बांदा में 5 लीटर के नाम पर 3 लीटर का डिब्बा देने का आरोप, वापसी मांगने पर दलित ग्राहक से मारपीट
रिपोर्ट – शैलेन्द्र शानू वर्मा
बांदा: उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में दूध के डिब्बों की क्षमता को लेकर विवाद का मामला सामने आया है। तिंदवारा निवासी फूलचंद्र पुत्र सियाराम ने दो दुकानदारों पर कथित रूप से पांच लीटर के नाम पर तीन लीटर क्षमता वाले दूध के डिब्बे देने और वापस करने पहुंचने पर गाली-गलौज व मारपीट करने का आरोप लगाया है। पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक (SP) को प्रार्थना पत्र देकर आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने और मामले में कार्रवाई की मांग की है।
पीड़ित के मुताबिक, उसने इस मामले की शिकायत पहले भी संबंधित अधिकारियों और माध्यमों से की थी। हालांकि, उसका आरोप है कि शिकायतों के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उसने पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार लगाई है। फिलहाल, मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
पांच लीटर के दो डिब्बे खरीदने का दावा
फूलचंद्र के अनुसार, 10 अक्टूबर 2026 को वह बांदा नगर कोतवाली के सामने स्थित एक दुकान से दूध रखने के लिए दो डिब्बे खरीदकर लाया था। उसने दुकानदारों की पहचान अभिषेक ओमर और निरवेश ओमर उर्फ गुड्डू के रूप में बताई है। पीड़ित का दावा है कि उसे दोनों डिब्बे पांच-पांच लीटर क्षमता के बताए गए थे।
फूलचंद्र के मुताबिक, डिब्बे घर पहुंचने के बाद उसने उनकी क्षमता जांचने के लिए उनमें पानी भरकर नाप की। इस दौरान उसे कथित तौर पर पता चला कि दोनों डिब्बों में पांच लीटर के बजाय लगभग तीन-तीन लीटर पानी ही आ रहा था। इसके बाद उसने दुकानदारों से संपर्क कर डिब्बों की क्षमता को लेकर शिकायत की।
पीड़ित का कहना है कि शिकायत करने पर उसे डिब्बे वापस करने के लिए कहा गया था। इसी आश्वासन के आधार पर वह बाद में दोनों डिब्बे लौटाने दुकान पर पहुंचा। हालांकि, उसके अनुसार, वापसी के समय विवाद की स्थिति बन गई।
डिब्बे वापस करने पहुंचने पर विवाद का आरोप
प्रार्थना पत्र में फूलचंद्र ने बताया कि 16 अक्टूबर 2026 को शाम करीब चार बजे वह डिब्बे वापस करने के लिए संबंधित दुकान पर गया था। उसका आरोप है कि इस दौरान दुकानदार ने डिब्बे वापस लेने से इनकार कर दिया। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई।
पीड़ित का आरोप है कि विवाद बढ़ने पर दोनों दुकानदारों ने उसके साथ गाली-गलौज की और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया। उसने यह भी आरोप लगाया है कि दुकान के बाहर उसके साथ मारपीट की गई। फूलचंद्र के मुताबिक, यह घटना उसके लिए परेशानी का कारण बनी, जिसके बाद उसने मामले में कानूनी कार्रवाई कराने का प्रयास किया।
हालांकि, घटना के संबंध में दूसरे पक्ष का बयान उपलब्ध नहीं है। इसलिए विवाद के दौरान वास्तव में क्या हुआ, इसकी पुष्टि संबंधित पक्षों के बयान और पुलिस जांच के आधार पर ही हो सकेगी।
जातिसूचक टिप्पणी और मारपीट के आरोपों की जांच जरूरी
इस मामले में पीड़ित ने केवल सामान की क्षमता को लेकर धोखाधड़ी जैसे विवाद की शिकायत ही नहीं की है, बल्कि जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल और मारपीट के आरोप भी लगाए हैं। ऐसे में शिकायत के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण है।
यदि जांच में जातिसूचक अपशब्दों के इस्तेमाल, मारपीट या अन्य किसी अपराध के पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, किसी भी व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए आरोपों को जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने से पहले प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।
इसके अलावा, डिब्बों की वास्तविक क्षमता और उन्हें किस क्षमता का बताकर बेचा गया था, यह भी मामले का अहम पहलू है। खरीद से संबंधित रसीद, उपलब्ध सामान, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य जांच में उपयोगी हो सकते हैं। इन तथ्यों के आधार पर ही विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
कोतवाली और मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत का दावा
फूलचंद्र ने अपने प्रार्थना पत्र में दावा किया है कि उसने मामले की शिकायत कोतवाली नगर, तहसील दिवस और मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी की थी। उसका कहना है कि कई स्तरों पर शिकायत करने के बावजूद उसे अपेक्षित राहत नहीं मिली।
इसके बाद पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर दोनों दुकानदारों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने और मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करने की मांग की है। उसने अधिकारियों से पूरे घटनाक्रम की जांच कराने और उसे न्याय दिलाने की अपील की है।
अब इस मामले में पुलिस की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। शिकायत पर क्या कदम उठाए गए हैं, प्राथमिकी दर्ज हुई है या नहीं और संबंधित पक्षों से पूछताछ की गई है या नहीं, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
पुलिस की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
बांदा में सामने आए इस मामले में फिलहाल मुख्य आधार पीड़ित की ओर से लगाए गए आरोप और पुलिस अधीक्षक को दिया गया प्रार्थना पत्र है। एक ओर फूलचंद्र ने डिब्बों की क्षमता को लेकर विवाद, जातिसूचक टिप्पणी और मारपीट की शिकायत की है, वहीं दूसरी ओर मामले में दूसरे पक्ष का जवाब और पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
ऐसे में जरूरी है कि शिकायत के प्रत्येक बिंदु की निष्पक्षता से जांच की जाए और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उचित निर्णय लिया जाए। अब देखना होगा कि पुलिस प्रशासन इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है और जांच के बाद मामले में कौन-से तथ्य सामने आते हैं।

