बांदा में लाखों की लागत से बना उप स्वास्थ्य केंद्र बंद, भवन में ताला; ग्रामीणों ने उठाए सवाल

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रिपोर्ट – शैलेन्द्र शानू वर्मा 

बांदा: उत्तर प्रदेश के बांदा जिले की नरैनी तहसील क्षेत्र के ग्राम पचोखर में लाखों रुपये की लागत से बनाया गया उप स्वास्थ्य केंद्र इन दिनों नियमित स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में ग्रामीणों के लिए सवाल बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस उद्देश्य से स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण कराया गया था, वह पूरा होता नजर नहीं आ रहा है। भवन मौजूद है, लेकिन नियमित रूप से स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध नहीं होने के कारण ग्रामीणों को इलाज के लिए दूसरे स्थानों पर जाना पड़ता है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, उप स्वास्थ्य केंद्र के मुख्य दरवाजे पर अक्सर ताला लगा रहता है। ऐसे में ग्रामीणों के सामने छोटी-छोटी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए भी गांव से बाहर जाने की मजबूरी बनी हुई है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग से जुड़े एक अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि केंद्र पर एक एएनएम तैनात हैं, जो महीने के प्रथम बुधवार को यहां बैठती हैं और बाकी दिनों में अन्य केंद्रों की जिम्मेदारी संभालती हैं।

लाखों रुपये खर्च के बाद भी नियमित सेवा का इंतजार

पचोखर में उप स्वास्थ्य केंद्र का भवन ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाया गया था। निर्माण के समय ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब सामान्य बीमारी, प्राथमिक उपचार और अन्य जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए उन्हें दूर नहीं जाना पड़ेगा।

हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि केंद्र पर नियमित स्वास्थ्यकर्मी उपलब्ध नहीं रहते। कमल किशोर ने कहा कि भवन बनते समय उम्मीद थी कि गांव में इलाज की सुविधा मिलेगी, लेकिन अब मुख्य दरवाजे पर ताला नजर आता है।

इसी तरह सुनील का कहना है कि यदि इलाज के लिए ग्रामीणों को बाहर ही जाना पड़े तो केंद्र के निर्माण का लाभ स्थानीय लोगों को किस तरह मिल रहा है, यह समझ से परे है।

महीने में एक दिन एएनएम के बैठने का दावा

स्वास्थ्य विभाग से जुड़े एक अधिकारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि पचोखर के उप स्वास्थ्य केंद्र पर फिलहाल एक एएनएम की तैनाती है। उनके मुताबिक एएनएम महीने के प्रथम बुधवार को केंद्र पर बैठती हैं। इसके अलावा उन्हें अन्य स्वास्थ्य केंद्रों की जिम्मेदारी भी संभालनी पड़ती है।

ग्रामीणों का कहना है कि महीने में केवल एक दिन स्वास्थ्यकर्मी की उपलब्धता से गांव की स्वास्थ्य जरूरतें पूरी करना मुश्किल है। श्यामबाबू ने इसे नियमित स्वास्थ्य सेवा के बजाय औपचारिकता बताया और कहा कि स्वास्थ्य केंद्र का संचालन लगातार होना चाहिए।

हालांकि, एएनएम की ड्यूटी व्यवस्था और केंद्र के संचालन को लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से विस्तृत आधिकारिक स्थिति सामने आना बाकी है।

दो बार निरीक्षण के बाद भी व्यवस्था पर सवाल

रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी में लखनऊ से आई एक टीम और मई में दिल्ली से आई एक टीम ने पचोखर के उप स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया था। इसके बावजूद ग्रामीणों का कहना है कि जमीनी स्तर पर व्यवस्था में अपेक्षित बदलाव नजर नहीं आया।

यही वजह है कि स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि निरीक्षण के बाद तैयार की गई रिपोर्ट में क्या सुझाव दिए गए और उन पर कितना अमल हुआ। ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित अधिकारी निरीक्षण रिपोर्ट और वर्तमान स्थिति की समीक्षा करें।

