सुलतानपुर में LPG वितरकों ने राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन, 75 रुपये बढ़ोतरी समेत उठाईं कई मांगें

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रिपोर्ट – अंजनी मिश्रा 

सुल्तानपुर: एलपीजी वितरकों की विभिन्न मांगों को लेकर चल रहा आंदोलन अब चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ रहा है। इसी क्रम में सुलतानपुर में एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन ने संगठन अध्यक्ष जियाउल हसनैन के नेतृत्व में राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिला प्रशासन के माध्यम से भेजा। वितरकों ने प्रशासनिक शुल्क, होम डिलीवरी प्रभार, ई-केवाईसी भुगतान और सार्वजनिक तेल कंपनियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर तत्काल समाधान की मांग उठाई है।

एसोसिएशन का कहना है कि वितरक लंबे समय से अपनी समस्याओं को लेकर आवाज उठा रहे हैं। संगठन के मुताबिक, एक सितंबर 2026 से आंदोलन शुरू किया गया है और इसके तहत अलग-अलग चरणों में विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में 21 से 29 सितंबर के बीच राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन देने का कार्यक्रम रखा गया है। देश के अलग-अलग हिस्सों में एलपीजी वितरकों की ओर से ज्ञापन सौंपे जाने की खबरें भी सामने आई हैं।

75 रुपये की अंतरिम वृद्धि की प्रमुख मांग

एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन ने प्रशासनिक शुल्क और होम डिलीवरी प्रभार में तत्काल अंतरिम वृद्धि की मांग की है। संगठन के अनुसार, डी-नोवो स्टडी की अनुशंसाओं के अनुरूप इसमें 75 रुपये की बढ़ोतरी की जानी चाहिए।

वितरकों का कहना है कि मौजूदा शुल्क व्यवस्था में उनके संचालन से जुड़े खर्चों को ध्यान में रखते हुए संशोधन की आवश्यकता है। इसलिए उन्होंने केंद्र सरकार और संबंधित तेल कंपनियों से इस मांग पर जल्द निर्णय लेने की अपील की है।

इसी तरह, ई-केवाईसी से जुड़े काम के लिए भी वितरकों ने भुगतान की मांग उठाई है। एसोसिएशन के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को प्रत्येक ई-केवाईसी के लिए 236 रुपये का भुगतान करना चाहिए। देश के अन्य हिस्सों में दिए गए ज्ञापनों में भी 75 रुपये की वृद्धि और 236 रुपये ई-केवाईसी भुगतान की मांग प्रमुखता से सामने आई है।

तेल कंपनियों पर नियमों के पालन की मांग

ज्ञापन में सार्वजनिक तेल कंपनियों से संसद द्वारा बनाए गए नियम-कानूनों का पालन सुनिश्चित कराने की मांग भी की गई है। वितरकों का कहना है कि एलपीजी वितरण व्यवस्था से संबंधित निर्धारित नियमों के अनुरूप ही काम किया जाना चाहिए।

इसके अलावा, संगठन ने वितरकों पर गैर-फर्म तथा अन्य वस्तुओं की बिक्री के लिए कथित दबाव को समाप्त करने की मांग की है। वितरकों के अनुसार, उनका मुख्य कार्य एलपीजी वितरण और उपभोक्ताओं तक सिलेंडर की आपूर्ति से जुड़ा है। इसलिए अतिरिक्त बिक्री गतिविधियों के लिए दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए।

एसोसिएशन ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित कराने की मांग भी ज्ञापन में शामिल की है। वितरकों का कहना है कि नियमों और जिम्मेदारियों को लेकर स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे एजेंसियों के संचालन में अनावश्यक विवाद की स्थिति न बने।

पीएम उज्ज्वला योजना से जुड़े प्रावधानों पर भी सवाल

एलपीजी वितरकों ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) से जुड़े कुछ प्रावधानों को लेकर भी अपनी मांग रखी है। एसोसिएशन ने निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से पीएमयूवाई कनेक्शन की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग की है।

इसके साथ ही संगठन ने नए घरेलू गैस कनेक्शन से संबंधित कुछ बंद किए गए प्रावधानों को दोबारा लागू करने की मांग की है। वितरकों का कहना है कि इससे नए उपभोक्ताओं को गैस कनेक्शन उपलब्ध कराने और वितरण व्यवस्था को सुचारु रखने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, इन मांगों और आरोपों पर संबंधित तेल कंपनियों या केंद्र सरकार की ओर से सुलतानपुर के इस ज्ञापन को लेकर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए संगठन की ओर से लगाए गए आरोपों और मांगों को फिलहाल उसके पक्ष के रूप में देखा जाना चाहिए।

कंपनी अधिकारियों के दबाव का मुद्दा

वितरकों ने कंपनी अधिकारियों द्वारा कथित रूप से बनाए जा रहे दबाव को तत्काल समाप्त करने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि एजेंसी संचालकों को निर्धारित नियमों और व्यावसायिक व्यवस्था के अनुरूप काम करने का अवसर मिलना चाहिए।

देश के अन्य हिस्सों में दिए गए ज्ञापनों में भी वितरकों ने कथित रूप से गैर-ईंधन संबंधी उत्पादों की बिक्री और व्यावसायिक सिलेंडरों के लक्ष्य को लेकर आपत्ति जताई है।

वहीं, देश में एलपीजी वितरण नेटवर्क काफी बड़ा है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल के अनुसार, सितंबर 2026 में देश में करोड़ों सक्रिय घरेलू एलपीजी कनेक्शन और बड़ी संख्या में एलपीजी वितरक मौजूद हैं। ऐसे में वितरकों की कार्यप्रणाली से जुड़े मुद्दे सीधे तौर पर व्यापक उपभोक्ता सेवा व्यवस्था से जुड़े हैं।

आंदोलन का आगे का कार्यक्रम

एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन ने मांगों के समाधान के लिए आगे के आंदोलन का कार्यक्रम भी घोषित किया है। संगठन के मुताबिक, 5 अक्टूबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस, 6 अक्टूबर को ‘नो-मनी-नो-इंटरेस्ट’ अभियान और 26 अक्टूबर को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन प्रस्तावित है।

देश के अन्य क्षेत्रों में सामने आई एसोसिएशन की घोषणाओं में भी 5 अक्टूबर की प्रेस कॉन्फ्रेंस, 6 अक्टूबर से ‘नो मनी, नो इंडेंट’ अभियान और 26 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की बात कही गई है।

एसोसिएशन का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को आगे भी जारी रखा जाएगा। संगठन ने केंद्र सरकार और सार्वजनिक तेल कंपनियों से बातचीत के माध्यम से समस्याओं के समाधान की मांग की है।

उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है असर

एलपीजी वितरकों की मांगों और प्रस्तावित आंदोलन का संबंध केवल एजेंसी संचालकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर आगे चलकर उपभोक्ता सेवाओं पर भी पड़ सकता है। हालांकि, प्रस्तावित कार्यक्रमों के दौरान घरेलू गैस आपूर्ति की वास्तविक स्थिति क्या रहेगी, यह संबंधित तेल कंपनियों और वितरकों के स्तर पर लिए जाने वाले फैसलों पर निर्भर करेगा।

फिलहाल सुलतानपुर में राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिला प्रशासन के माध्यम से भेज दिया गया है। अब वितरकों की नजर सरकार और सार्वजनिक तेल कंपनियों की ओर से मिलने वाली प्रतिक्रिया पर है। वहीं, संगठन ने स्पष्ट किया है कि मांगों के समाधान तक चरणबद्ध आंदोलन जारी रखा जाएगा।

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