फतेहपुर में 600 बीघा फसल हुई जलमग्न, जल निकासी के लिए किसानों ने SDM से लगाई गुहार
रिपोर्ट – अशोक सिंह
फतेहपुर: लगातार हुई बारिश के बाद सदर तहसील क्षेत्र के ग्राम साखा स्थित बघेला हार में जलभराव की समस्या गंभीर होती जा रही है। यहां करीब 600 बीघा कृषि भूमि पानी में डूब गई है, जिसके चलते धान, बाजरा समेत खेतों में खड़ी अन्य फसलों पर संकट मंडरा रहा है। खेतों में लंबे समय से पानी जमा होने के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द जल निकासी की व्यवस्था नहीं की गई तो फसलों को व्यापक नुकसान हो सकता है।
बारिश के बाद ग्रामीण इलाकों में खेतों से पानी की निकासी एक बड़ी समस्या बन गई है। साखा गांव के बघेला हार क्षेत्र में भी यही स्थिति सामने आई है। कृषि भूमि में पानी भर जाने के कारण खेतों में खड़ी फसलों की स्थिति प्रभावित होने लगी है। वहीं, लगातार नमी और जलभराव के कारण फसल खराब होने की आशंका भी किसानों ने जताई है।
करीब 600 बीघा कृषि भूमि में भरा पानी
किसानों के अनुसार, बघेला हार क्षेत्र में करीब 600 बीघा जमीन पर खेती की जाती है। इस क्षेत्र में बारिश के बाद पानी जमा हो गया है। कई खेतों में काफी समय से पानी भरा होने के कारण किसान खेतों में जाकर फसल की स्थिति तक ठीक से नहीं देख पा रहे हैं।
धान और बाजरा सहित दूसरी फसलों के लिए भी लगातार जलभराव चिंता का कारण बना हुआ है। किसानों का कहना है कि बारिश का पानी यदि निर्धारित रास्ते से निकल जाए तो स्थिति सामान्य हो सकती है, लेकिन निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण पानी खेतों में ही रुका हुआ है।
इसके चलते किसानों को केवल मौजूदा फसल के नुकसान की चिंता नहीं है, बल्कि आगामी कृषि सीजन भी प्रभावित होने की आशंका है। खेतों से पानी समय पर नहीं निकलने पर अगली फसल की तैयारी और बुवाई में भी देरी हो सकती है।
किसानों ने SDM को दिया प्रार्थना पत्र
जलभराव की समस्या से परेशान किसानों ने सदर उपजिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। किसानों ने प्रशासन से खेतों में जमा पानी की निकासी के लिए आवश्यक इंतजाम कराने की अपील की है।
किसानों का कहना है कि यदि प्रशासन की ओर से जल्द जल निकासी की व्यवस्था कराई जाती है तो खेतों में खड़ी फसल को होने वाले नुकसान को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। इसलिए उन्होंने मामले को प्राथमिकता के आधार पर देखने की मांग की है।
प्रार्थना पत्र के माध्यम से किसानों ने संबंधित अधिकारियों का ध्यान जलभराव के कारण पैदा हुई समस्या की ओर आकर्षित किया है। उनका कहना है कि समस्या केवल एक-दो खेतों तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़े क्षेत्र की कृषि भूमि प्रभावित हुई है।
चक मार्ग और नाली पर कब्जे का आरोप
किसानों ने जलभराव की वजह के रूप में चक मार्ग और नाली पर कथित अवैध कब्जे का मुद्दा भी उठाया है। किसानों का आरोप है कि पानी की निकासी के लिए जिन रास्तों और नालियों का इस्तेमाल होना चाहिए, वहां कब्जे होने के कारण बारिश का पानी बाहर नहीं निकल पा रहा है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। किसानों ने प्रशासन से मौके पर जांच कराने और यदि सरकारी भूमि या जल निकासी के रास्ते पर अतिक्रमण पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।
किसानों की मांग है कि संबंधित स्थानों की जांच कराकर पानी की निकासी के लिए नाली की खुदाई कराई जाए। इसके साथ ही जल निकासी के प्राकृतिक या निर्धारित रास्तों को भी सुचारु कराया जाए, ताकि भविष्य में बारिश के दौरान ऐसी स्थिति दोबारा न बने।
फसल खराब होने की बढ़ी चिंता
कृषि भूमि में लंबे समय तक पानी जमा रहने से किसानों को फसल खराब होने की चिंता सता रही है। किसानों के मुताबिक, खेतों में पानी अधिक समय तक रुका रहने से फसलों की जड़ें प्रभावित हो सकती हैं और उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।
वहीं, जिन किसानों ने आगामी फसल की तैयारी शुरू करने की योजना बनाई थी, उनके सामने भी अब समस्या खड़ी हो गई है। जब तक खेतों से पानी पूरी तरह बाहर नहीं निकलता, तब तक खेतों की जुताई और अगली फसल की बुवाई करना मुश्किल होगा।
इस स्थिति में किसानों का कहना है कि प्रशासन को केवल मौजूदा जलभराव दूर करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि स्थायी जल निकासी व्यवस्था पर भी ध्यान देना चाहिए। इससे बारिश के दौरान दोबारा बड़े पैमाने पर जलभराव की स्थिति बनने से बचा जा सकता है।
किसानों ने जल्द कार्रवाई की मांग की
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि मौके का निरीक्षण कर जलभराव की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाए। इसके बाद पानी की निकासी के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। साथ ही, यदि जांच में चक मार्ग या नाली पर कब्जे की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कार्रवाई कर रास्ता साफ कराया जाए। किसानों का कहना है कि खेती उनकी आजीविका का प्रमुख आधार है। ऐसे में फसल को नुकसान पहुंचने से सीधे उनकी आय प्रभावित होगी। इसलिए उन्होंने प्रशासन से समय रहते हस्तक्षेप करने की अपील की है।
फिलहाल किसानों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है। यदि जल निकासी की व्यवस्था जल्द होती है तो खेतों में जमा पानी बाहर निकाला जा सकता है और फसलों को संभावित नुकसान से बचाने की कोशिश की जा सकती है। दूसरी ओर, यदि जलभराव लंबे समय तक बना रहता है तो किसानों के सामने फसल के साथ-साथ अगली बुवाई को लेकर भी चुनौती खड़ी हो सकती है।

