श्रावस्ती में बाढ़-जलभराव से जनजीवन हुआ बेहाल, राप्ती का जलस्तर घटा लेकिन चुनौतियां बरकरार

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रिपोर्ट – सूर्य प्रकाश शुक्ला 

श्रावस्ती: लगातार हुई बारिश और राप्ती नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी के बाद श्रावस्ती जिले के कई ग्रामीण और तटीय इलाकों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। हालांकि अब राप्ती नदी का जलस्तर धीरे-धीरे घटने लगा है, लेकिन जमुनहा, इकौना और गिलौला क्षेत्र के कई गांवों में जलभराव की स्थिति अभी भी बनी हुई है। ऐसे में ग्रामीणों की मुश्किलें पूरी तरह कम नहीं हुई हैं। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, राप्ती का जलस्तर घटने के बावजूद तटीय क्षेत्रों में पानी जमा रहने से लोगों को आवागमन और रोजमर्रा के कामकाज में परेशानी हो रही है।

बारिश और नदी के बढ़े जलस्तर का असर जिले के तराई क्षेत्र में सबसे अधिक दिखाई दे रहा है। सिसवारा, कोलाभार, मजगंवा समेत कई गांवों में बाढ़ और जलभराव ने ग्रामीणों की दिनचर्या प्रभावित कर दी है। कई स्थानों पर घरों के आसपास पानी जमा है, जबकि कुछ इलाकों में रास्तों पर पानी होने के कारण लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

राप्ती का जलस्तर घटने से मिली राहत

पिछले दिनों लगातार बारिश के कारण राप्ती नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया था। 27 सितंबर की रिपोर्टों में नदी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 70 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया था। प्रशासन ने संभावित बाढ़ को देखते हुए संवेदनशील और अति संवेदनशील गांवों में निगरानी बढ़ा दी थी।

अब नदी का जलस्तर नीचे आने लगा है, जिससे प्रशासन और ग्रामीणों को कुछ राहत की उम्मीद जगी है। हालांकि, नदी का पानी घटने के बावजूद निचले और तटीय इलाकों में जमा पानी तुरंत बाहर नहीं निकल पाया है। इसलिए स्थानीय स्तर पर जल निकासी की चुनौती अभी बनी हुई है।

यही वजह है कि प्रशासन की निगरानी लगातार जारी है। जिलाधिकारी अन्नपूर्णा गर्ग और पुलिस अधीक्षक राहुल भाटी ने पहले भी संवेदनशील क्षेत्रों का निरीक्षण कर अधिकारियों को सतर्क रहने और बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए थे।

कई गांवों में अब भी जलभराव

जमुनहा, इकौना और गिलौला के तटीय क्षेत्रों में जलभराव के कारण ग्रामीणों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ गांवों में रास्तों पर पानी होने से आवागमन प्रभावित हुआ है। वहीं, निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों को अपने घरों और आसपास जमा पानी को लेकर चिंता बनी हुई है।

इकौना क्षेत्र में भी बाढ़ की आशंका के बीच प्रशासन ने संवेदनशील गांवों का निरीक्षण किया था। अधिकारियों ने स्थानीय स्तर पर स्थिति पर नजर रखने और आवश्यकता पड़ने पर ग्रामीणों को सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

इसके अलावा, लगातार बारिश के कारण कई स्थानों पर सड़क मार्ग भी प्रभावित हुए हैं। पेड़ों और विद्युत पोल के गिरने से कुछ रास्तों पर आवागमन में बाधा आई है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में सामान्य परिवहन व्यवस्था प्रभावित हुई है।

बिजली और मोबाइल नेटवर्क की समस्या

बाढ़ और जलभराव के बीच बिजली आपूर्ति बाधित होना भी ग्रामीणों के लिए अतिरिक्त परेशानी का कारण बना है। जिले के कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश के बाद बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की रिपोर्ट सामने आई है। गिलौला और भंगहा उपकेंद्रों से जुड़े क्षेत्रों में भी बिजली संकट की जानकारी सामने आई थी।

बिजली के साथ-साथ कुछ इलाकों में मोबाइल नेटवर्क प्रभावित होने से संचार व्यवस्था पर भी असर पड़ा है। ऐसे में ग्रामीणों के लिए परिजनों से संपर्क करना या किसी आपात स्थिति में सूचना देना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

प्रशासन की ओर से लोगों को बिजली के खंभों और जलस्रोतों से दूरी बनाए रखने की अपील भी की गई है। तेज बारिश के दौरान विद्युत व्यवस्था से जुड़े जोखिमों को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

स्कूली वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित

जलभराव और क्षतिग्रस्त रास्तों का असर बच्चों की पढ़ाई और स्कूल आने-जाने की व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में रास्तों पर पानी और जगह-जगह पेड़ गिरने के कारण स्कूली वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई है।

ग्रामीणों का कहना है कि सामान्य दिनों में जिन रास्तों से बच्चे आसानी से स्कूल पहुंचते हैं, वहां जलभराव के कारण परेशानी बढ़ गई है। ऐसे में जब तक रास्तों से पानी नहीं निकलता और गिरे हुए पेड़ों तथा अन्य अवरोधों को हटाया नहीं जाता, तब तक परिवहन व्यवस्था सामान्य होने में समय लग सकता है।

किसानों को फसल नुकसान की चिंता

बाढ़ और जलभराव का असर खेती पर भी पड़ा है। तराई क्षेत्र में खेतों में पानी जमा होने के कारण किसानों को फसलों के नुकसान की चिंता है। लंबे समय तक खेतों में पानी जमा रहने से फसल प्रभावित हो सकती है।

इसी को देखते हुए प्रशासन की ओर से प्रभावित फसलों और संपत्तियों के नुकसान का सर्वे शुरू किया गया है। सर्वे के आधार पर प्रभावित परिवारों और किसानों को हुए नुकसान का आकलन किया जाएगा। इससे प्रशासन को राहत एवं सहायता संबंधी आगे की कार्रवाई तय करने में भी मदद मिलेगी।

DM अन्नपूर्णा गर्ग की निगरानी जारी

बाढ़ और जलभराव की स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी अन्नपूर्णा गर्ग लगातार स्थिति की निगरानी कर रही हैं। अधिकारियों को फील्ड में सक्रिय रहने और प्रभावित क्षेत्रों से जानकारी लगातार जुटाने के निर्देश दिए गए हैं।

इससे पहले भी जल निकासी से जुड़ी शिकायतों पर प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को मौके पर भेजकर समस्या के समाधान के निर्देश दिए थे। जमुनहा क्षेत्र के कुछ गांवों में जल निकासी की शिकायत मिलने के बाद मौके पर टीम भेजकर पानी निकालने की कार्रवाई भी कराई गई थी।

फिलहाल राप्ती नदी का जलस्तर घटने से स्थिति में सुधार की उम्मीद है, लेकिन तराई के कई इलाकों में जमा पानी और प्रभावित रास्तों के कारण चुनौतियां बनी हुई हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने प्राथमिकता प्रभावित क्षेत्रों में जल निकासी, बिजली एवं संचार व्यवस्था को सामान्य करना और नुकसान का आकलन करना है। ग्रामीण भी जल्द हालात सामान्य होने की उम्मीद लगाए हुए हैं।

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