कानपुर में एक परिवार ने प्लॉटिंग के नाम पर 30 लाख रुपये हड़पने का आरोप लगाया, पुलिस से कार्रवाई की मांग 

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रिपोर्ट – ऋषभ देव सिंह

कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर से जमीन में निवेश के नाम पर कथित धोखाधड़ी का एक मामला सामने आया है। एक परिवार ने आरोप लगाया है कि विकास दुबे गैंग से जुड़े बताए जा रहे उमेश दुबे ने प्लॉटिंग परियोजना में साझेदारी का भरोसा देकर उनसे 30 लाख रुपये लिए, लेकिन न तो परियोजना शुरू की और न ही उनकी रकम वापस की।

पीड़ित परिवार का यह भी दावा है कि पैसे वापस मांगने पर उन्हें कथित रूप से धमकियां दी गईं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और मामले में संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया भी सामने नहीं आई है।

पीड़ित परिवार ने इस पूरे मामले की शिकायत पुलिस और अन्य उच्च अधिकारियों से किए जाने का दावा किया है। उनका कहना है कि अब तक उन्हें कोई ठोस कार्रवाई होती दिखाई नहीं दी, जिसके कारण परिवार आर्थिक और मानसिक कठिनाइयों का सामना कर रहा है।

प्लॉटिंग में साझेदारी का दिया गया था प्रस्ताव

पीड़ित प्रांजुल शुक्ला के अनुसार, उनके पिता सुशील कुमार शुक्ला को उमेश दुबे ने प्लॉटिंग का व्यवसाय शुरू करने का प्रस्ताव दिया था। परिवार का आरोप है कि दोनों के बीच यह सहमति बनी थी कि जमीन खरीदकर प्लॉटिंग की जाएगी और उससे होने वाले लाभ को बराबर-बराबर बांटा जाएगा।

परिवार का कहना है कि इस भरोसे के आधार पर 30 लाख रुपये निवेश किए गए। आरोप है कि जमीन की खरीद तो हुई, लेकिन उसमें पूरा निवेश उनके परिवार की ओर से किया गया, जबकि दूसरे पक्ष ने कोई आर्थिक योगदान नहीं दिया। इसके बावजूद कथित रूप से प्लॉटिंग का कार्य शुरू नहीं किया गया और निवेश की गई राशि भी वापस नहीं की गई।

परिवार ने आर्थिक नुकसान का लगाया आरोप

प्रांजुल शुक्ला का कहना है कि इस निवेश के कारण उनका परिवार गंभीर आर्थिक संकट में आ गया। उनके अनुसार, परिवार ने यह राशि अपने संसाधनों और संपत्ति के माध्यम से जुटाई थी। उनका दावा है कि भविष्य में बेहतर आर्थिक स्थिति की उम्मीद से यह निवेश किया गया था, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिले।

परिवार का कहना है कि रकम वापस न मिलने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती चली गई। उनका आरोप है कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद उन्हें न तो पैसा मिला और न ही कोई स्पष्ट समाधान दिया गया।

पिता के मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ने का दावा

पीड़ित परिवार का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अधिक प्रभाव प्रांजुल शुक्ला के पिता सुशील कुमार शुक्ला पर पड़ा। परिवार के अनुसार, लगातार आर्थिक दबाव और निवेश की रकम वापस न मिलने के कारण वे मानसिक तनाव और अवसाद जैसी स्थिति से गुजर रहे हैं।

परिवार का दावा है कि लंबे समय तक चली चिंता और आर्थिक परेशानी ने उनके स्वास्थ्य को प्रभावित किया। हालांकि, इस संबंध में किसी चिकित्सीय दस्तावेज का उल्लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।

बीमारी के इलाज और कर्ज का भी किया जिक्र

प्रांजुल शुक्ला ने बताया कि कुछ समय पहले उनकी गंभीर बीमारी के इलाज में लगभग 20 लाख रुपये खर्च हुए थे। उनका कहना है कि उपचार के कारण परिवार पहले से ही आर्थिक दबाव में था और इस दौरान कई लोगों से उधार भी लेना पड़ा।

परिवार के अनुसार, कर्ज चुकाने के उद्देश्य से उन्होंने अपनी एक संपत्ति बेची थी। आरोप है कि उसी राशि को प्लॉटिंग में निवेश करने के लिए उन्हें प्रेरित किया गया। अब रकम वापस न मिलने के कारण परिवार पर आर्थिक बोझ और बढ़ गया है।

धमकी देने का भी लगाया आरोप

परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि जब उन्होंने अपनी निवेश की गई राशि वापस मांगनी शुरू की, तब उन्हें कथित रूप से जान से मारने और झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी दी गई।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। संबंधित व्यक्ति की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। इसलिए इन दावों को केवल शिकायतकर्ता के आरोपों के रूप में देखा जाना चाहिए।

उच्च अधिकारियों से शिकायत का दावा

पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्होंने इस मामले की शिकायत स्थानीय पुलिस के अलावा अन्य उच्च अधिकारियों से भी की है। परिवार का दावा है कि उन्होंने सभी उपलब्ध तथ्यों और दस्तावेजों के साथ न्याय की मांग की, लेकिन अभी तक उन्हें अपेक्षित कार्रवाई नहीं मिली।

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