इस मामले में विभागीय स्तर पर वास्तविक स्थिति की जांच होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि निरीक्षण के बाद किन सुधारात्मक कदमों पर काम किया गया और वर्तमान में केंद्र की संचालन व्यवस्था क्या है।

आसपास स्वास्थ्य केंद्र होने का दिया जा रहा तर्क

नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर एक कर्मचारी ने बताया कि पचोखर से करीब साढ़े सात किलोमीटर की दूरी पर नरैनी, बहेरी और अतर्रा में सीएचसी-पीएचसी जैसी स्वास्थ्य सुविधाएं मौजूद हैं। कर्मचारी के मुताबिक, आसपास अन्य स्वास्थ्य केंद्र होने के कारण पचोखर में एमबीबीएस डॉक्टर की तैनाती को लेकर भी समस्या बनी हुई है।

हालांकि, ग्रामीणों का तर्क है कि स्थानीय स्तर पर एक उप स्वास्थ्य केंद्र होने का उद्देश्य ही यह है कि सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं के लिए लोगों को दूर न जाना पड़े। उदयनरायन ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि डॉक्टर की तैनाती नहीं करनी थी तो लाखों रुपये की लागत से भवन निर्माण की जरूरत और योजना पर भी विचार किया जाना चाहिए।

सरकारी भवन के रखरखाव को लेकर भी चिंता

ग्रामीणों ने उप स्वास्थ्य केंद्र के भवन के रखरखाव को लेकर भी चिंता जताई है। बबलू के मुताबिक, भवन की दीवार पर लिखा ‘उप स्वास्थ्य केंद्र’ भी समय के साथ फीका पड़ता जा रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि भवन का नियमित उपयोग और रखरखाव नहीं किया गया तो सरकारी धन से तैयार की गई संपत्ति धीरे-धीरे खराब हो सकती है। इसलिए केंद्र को सक्रिय करने के साथ ही भवन के रखरखाव की व्यवस्था पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

रमाकांत का कहना है कि सरकारी धन से तैयार किए गए भवन का नियमित उपयोग और उसकी व्यवस्था की जवाबदेही तय होनी चाहिए। वहीं, नरायन ने कहा कि गांव के गरीब और जरूरतमंद लोगों को छोटी बीमारी के इलाज के लिए भी बाहर जाना पड़ता है।

ग्रामीणों ने की नियमित स्वास्थ्य सेवा शुरू करने की मांग

पचोखर के ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से उप स्वास्थ्य केंद्र की वास्तविक स्थिति की जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही केंद्र पर स्वास्थ्यकर्मियों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं शुरू कराने की मांग भी की गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि केंद्र नियमित रूप से संचालित होता है तो गांव और आसपास के लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए दूसरे स्थानों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

व्यवस्था की समीक्षा से मिल सकता है समाधान

पचोखर का मामला केवल एक भवन के इस्तेमाल का विषय नहीं है, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और उपलब्धता से भी जुड़ा है। एक ओर स्वास्थ्य केंद्र के लिए भवन तैयार है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों को नियमित सेवा मिलने का इंतजार है।

ऐसे में संबंधित विभाग द्वारा केंद्र की वर्तमान स्थिति, कर्मचारियों की तैनाती, निरीक्षण रिपोर्ट और भवन के रखरखाव की समीक्षा की जाए तो स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है। साथ ही, ग्रामीणों की जरूरत के अनुसार स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी ध्यान दिया जाना जरूरी है।

फिलहाल ग्रामीणों की नजर स्वास्थ्य विभाग की ओर है। उनका कहना है कि उप स्वास्थ्य केंद्र का भवन केवल निर्माण तक सीमित न रहे, बल्कि इसका नियमित संचालन हो और गांव के लोगों को इसका वास्तविक लाभ मिले।

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