Lucknow Bulldozer Action: जिला कोर्ट में वकीलों के चैंबरों पर चला बुलडोजर, विरोध में सड़क पर बैठे अधिवक्ता
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रविवार, 25 अक्टूबर को जिला कोर्ट के आसपास बने वकीलों के चैंबरों को हटाने की कार्रवाई शुरू होने से हलचल तेज हो गई। नगर निगम की टीम ने हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन में चिह्नित चैंबरों को ध्वस्त करने का अभियान चलाया। इस दौरान मौके पर 10 बुलडोजर और मलबा हटाने के लिए 10 हाइवा लगाए जाने की जानकारी सामने आई। वहीं, किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी पुलिस बल तैनात रहा।
कार्रवाई शुरू होते ही बड़ी संख्या में वकील विरोध में उतर आए। अधिवक्ताओं ने सड़क पर बोरी बिछाकर बैठते हुए धरना-प्रदर्शन किया और नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान कुछ वकीलों ने कहा कि इस कार्रवाई का जवाब वर्ष 2027 में दिया जाएगा। हालांकि, उनका मुख्य तर्क यह रहा कि चैंबरों को हटाने से पहले उनके बैठने और काम करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए।
हाई कोर्ट के आदेश पर नगर निगम की कार्रवाई
लखनऊ नगर निगम ने जिला कोर्ट के आसपास बने कुल 245 चैंबरों को चिह्नित किए जाने की जानकारी दी है। इन चैंबरों पर पहचान के लिए लाल निशान लगाए गए और नंबर दर्ज किए गए थे। इसके अलावा, संबंधित लोगों को पहले ही नोटिस जारी किए जाने की बात भी सामने आई है।
रविवार को नगर निगम की टीम भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और चिह्नित निर्माणों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की। इसके लिए बुलडोजर और मलबा उठाने वाले वाहनों की मदद ली गई। कार्रवाई का आधार हाई कोर्ट के निर्देश बताए गए हैं।
इससे पहले भी जिला कोर्ट के आसपास अवैध निर्माणों को हटाने के लिए अभियान चलाया जा चुका है। अब शेष चिह्नित चैंबरों को लेकर कार्रवाई किए जाने से मामला फिर चर्चा में आ गया है। हालांकि, 245 चैंबरों को चिह्नित किए जाने और रविवार को वास्तव में कितने चैंबर हटाए गए, इन दोनों आंकड़ों में अंतर को ध्यान में रखना जरूरी है।
विरोध में सड़क पर बैठे वकील
नगर निगम की टीम जब चैंबरों को ध्वस्त करने पहुंची, तो वकीलों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। कई अधिवक्ता सड़क पर बैठ गए और कार्रवाई के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। मौके पर पुलिस बल की मौजूदगी के बीच नगर निगम की टीम ने अपना अभियान जारी रखा।
प्रदर्शन कर रहे वकीलों का कहना है कि वे लंबे समय से इन चैंबरों में बैठकर वकालत कर रहे हैं। उनके मुताबिक, कई अधिवक्ता पिछले 15 से 20 वर्षों से यहां अपने पेशेवर कामकाज को संचालित कर रहे हैं। ऐसे में चैंबर हटने से उनके रोजमर्रा के काम पर असर पड़ने की आशंका है।
वकीलों ने यह भी कहा कि वे न्यायालय के आदेश का पालन किए जाने के खिलाफ नहीं हैं। हालांकि, उनका आग्रह है कि प्रशासन को कार्रवाई के साथ-साथ उनकी व्यावहारिक समस्याओं पर भी विचार करना चाहिए। उनका तर्क है कि चैंबरों में बैठकर वे मुवक्किलों से मिलते हैं, मुकदमों से जुड़े दस्तावेज तैयार करते हैं और कानूनी सलाह देते हैं। इसलिए वैकल्पिक स्थान के बिना कामकाज जारी रखना मुश्किल हो सकता है।
वकीलों की मांग—पहले हो वैकल्पिक व्यवस्था
इस पूरे मामले में अधिवक्ताओं की प्रमुख मांग उनके बैठने के लिए दूसरी जगह उपलब्ध कराने की है। वकीलों का कहना है कि यदि संबंधित चैंबरों को अवैध मानते हुए हटाने का आदेश दिया गया है, तो प्रशासन को वैकल्पिक व्यवस्था पर भी विचार करना चाहिए।
उनके अनुसार, लंबे समय से एक ही स्थान पर काम कर रहे अधिवक्ताओं को अचानक दूसरी जगह तलाशने में परेशानी हो सकती है। इसके अलावा, मुवक्किलों को भी अपने मामलों से संबंधित वकीलों से मिलने के लिए नई जगह की जानकारी जुटानी पड़ेगी।
इसलिए वकीलों का आग्रह है कि जिला प्रशासन और नगर निगम उनके प्रतिनिधियों के साथ बातचीत कर बैठने की जगह से जुड़ी समस्या का समाधान निकालें। उनका कहना है कि इससे न्यायिक कार्य से जुड़े लोगों को राहत मिल सकती है और भविष्य में कामकाज को व्यवस्थित रखना भी आसान होगा।
हालांकि, वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराने को लेकर प्रशासन की ओर से किसी अंतिम निर्णय या औपचारिक घोषणा की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं हुई है।
245 चैंबर चिह्नित, पहले नोटिस जारी किए जाने का दावा
नगर निगम की कार्रवाई के संबंध में सामने आई जानकारी के अनुसार, चिह्नित चैंबरों पर लाल निशान लगाने के साथ नंबर भी दर्ज किए गए थे। संबंधित लोगों को नोटिस दिए जाने की बात कही गई है। प्रशासन की कार्रवाई को हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन के तौर पर बताया जा रहा है।
दूसरी ओर, वकीलों की चिंता उनके पेशेवर काम और आजीविका से जुड़ी है। ऐसे में इस मामले के दो प्रमुख पक्ष सामने आते हैं—एक ओर न्यायालय के निर्देशों के अनुसार चिह्नित अवैध निर्माणों को हटाने की कार्रवाई और दूसरी ओर अधिवक्ताओं के लिए काम करने की जगह की आवश्यकता।
इस तरह के मामलों में न्यायालय के आदेश, संबंधित निर्माणों की स्थिति और प्रशासनिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होते हैं। वहीं, प्रभावित लोगों की व्यावहारिक समस्याओं को सुनना भी समाधान की दिशा में उपयोगी हो सकता है।
आगे क्या होगा?
लखनऊ जिला कोर्ट के आसपास चैंबरों को हटाने की कार्रवाई के बीच अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और अधिवक्ताओं के बीच वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर कोई सहमति बनती है या नहीं। फिलहाल, वकीलों ने विरोध प्रदर्शन के जरिए अपनी मांग सामने रखी है, जबकि नगर निगम हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन में कार्रवाई कर रहा है।
लखनऊ जिला कोर्ट में चिह्नित वकीलों के चैंबरों को हटाने की कार्रवाई ने प्रशासनिक आदेशों और अधिवक्ताओं की कामकाज संबंधी जरूरतों के बीच संतुलन का सवाल खड़ा किया है। आने वाले समय में प्रशासन का रुख और वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर होने वाला निर्णय इस मामले में महत्वपूर्ण रहेगा।

