95 वर्षीय सरोज देवी के नेत्रदान से दो लोगों को मिलेगी नई रोशनी, मथुरा में मानव सेवा की बनी प्रेरक मिसाल
मथुरा:योगेश भारद्वाज
मानव सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व की एक प्रेरणादायी मिसाल प्रस्तुत करते हुए 95 वर्षीय स्वर्गीय श्रीमती सरोज देवी के निधन के उपरांत उनके परिजनों ने नेत्रदान का संकल्प पूरा कराया।
इस मानवीय पहल के माध्यम से दो दृष्टिबाधित व्यक्तियों के जीवन में नई रोशनी पहुंचने की संभावना बनी है। यह कार्य विकलांग सहायता संस्था, मथुरा के श्रीकृष्ण नेत्र संग्रह केंद्र के सहयोग से सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया।
नेत्रदान को लंबे समय से समाज में सबसे महत्वपूर्ण अंगदानों में से एक माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, किसी व्यक्ति के निधन के बाद सुरक्षित तरीके से किए गए नेत्रदान से दो कॉर्निया प्रत्यारोपण के लिए उपयोगी हो सकते हैं, जिससे दो दृष्टिबाधित व्यक्तियों को लाभ मिलने की संभावना रहती है।
इसी कारण स्वास्थ्य विशेषज्ञ और सामाजिक संगठन लगातार अधिक से अधिक लोगों को नेत्रदान के प्रति जागरूक करने का प्रयास करते हैं।
परिजनों ने निभाया मानवीय संकल्प
स्वर्गीय सरोज देवी के परिजनों ने शोक की घड़ी में भी समाजहित को प्राथमिकता देते हुए नेत्रदान की सहमति प्रदान की। उनके इस निर्णय को उपस्थित सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्यकर्मियों ने मानवता की सेवा का प्रेरक उदाहरण बताया।
संस्था के अनुसार, समयबद्ध प्रक्रिया के तहत आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करते हुए नेत्र सुरक्षित रूप से संग्रहित किए गए, ताकि उन्हें आगे प्रत्यारोपण की प्रक्रिया में उपयोग किया जा सके।
इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने कहा कि ऐसे निर्णय समाज में अंगदान और विशेष रूप से नेत्रदान के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विशेषज्ञ टीम ने पूरी की प्रक्रिया
नेत्रदान की प्रक्रिया डॉ. श्रॉफ आई चैरिटी हॉस्पिटल तथा ब्रज हेल्थ केयर, वृंदावन के सहयोग से संपन्न हुई। यह कार्य संस्थान के निदेशक डॉ. अशोक अग्रवाल के निर्देशन में किया गया।
विकलांग सहायता संस्था के उपाध्यक्ष प्रेमशंकर अग्रवाल, कार्यालय प्रमुख कुलदीप शर्मा और टीम सदस्य रोशन सिंह ने सीपी मैसी डॉ. सुफियान दानिश के साथ स्वर्गीय सरोज देवी के परिजन अरुण भारद्वाज के निवास, राधाकृष्ण वाटिका (बिरला मंदिर, मथुरा) पहुंचकर नेत्रदान की संपूर्ण प्रक्रिया निर्धारित चिकित्सा मानकों के अनुरूप संपन्न कराई।
संस्था ने बताया कि पूरी प्रक्रिया को आवश्यक चिकित्सीय प्रोटोकॉल का पालन करते हुए समय पर पूरा किया गया।
“नेत्रदान महादान” का दिया संदेश
इस अवसर पर वामन भगवान महोत्सव समिति के संस्थापक श्याम शर्मा ने नेत्रदान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “नेत्रदान महादान” केवल एक जागरूकता अभियान का संदेश नहीं, बल्कि मानव सेवा का अत्यंत महत्वपूर्ण माध्यम है।
उन्होंने कहा कि यदि अधिक से अधिक लोग मृत्यु के बाद नेत्रदान का संकल्प लें, तो बड़ी संख्या में दृष्टिबाधित व्यक्तियों को लाभ मिल सकता है। उन्होंने समाज से अपील की कि लोग इस विषय में सही जानकारी प्राप्त करें और परिवार के साथ इस महत्वपूर्ण निर्णय पर चर्चा करें।
उन्होंने यह भी कहा कि नेत्रदान जैसे कार्य समाज में संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों को मजबूत करते हैं।
जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता
कार्यक्रम के दौरान समिति के महामंत्री अर्जुन पंडित ने कहा कि स्वर्गीय सरोज देवी का नेत्रदान समाज के लिए प्रेरणादायी उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि ऐसे सकारात्मक उदाहरण लोगों में जागरूकता बढ़ाते हैं और अंगदान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने में भी सहायता करते हैं।
उनके अनुसार यदि समाज में नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़े और अधिक लोग स्वेच्छा से संकल्प लें, तो भविष्य में बड़ी संख्या में कॉर्निया प्रत्यारोपण की आवश्यकता वाले मरीजों को लाभ मिल सकता है।
नेत्रदान क्यों है महत्वपूर्ण?
