विश्व प्लास्टिक सर्जरी दिवस: केवल सुंदरता नहीं, जीवन को नई दिशा देने वाली चिकित्सा है प्लास्टिक सर्जरी – डॉ. प्रशांत मिश्रा
रिपोर्ट – कृष्णा शर्मा
विश्व प्लास्टिक सर्जरी दिवस के अवसर पर प्लास्टिक एवं पुनर्निर्माण सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. प्रशांत मिश्रा (MBBS, M.S., M.Ch. Plastic & Reconstructive Surgery) ने कहा कि प्लास्टिक सर्जरी को केवल सौंदर्य बढ़ाने वाली चिकित्सा के रूप में देखना सही नहीं है। उनके अनुसार, यह चिकित्सा विज्ञान की एक अत्यंत महत्वपूर्ण शाखा है, जिसका उद्देश्य केवल बाहरी स्वरूप में बदलाव करना नहीं, बल्कि दुर्घटनाओं, जलने, जन्मजात विकृतियों, कैंसर के बाद होने वाली शारीरिक क्षति और जटिल घावों के उपचार के माध्यम से मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना भी है।
उन्होंने बताया कि आधुनिक प्लास्टिक एवं पुनर्निर्माण सर्जरी ने चिकित्सा क्षेत्र में ऐसे अनेक समाधान उपलब्ध कराए हैं, जिनकी मदद से कई मरीज सामान्य जीवन की ओर लौटने में सफल होते हैं। इसलिए इस विशेष दिवस का उद्देश्य लोगों में जागरूकता बढ़ाना और प्लास्टिक सर्जरी से जुड़ी गलत धारणाओं को दूर करना भी है।
प्लास्टिक सर्जरी का दायरा केवल कॉस्मेटिक उपचार तक सीमित नहीं
डॉ. प्रशांत मिश्रा ने बताया कि आमतौर पर लोग प्लास्टिक सर्जरी को केवल कॉस्मेटिक प्रक्रियाओं, जैसे चेहरे की सुंदरता बढ़ाने या त्वचा में बदलाव से जोड़कर देखते हैं। हालांकि वास्तविकता इससे कहीं अधिक व्यापक है।
उन्होंने कहा कि प्लास्टिक एवं पुनर्निर्माण सर्जरी उन मरीजों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है, जिन्हें दुर्घटनाओं, आग से जलने, गंभीर चोटों, जन्मजात विकृतियों या कैंसर के उपचार के बाद शरीर के किसी हिस्से के पुनर्निर्माण की आवश्यकता होती है। ऐसे मामलों में इस चिकित्सा का उद्देश्य केवल शरीर के प्रभावित भाग की संरचना को सुधारना ही नहीं, बल्कि उसकी कार्यक्षमता को भी यथासंभव बहाल करना होता है।
पुनर्निर्माण सर्जरी से कई मरीजों को मिलता है नया जीवन
विशेषज्ञ के अनुसार, प्लास्टिक सर्जन शरीर के कटे या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त अंगों के पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा हाथ, चेहरा और अन्य अंगों में गंभीर चोट लगने की स्थिति में भी पुनर्निर्माण सर्जरी मरीज के उपचार का अहम हिस्सा बन सकती है।
उन्होंने बताया कि जलने के बाद त्वचा के सिकुड़ने (बर्न कॉन्ट्रैक्चर) की समस्या कई मरीजों के दैनिक जीवन को प्रभावित करती है। ऐसे मामलों में उचित सर्जरी और पुनर्वास के माध्यम से मरीज की गतिशीलता और जीवन की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है।
जन्मजात विकृतियों के उपचार में भी महत्वपूर्ण भूमिका
डॉ. मिश्रा ने कहा कि प्लास्टिक एवं पुनर्निर्माण सर्जरी जन्मजात विकृतियों के उपचार में भी प्रभावी भूमिका निभाती है। उदाहरण के लिए, क्लेफ्ट लिप (कटे होंठ) और क्लेफ्ट पैलेट (कटा तालु) जैसी जन्मजात स्थितियों का समय पर उपचार बच्चों के शारीरिक विकास, बोलने की क्षमता और सामाजिक आत्मविश्वास को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। उन्होंने कहा कि समय पर विशेषज्ञ से परामर्श और उचित उपचार योजना बच्चों के दीर्घकालिक स्वास्थ्य परिणामों को सकारात्मक दिशा दे सकती है।
कैंसर के बाद पुनर्निर्माण उपचार भी आवश्यक
विशेषज्ञ ने बताया कि कई बार कैंसर के उपचार के दौरान शरीर के कुछ हिस्सों को शल्य चिकित्सा के माध्यम से हटाना पड़ता है। ऐसे मामलों में पुनर्निर्माण सर्जरी प्रभावित अंग की संरचना और कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में सहायक हो सकती है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रत्येक मरीज की स्थिति अलग होती है, इसलिए उपचार का निर्णय विशेषज्ञ चिकित्सक द्वारा विस्तृत जांच और चिकित्सीय आवश्यकता के आधार पर ही लिया जाता है।
मधुमेह जनित घाव और प्रेशर सोर के उपचार में भी उपयोगी
डॉ. प्रशांत मिश्रा के अनुसार, प्लास्टिक सर्जन मधुमेह (डायबिटीज) से संबंधित जटिल घावों, लंबे समय तक बिस्तर पर रहने वाले मरीजों में होने वाले प्रेशर सोर तथा अन्य कठिन घावों के उपचार में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों में समय पर विशेषज्ञ उपचार मिलने से संक्रमण के जोखिम को कम करने और घाव भरने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में सहायता मिल सकती है।
समय पर उपचार और जागरूकता दोनों हैं आवश्यक
विशेषज्ञों का मानना है कि कई मरीज केवल जानकारी के अभाव में समय पर उपचार नहीं करा पाते। इसके कारण समस्या अधिक जटिल हो सकती है। इसीलिए विश्व प्लास्टिक सर्जरी दिवस जैसे अवसर लोगों को जागरूक करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। यदि किसी व्यक्ति को दुर्घटना, जलने, जन्मजात विकृति या किसी गंभीर घाव से संबंधित समस्या हो, तो उसे योग्य प्लास्टिक एवं पुनर्निर्माण सर्जन से परामर्श लेना चाहिए।
विशेषज्ञ से परामर्श के बिना निर्णय न लें
डॉ. मिश्रा ने यह भी सलाह दी कि किसी भी प्रकार की सर्जरी का निर्णय केवल सोशल मीडिया, विज्ञापनों या अपूर्ण जानकारी के आधार पर नहीं लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मरीज की शारीरिक स्थिति, आयु, स्वास्थ्य और चिकित्सीय आवश्यकता अलग होती है। इसलिए उपचार की उपयुक्त विधि का चयन विशेषज्ञ चिकित्सक द्वारा विस्तृत जांच के बाद ही किया जाना चाहिए।

