कानपुर CSJMU में विधि छात्रों का प्रदर्शन, VC को सौंपा पांच सूत्रीय ज्ञापन

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रिपोर्ट – हनुमंत सिंह पिंटू

कानपुर। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU), कानपुर में विधि छात्रों ने अपनी विभिन्न शैक्षणिक समस्याओं और मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। डीसी लॉ कॉलेज के छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर पहुंचकर कुलपति (VC) को पांच सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। इस दौरान छात्रों ने परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था, प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया, समर्थ पोर्टल और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के नियमों के अनुपालन जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। साथ ही, उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से विद्यार्थियों की समस्याओं का जल्द समाधान करने की मांग की।

छात्रों का कहना है कि परीक्षा और शैक्षणिक प्रक्रियाओं से जुड़ी समस्याओं का सीधा असर उनकी पढ़ाई पर पड़ता है। इसलिए विश्वविद्यालय प्रशासन को विद्यार्थियों की कठिनाइयों को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कदम उठाने चाहिए। वहीं, छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो वे अपने आंदोलन को व्यापक रूप देने के लिए बाध्य होंगे।

होम सेंटर की व्यवस्था बहाल करने की मांग

विधि छात्रों की प्रमुख मांगों में बाहरी परीक्षा केंद्रों के स्थान पर होम सेंटर की व्यवस्था दोबारा लागू करना शामिल है। प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों ने कहा कि अपने ही कॉलेज में परीक्षा केंद्र होने से छात्रों को सुविधा मिल सकती है। इसके अलावा, बाहरी परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा देने के दौरान होने वाली परेशानियों से भी राहत मिलने की उम्मीद है।

छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से आग्रह किया कि परीक्षा केंद्र निर्धारित करने की व्यवस्था पर दोबारा विचार किया जाए। उनका मानना है कि होम सेंटर की व्यवस्था बहाल होने से विद्यार्थियों को परीक्षा के दौरान अधिक सुविधाजनक वातावरण मिल सकता है।

हालांकि, परीक्षा केंद्रों के निर्धारण से संबंधित अंतिम निर्णय विश्वविद्यालय प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में आता है। ऐसे में छात्रों की इस मांग पर प्रशासन का क्या रुख रहता है, यह आगे की कार्रवाई से स्पष्ट होगा।

AI से प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया पर जताई आपत्ति

प्रदर्शन के दौरान विधि छात्रों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के माध्यम से प्रश्नपत्र तैयार किए जाने की व्यवस्था को लेकर भी अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। छात्रों ने प्रश्नपत्र निर्माण की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इस संबंध में स्पष्ट नीति अपनाने की मांग की।

विद्यार्थियों का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और प्रश्नपत्रों की गुणवत्ता महत्वपूर्ण विषय हैं। इसलिए प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिससे विद्यार्थियों को परीक्षा व्यवस्था पर भरोसा बना रहे।

इसके साथ ही छात्रों ने मांग की कि प्रश्नपत्र निर्माण से संबंधित प्रक्रिया और उसमें तकनीक के इस्तेमाल को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन स्थिति स्पष्ट करे। उनका कहना है कि परीक्षा संबंधी नीतियों में विद्यार्थियों के हितों और शैक्षणिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

समर्थ पोर्टल दोबारा खोलने की उठाई मांग

ज्ञापन में समर्थ पोर्टल को दोबारा खोलने की मांग भी शामिल रही। छात्रों के अनुसार, पोर्टल से जुड़ी समस्याओं के कारण कुछ विद्यार्थियों को आवश्यक शैक्षणिक प्रक्रियाएं पूरी करने में परेशानी हो रही है। ऐसे में पोर्टल को दोबारा खोलने का अवसर मिलने से प्रभावित छात्रों को राहत मिल सकती है।

विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से अनुरोध किया कि समर्थ पोर्टल से संबंधित समस्याओं की समीक्षा की जाए और जरूरत के अनुसार विद्यार्थियों को अपनी आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने का अवसर दिया जाए।

डिजिटल पोर्टल के माध्यम से होने वाली शैक्षणिक प्रक्रियाओं में समयसीमा और तकनीकी समस्याएं विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती हैं। इसलिए छात्रों ने इस विषय पर जल्द निर्णय लेने की अपील की, ताकि उनकी पढ़ाई और परीक्षा संबंधी कार्य प्रभावित न हों।

BCI के नियमों के पालन पर जोर

विधि छात्रों ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि विधि शिक्षा से संबंधित शैक्षणिक और परीक्षा व्यवस्थाओं में लागू नियमों का अनुपालन होना चाहिए।

छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से अपेक्षा जताई कि विधि शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने और विद्यार्थियों के हितों की रक्षा करने के लिए संबंधित नियमों को ध्यान में रखकर आवश्यक कदम उठाए जाएं।

उनके मुताबिक, विधि शिक्षा में निर्धारित मानकों का महत्व काफी अधिक है। इसलिए विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं और परीक्षा संबंधी प्रक्रियाओं में नियमानुसार काम होना चाहिए। हालांकि, ज्ञापन में उठाए गए मुद्दों पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से किसी निर्णय या आधिकारिक प्रतिक्रिया की जानकारी सामने नहीं आई है।

पांच सूत्रीय ज्ञापन देकर समाधान की मांग

डीसी लॉ कॉलेज के विद्यार्थियों ने कुलपति को पांच सूत्रीय ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई की अपील की। छात्रों ने स्पष्ट किया कि वे अपनी समस्याओं का समाधान चाहते हैं, ताकि शैक्षणिक गतिविधियों और परीक्षा व्यवस्था को लेकर विद्यार्थियों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।

इसके अलावा, छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो वे आंदोलन को और व्यापक रूप दे सकते हैं। अब विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इन मांगों पर क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर विद्यार्थियों की नजर रहेगी।

फिलहाल, इस प्रदर्शन के माध्यम से विधि छात्रों ने परीक्षा केंद्रों, प्रश्नपत्र निर्माण, समर्थ पोर्टल और नियामक नियमों से जुड़े मुद्दों को विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने रखा है। आने वाले दिनों में इन मांगों पर होने वाली कार्रवाई से यह तय होगा कि विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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