला रास्ता
दिव्या मित्तल 2013 बैच की आईएएस अधिकारी हैं। उत्तर प्रदेश कैडर में अपने करीब 13 वर्ष के प्रशासनिक करियर के दौरान उन्होंने अलग-अलग जिलों में जिम्मेदारियां संभालीं। वह मिर्जापुर, संतकबीरनगर और देवरिया समेत कई जिलों में जिलाधिकारी के पद पर भी रह चुकी हैं। अगस्त 2026 में उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने की घोषणा की थी। बाद में केंद्र सरकार के कार्मिक मंत्रालय की ओर से उनका इस्तीफा स्वीकार किया गया और यह 15 सितंबर 2026 से प्रभावी हुआ।
इस्तीफा देने के समय दिव्या मित्तल ने अपनी 13 साल की सेवा यात्रा को याद करते हुए सोशल मीडिया पर लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया था। उस समय उनके आगे के कदम को लेकर कई तरह की चर्चाएं थीं। उन्होंने तत्काल राजनीति में जाने की पुष्टि नहीं की थी। बाद में उन्होंने अपने अगले कदम की घोषणा करने की जानकारी दी थी।
वीडियो जारी कर राजनीति में आने की घोषणा
अब अपने वीडियो संदेश में दिव्या मित्तल ने राजनीति में आने की घोषणा कर दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी शुरुआत किसी राजनीतिक पार्टी के साथ नहीं होगी। इसके बजाय वह जनता के साथ मिलकर एक स्वतंत्र राजनीतिक पहल खड़ी करने की दिशा में आगे बढ़ेंगी।
रिपोर्टों के अनुसार, अपने संदेश में उन्होंने प्रशासनिक सेवा के दौरान देखी गई व्यवस्थागत समस्याओं और आम नागरिकों की परेशानियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कई बार नीतियां और संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद उनका अपेक्षित परिणाम जमीन पर दिखाई नहीं देता।
उन्होंने स्कूल, बुनियादी सुविधाओं, जमीन से जुड़े मामलों और प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित समस्याओं का भी जिक्र किया। उनका कहना है कि प्रशासनिक व्यवस्था के भीतर काम करते हुए उन्होंने कई ऐसी परिस्थितियां देखीं, जिनमें आम लोगों की समस्याएं समाधान की प्रतीक्षा करती रहीं।
जनता के साथ मिलकर काम करने की बात
दिव्या मित्तल ने अपने राजनीतिक सफर को पारंपरिक पार्टी राजनीति से अलग रखने की बात कही है। उनके मुताबिक, वह जनता की भागीदारी के आधार पर अपनी राजनीतिक पहल आगे बढ़ाना चाहती हैं।
उन्होंने जाति, धर्म, धन या बाहुबल के आधार पर राजनीति करने के बजाय नागरिकों की भागीदारी और सार्वजनिक मुद्दों को केंद्र में रखने की बात कही। उनके वीडियो संदेश में आम लोगों से सीधे जुड़ने और उनकी समस्याओं को समझने पर जोर दिया गया।
हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि उनकी राजनीतिक पहल का औपचारिक ढांचा क्या होगा, संगठन का नाम क्या होगा या वह आगामी चुनाव में किसी सीट से चुनाव लड़ेंगी या नहीं। फिलहाल उनकी घोषणा का मुख्य बिंदु स्वतंत्र रूप से राजनीतिक यात्रा शुरू करना और किसी राजनीतिक दल से नहीं जुड़ना है।
मिर्जापुर से जुड़ा रहा है प्रशासनिक कार्यकाल
दिव्या मित्तल का उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक कार्यकाल कई जिलों से जुड़ा रहा है। विशेष रूप से मिर्जापुर में जिलाधिकारी रहते हुए दूरस्थ क्षेत्र में पाइपलाइन के जरिए पेयजल पहुंचाने की पहल के कारण वह चर्चा में आई थीं। भारतीय एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने एक पहाड़ी गांव तक पाइप्ड वाटर पहुंचाने की पहल की थी, जहां पहले लोग टैंकरों पर निर्भर थे।
उनके इस्तीफे के बाद मिर्जापुर से उनकी संभावित राजनीतिक शुरुआत को लेकर भी चर्चाएं सामने आई थीं। हालांकि, उस समय उनकी ओर से चुनाव लड़ने या किसी राजनीतिक दल में शामिल होने की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई थी। अब उनके ताजा वीडियो संदेश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह राजनीति में प्रवेश करने जा रही हैं, लेकिन किसी दल के साथ जुड़ने के बजाय स्वतंत्र रास्ता अपनाएंगी।
आगे की रणनीति पर रहेगी नजर
दिव्या मित्तल के राजनीति में प्रवेश की घोषणा के बाद अब उनके अगले कदम पर नजर रहेगी। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि वह अपनी राजनीतिक पहल को किस स्वरूप में आगे बढ़ाती हैं और इसे संगठनात्मक रूप कैसे देती हैं।
फिलहाल उनका घोषित रुख यही है कि वह किसी राजनीतिक दल का हिस्सा नहीं बनेंगी और उत्तर प्रदेश से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू करेंगी। प्रशासनिक सेवा में लंबे अनुभव के बाद राजनीति में उनका प्रवेश प्रदेश की सार्वजनिक और राजनीतिक गतिविधियों में एक नया घटनाक्रम है।
वहीं, उनके आगामी कार्यक्रम, संगठनात्मक ढांचे और चुनावी भागीदारी को लेकर अभी कोई अंतिम जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए फिलहाल उनकी घोषणा को स्वतंत्र राजनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है। आगे उनके सार्वजनिक बयानों और आधिकारिक घोषणाओं से उनकी राजनीतिक रणनीति की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

