बांदा में ‘रोड नहीं तो स्कूल नहीं’ की गूंज, सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों और बच्चों ने डीएम को सौंपा ज्ञापन
रिपोर्ट- जितेंद्र सिंह
बांदा: उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों और स्कूली बच्चों ने अनोखे अंदाज में अपनी आवाज बुलंद की। अतर्रा क्षेत्र के भूरा यादव का पुरवा के निवासियों ने वर्षों से जर्जर पड़े कच्चे मार्ग को पक्का कराने की मांग को लेकर जिला मुख्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया।
इस दौरान बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे भी हाथों में “रोड नहीं तो स्कूल नहीं” लिखी तख्तियां लेकर शामिल हुए। प्रदर्शन के बाद ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए सड़क निर्माण की मांग पर जल्द कार्रवाई की अपील की।
ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में सड़क की स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि लोगों का पैदल निकलना भी मुश्किल हो जाता है। सबसे अधिक परेशानी विद्यालय जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को उठानी पड़ती है। ऐसे में ग्रामीणों ने प्रशासन से इस मार्ग को शीघ्र चलने योग्य बनाने की मांग की है।
वर्षों से सड़क निर्माण का इंतजार
ग्रामीणों द्वारा दिए गए ज्ञापन के अनुसार, अतर्रा केन-कैनाल कार्यालय से नहर पटरी स्थित भूरा यादव का पुरवा तक लगभग एक किलोमीटर लंबा कच्चा मार्ग है। लंबे समय से यह रास्ता पक्का नहीं बनाया गया है। सामान्य दिनों में भी यहां आवागमन आसान नहीं रहता, जबकि बारिश शुरू होते ही पूरा रास्ता कीचड़ और जलभराव से भर जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकल सका। परिणामस्वरूप ग्रामीणों को रोजमर्रा के कार्यों के लिए भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
बरसात में बढ़ जाती है परेशानी
मानसून के दौरान स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। लगातार बारिश के कारण कच्चा मार्ग फिसलन भरा हो जाता है। कई स्थानों पर पानी भर जाने से रास्ता पहचानना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में दोपहिया वाहन चलाना तो दूर, पैदल चलना भी जोखिम भरा बन जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि खेतों तक पहुंचने, बाजार जाने, आवश्यक सामान लाने और सरकारी सेवाओं का लाभ लेने में भी कठिनाई होती है। यही कारण है कि सड़क निर्माण की मांग लंबे समय से लगातार उठाई जा रही है।
बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा असर
प्रदर्शन की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि इसमें बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों ने भी भाग लिया। बच्चों ने हाथों में “रोड नहीं तो स्कूल नहीं” लिखी तख्तियां लेकर प्रशासन का ध्यान अपनी समस्या की ओर आकर्षित किया।
ग्रामीणों के अनुसार, खराब सड़क के कारण बच्चे कई बार समय पर विद्यालय नहीं पहुंच पाते। बरसात के दिनों में अभिभावक भी बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए उन्हें स्कूल भेजने से हिचकिचाते हैं। इससे उनकी नियमित पढ़ाई प्रभावित होती है और शिक्षा पर भी नकारात्मक असर पड़ता है।
जिलाधिकारी को सौंपा गया ज्ञापन
प्रदर्शन के बाद ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों से अवगत कराया। ज्ञापन में कहा गया कि अतर्रा केन-कैनाल कार्यालय से भूरा यादव का पुरवा तक के कच्चे मार्ग पर जल्द से जल्द गिट्टी और मोरम डालकर सड़क को चलने योग्य बनाया जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके।
ग्रामीणों ने यह भी अनुरोध किया कि भविष्य में इस मार्ग का स्थायी निर्माण कराया जाए, जिससे हर मौसम में सुरक्षित और सुगम आवागमन सुनिश्चित हो सके।
ग्रामीणों ने शीघ्र कार्रवाई की मांग की
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास की आधारभूत आवश्यकता है। यदि सड़क बेहतर होगी तो बच्चों की शिक्षा प्रभावित नहीं होगी, किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में सुविधा मिलेगी और आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को समय पर अस्पताल ले जाना भी संभव होगा।
इसीलिए उन्होंने प्रशासन से इस समस्या को प्राथमिकता के आधार पर हल करने की मांग की है।
आंदोलन जारी रखने की दी चेतावनी
ज्ञापन सौंपने के दौरान ग्रामीणों ने कहा कि यदि जल्द कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो वे लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपना आंदोलन जारी रखेंगे। उनका उद्देश्य केवल सड़क निर्माण कराना है ताकि गांव के लोगों को बुनियादी सुविधाओं का लाभ मिल सके।
ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि प्रशासन उनकी मांगों पर सकारात्मक विचार करेगा और जल्द आवश्यक कदम उठाएगा।

