बांदा में दलित महिला से छेड़छाड़ और जातिसूचक गाली देने का आरोप, पुलिस पर पक्षपात का आरोप लगाकर एसपी से मांगा न्याय
रिपोर्ट- शानू वर्मा
बांदा। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में दलित महिला से कथित छेड़छाड़, मारपीट और जातिसूचक गालियां देने का मामला सामने आया है। कमासिन थाना क्षेत्र के ग्राम खमरखा निवासी चुनकी देवी ने अपने पड़ोसी प्रमोद मिश्रा और उसके परिवार के सदस्यों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं, पीड़िता ने स्थानीय पुलिस पर पक्षपात करने और समझौते के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाते हुए पुलिस अधीक्षक (एसपी) से न्याय की गुहार लगाई है। महिला की मांग है कि मामले से जुड़े दोनों मुकदमों की निष्पक्ष जांच किसी सक्षम अधिकारी से कराई जाए, ताकि उन्हें और उबांदा में दलित महिला से छेड़छाड़ और जातिसूचक गाली देने का आरोप, पुलिस पर पक्षपात का आरोप लगाकर एसपी से मांगा न्याय
नके परिवार को न्याय मिल सके।
शौच के लिए जाते समय छेड़छाड़ का आरोप
चुनकी देवी, पत्नी अजय कुमार, ने अपने प्रार्थना पत्र में घटना का विवरण देते हुए बताया कि 6 अक्टूबर 2026 की शाम करीब सात बजे वह शौच के लिए घर से बाहर जा रही थीं। इसी दौरान उनके पड़ोसी प्रमोद मिश्रा, पुत्र चुनकौना, ने कथित तौर पर उनका हाथ पकड़ लिया और जबरन अपने घर की ओर खींचने का प्रयास किया।
महिला के अनुसार, उन्होंने इसका विरोध करते हुए शोर मचाया। आवाज सुनकर उनके पति अजय कुमार मौके पर पहुंचे। आरोप है कि इसके बाद प्रमोद मिश्रा ने लाठी से उन पर हमला कर दिया। इसी बीच प्रमोद की पत्नी सुमन, उसके पिता रामनरेश उर्फ चुनकौना और अन्य लोग भी मौके पर पहुंच गए।
चुनकी देवी का आरोप है कि वहां मौजूद लोगों ने उनके और उनके पति के साथ मारपीट की। साथ ही, उन्हें गालियां देते हुए धमकियां भी दी गईं। पीड़िता के मुताबिक, इस घटना से उनका परिवार भयभीत है और उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। हालांकि, घटना से संबंधित सभी आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
जातिसूचक टिप्पणी करने का भी आरोप
पीड़िता ने अपने शिकायती प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि विवाद के दौरान प्रमोद मिश्रा ने जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया। महिला के अनुसार, आरोपी ने कथित तौर पर कहा कि वे लोग गांव में उसके अनुसार ही रह सकते हैं और उसकी बात माननी पड़ेगी। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि उसने थाना पुलिस पर अपने प्रभाव का दावा करते हुए परिवार को धमकाया।
चुनकी देवी का कहना है कि इस तरह की कथित टिप्पणी से उन्हें अपमानित महसूस हुआ। उन्होंने मामले में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग की है।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें महिला ने कथित छेड़छाड़ और मारपीट के साथ-साथ जातिगत अपमान का आरोप भी लगाया है। ऐसे मामलों में शिकायत के प्रत्येक पहलू की निष्पक्ष जांच और संबंधित पक्षों के बयान दर्ज करना आवश्यक है, ताकि तथ्यों के आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई की जा सके।
कमासिन थाने में दर्ज कराया गया मुकदमा
चुनकी देवी के अनुसार, उन्होंने घटना वाले दिन ही कमासिन थाने में लिखित शिकायत दी थी। शिकायत के आधार पर मुकदमा संख्या 265/26 दर्ज किया गया। प्रार्थना पत्र में इस मुकदमे में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 75, 115(2) और 352 तथा एससी/एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई किए जाने का उल्लेख है।
हालांकि, महिला का आरोप है कि शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने उन पर और उनके परिवार पर समझौता करने का दबाव बनाया। उनका कहना है कि उन्होंने मामले में समझौता करने से इनकार कर दिया, क्योंकि वह आरोपों की निष्पक्ष जांच और न्याय चाहती हैं।
पीड़िता के मुताबिक, शिकायत के बाद घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरे पक्ष के प्रभाव के चलते उनके और उनके पति के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कर दिया गया। इस घटनाक्रम को लेकर उन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
पति-पत्नी के खिलाफ भी दर्ज हुआ दूसरा मुकदमा
चुनकी देवी ने अपने प्रार्थना पत्र में बताया कि उनके और उनके पति अजय कुमार के खिलाफ मुकदमा संख्या 266/2026 दर्ज किया गया है। शिकायत के अनुसार, इस मुकदमे में बीएनएस की धारा 333, 115(2), 352, 351(3) और 75 का उल्लेख है।
महिला का आरोप है कि यह मुकदमा उन्हें दबाव में लेने और पहले मामले में समझौता कराने के उद्देश्य से दर्ज कराया गया। उन्होंने इसे गलत बताते हुए पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।
हालांकि, दूसरे मुकदमे को लेकर लगाए गए आरोपों और उसकी परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध विवरण से नहीं होती है। इसलिए दोनों मुकदमों में दर्ज तथ्यों, संबंधित पक्षों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
पुलिस पर पक्षपात का आरोप, एसपी से निष्पक्ष जांच की मांग
चुनकी देवी ने आरोप लगाया है कि प्रमोद मिश्रा का स्थानीय थाने में प्रभाव है और वह अक्सर थाने में बैठता है। उनका दावा है कि इसी प्रभाव के कारण पुलिस उनके मामले में निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई नहीं कर रही है। पीड़िता का कहना है कि उनका परिवार आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर है, जिसके कारण उन्हें न्याय पाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
इसी को देखते हुए चुनकी देवी ने पुलिस अधीक्षक से हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने अनुरोध किया है कि मुकदमा संख्या 265/26 और 266/2026 की जांच किसी सक्षम अधिकारी से कराई जाए, ताकि किसी भी पक्ष के प्रभाव में आए बिना सच्चाई सामने आ सके।
महिला चाहती हैं कि कथित छेड़छाड़, मारपीट, जातिसूचक टिप्पणी और दोनों पक्षों के खिलाफ दर्ज मुकदमों की परिस्थितियों की अलग-अलग जांच की जाए। साथ ही, यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
निष्पक्ष जांच से सामने आएगी वास्तविक स्थिति
इस पूरे मामले में एक पक्ष ने छेड़छाड़, मारपीट और जातिसूचक गालियां देने के आरोप लगाए हैं, जबकि शिकायतकर्ता दंपती के खिलाफ भी अलग मुकदमा दर्ज होने की बात सामने आई है। ऐसे में दोनों मुकदमों की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण है।
पुलिस प्रशासन से अपेक्षा की जाती है कि वह शिकायत में लगाए गए आरोपों, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित पक्षों के बयानों के आधार पर कानून के अनुसार कार्रवाई करे। साथ ही, किसी भी शिकायतकर्ता को बिना उचित जांच के दोषी या निर्दोष ठहराना उचित नहीं होगा।
फिलहाल, चुनकी देवी ने पुलिस अधीक्षक से न्याय की मांग करते हुए दोनों मुकदमों की निष्पक्ष जांच कराने की अपील की है। अब मामले में पुलिस प्रशासन की ओर से की जाने वाली कार्रवाई और जांच के निष्कर्षों पर नजर रहेगी।

