कानपुर में किसानों के निरस्त पट्टों की बहाली की मांग तेज, भाकियू (महात्मा टिकैत) ने जिलाधिकारी से की मुलाकात
रिपोर्ट- कृष्णा शर्मा
कानपुर: कानपुर नगर में किसानों की भूमि से जुड़े एक महत्वपूर्ण मुद्दे को लेकर भारतीय किसान यूनियन (महात्मा टिकैत) ने प्रशासन के समक्ष अपनी बात मजबूती से रखी। संगठन के जिला अध्यक्ष अनंत अवस्थी के नेतृत्व में किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर ग्राम सभा औरंगपुर सांभी के किसानों के निरस्त किए गए पट्टों का मामला उठाया।
इस दौरान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष भी बैठक में मौजूद रहे। प्रतिनिधिमंडल ने किसानों की समस्याओं को विस्तार से रखते हुए पट्टों की बहाली की मांग की, जिस पर जिलाधिकारी ने मामले का परीक्षण कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।
यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब भूमि पट्टों से जुड़े मामलों को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के बीच चिंता बनी हुई है। किसानों का कहना है कि पट्टों के निरस्त होने से उनकी आजीविका और कृषि गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। इसलिए वे प्रशासन से जल्द सकारात्मक निर्णय की अपेक्षा कर रहे हैं।
किसानों ने रखी अपनी समस्याएं
बैठक के दौरान भारतीय किसान यूनियन (महात्मा टिकैत) के प्रतिनिधिमंडल ने ग्राम सभा औरंगपुर सांभी के किसानों की स्थिति का विस्तार से उल्लेख किया। प्रतिनिधियों ने बताया कि जिन किसानों के पट्टे निरस्त किए गए हैं, वे लंबे समय से संबंधित भूमि पर खेती करते आ रहे हैं। ऐसे में पट्टों के निरस्त होने से उनके सामने आर्थिक और सामाजिक दोनों प्रकार की चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से अनुरोध किया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जिन किसानों के साथ न्यायोचित व्यवहार होना चाहिए, उन्हें राहत प्रदान की जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भूमि संबंधी मामलों का समाधान कानून और नियमों के अनुरूप होना चाहिए ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।
जिलाधिकारी ने दिया सकारात्मक आश्वासन
किसानों की बात सुनने के बाद जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेने का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि प्रशासन संबंधित अभिलेखों और नियमों का परीक्षण करेगा। यदि जांच में किसानों का पक्ष उचित पाया जाता है, तो नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
इसके अलावा जिलाधिकारी ने यह भी आश्वासन दिया कि किसानों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य किसी भी पात्र व्यक्ति के साथ अन्याय न होने देना है। इसी कारण संबंधित अधिकारियों को भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाने की बात कही गई।
संगठन ने किसानों के अधिकारों की रक्षा का दोहराया संकल्प
बैठक के बाद भारतीय किसान यूनियन (महात्मा टिकैत) के जिला अध्यक्ष अनंत अवस्थी ने कहा कि संगठन हमेशा किसानों के हितों की रक्षा के लिए कार्य करता रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों के अधिकारों से जुड़े किसी भी मुद्दे पर संगठन पीछे नहीं हटेगा और जब तक न्याय नहीं मिलेगा, तब तक लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रहेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन के साथ संवाद के माध्यम से समस्याओं का समाधान निकालना संगठन की प्राथमिकता है। हालांकि यदि आवश्यकता पड़ी तो किसानों के हित में आगे भी विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जाएंगे।
प्रदेश नेतृत्व भी रहा मौजूद
इस महत्वपूर्ण बैठक में संगठन के प्रदेश अध्यक्ष की उपस्थिति को भी विशेष माना जा रहा है। प्रदेश स्तर के नेतृत्व के शामिल होने से यह स्पष्ट संकेत मिला कि संगठन इस मुद्दे को गंभीरता से देख रहा है।
प्रदेश नेतृत्व ने भी किसानों की समस्याओं को प्रशासन के सामने प्रभावी ढंग से रखा और कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि संबंधी मामलों का समयबद्ध समाधान होना चाहिए। इससे किसानों का प्रशासन पर विश्वास भी मजबूत होगा और अनावश्यक विवादों से भी बचा जा सकेगा।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे कई पदाधिकारी
जिलाधिकारी से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में कई वरिष्ठ पदाधिकारी और किसान प्रतिनिधि शामिल रहे। इनमें कानपुर देहात जिला अध्यक्ष रणवीर यादव, कानपुर मंडल उपाध्यक्ष नवाब सिंह यादव, सांभी के पूर्व प्रधान संतोष सिंह चौहान, आदित्य दुबे, दिनेश चंद्र दुबे, अजय दुबे, रितेश चौहान, अरविंद कुमार शर्मा, हरी बाबू कमल और जय सिंह सहित लगभग 15 सदस्य मौजूद रहे।
प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने एक स्वर में कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान प्रशासनिक स्तर पर जल्द होना चाहिए। उनका मानना है कि यदि समय पर निर्णय लिया जाता है तो किसानों को राहत मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में सकारात्मक संदेश जाएगा।
भूमि पट्टों का महत्व
ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि पट्टे केवल कानूनी दस्तावेज नहीं होते, बल्कि वे किसानों की आजीविका का आधार भी होते हैं। ऐसे में यदि किसी कारणवश पट्टे निरस्त होते हैं तो उसका सीधा असर किसान परिवारों की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है।
इसी कारण भूमि से जुड़े मामलों में पारदर्शिता, निष्पक्षता और समयबद्ध कार्रवाई को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि ऐसे मामलों में सभी पक्षों को सुनकर और नियमों के अनुरूप निर्णय लेना ही सबसे उपयुक्त तरीका है।
प्रशासन और किसानों के बीच संवाद जरूरी
इस बैठक का एक सकारात्मक पक्ष यह भी रहा कि किसानों ने अपनी बात सीधे प्रशासन के समक्ष रखी और प्रशासन ने भी उसे गंभीरता से सुना। लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद को समस्याओं के समाधान का सबसे प्रभावी माध्यम माना जाता है।
यदि प्रशासन और किसान संगठनों के बीच इसी प्रकार नियमित संवाद बना रहता है, तो कई विवाद प्रारंभिक स्तर पर ही सुलझाए जा सकते हैं। इससे न केवल किसानों का विश्वास बढ़ता है बल्कि प्रशासनिक कार्यप्रणाली भी अधिक प्रभावी बनती है।
किसानों को समाधान की उम्मीद
बैठक के बाद भारतीय किसान यूनियन (महात्मा टिकैत) के पदाधिकारियों ने उम्मीद जताई कि प्रशासन जल्द ही मामले की समीक्षा कर किसानों के हित में उचित निर्णय लेगा। संगठन का कहना है कि यदि पात्र किसानों के पट्टों की बहाली होती है तो इससे प्रभावित परिवारों को राहत मिलेगी और खेती-किसानी का कार्य पहले की तरह सुचारु रूप से आगे बढ़ सकेगा।
वहीं किसानों का भी कहना है कि वे प्रशासन द्वारा दिए गए आश्वासन पर भरोसा रखते हैं और उम्मीद करते हैं कि जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियमानुसार निर्णय लिया जाएगा।