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, कॉर्निया संबंधी बीमारियों के कारण अनेक लोग दृष्टि बाधित हो जाते हैं। ऐसे मामलों में उपयुक्त परिस्थितियों में कॉर्निया प्रत्यारोपण एक प्रभावी उपचार विकल्प हो सकता है।
हालांकि, प्रत्यारोपण के लिए उपलब्ध कॉर्निया की संख्या अक्सर आवश्यकता से कम होती है। इसी कारण स्वास्थ्य संस्थान और सामाजिक संगठन लगातार नेत्रदान के प्रति जागरूकता अभियान चलाते हैं।
विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि नेत्रदान केवल प्रशिक्षित चिकित्सा टीम द्वारा निर्धारित समयसीमा के भीतर ही किया जाता है और पूरी प्रक्रिया वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप संपन्न होती है।
सामाजिक संगठनों की महत्वपूर्ण भूमिका
मथुरा सहित देश के विभिन्न हिस्सों में कई सामाजिक संस्थाएं और चिकित्सा संगठन नेत्रदान जागरूकता अभियान चला रहे हैं।
इन अभियानों का उद्देश्य लोगों को नेत्रदान से जुड़ी सही जानकारी देना, भ्रांतियों को दूर करना तथा इच्छुक नागरिकों को संकल्प लेने के लिए प्रेरित करना है।
विकलांग सहायता संस्था भी लंबे समय से इस दिशा में कार्य कर रही है और विभिन्न सामाजिक संगठनों तथा चिकित्सा संस्थानों के सहयोग से नेत्र संग्रह एवं जागरूकता कार्यक्रम संचालित करती रही है।
परिजनों के निर्णय की हुई सराहना
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने स्वर्गीय श्रीमती सरोज देवी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
साथ ही उनके परिजनों के इस मानवीय निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि कठिन समय में भी समाजहित को प्राथमिकता देना प्रेरणादायी उदाहरण है।
उपस्थित लोगों ने विश्वास व्यक्त किया कि इस पहल से अन्य परिवार भी नेत्रदान के महत्व को समझेंगे और भविष्य में अधिक लोग इस दिशा में आगे आएंगे।
समाज के लिए प्रेरक संदेश
स्वर्गीय सरोज देवी का नेत्रदान केवल एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता का महत्वपूर्ण संदेश भी है। यह पहल बताती है कि मृत्यु के बाद भी मानव सेवा का अवसर संभव है और एक सकारात्मक निर्णय कई लोगों के जीवन को प्रभावित कर सकता है।
यदि समाज में नेत्रदान के प्रति जागरूकता लगातार बढ़ती है और अधिक नागरिक स्वेच्छा से इस दिशा में आगे आते हैं, तो भविष्य में कॉर्निया प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे अनेक दृष्टिबाधित लोगों को लाभ मिलने की संभावना बढ़ सकती है।
इसी कारण विशेषज्ञ और सामाजिक संगठन लोगों से अपील करते हैं कि वे नेत्रदान से संबंधित प्रमाणिक जानकारी प्राप्त करें, अपने परिवार के साथ इस विषय पर चर्चा करें और इच्छा होने पर अधिकृत संस्थानों के माध्यम से नेत्रदान का संकल्प लें।

