भौमवती अमावस्या पर नवाबगंज डंडी स्वामी आश्रम में संत सम्मान और प्रसाद वितरण, श्रद्धा के साथ हुआ आयोजन
रिपोर्ट- विक्की रघुवंशी
कानपुर: भौमवती अमावस्या के पावन अवसर पर नवाबगंज स्थित डंडी स्वामी आश्रम में धार्मिक श्रद्धा, सेवा और संत सम्मान का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस आयोजन का संचालन विश्व हिंदू महासंघ एवं आरोग्यधाम चिकित्सालय परिवार के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संत-महात्मा, श्रद्धालु और समाजसेवी उपस्थित रहे। पूजा-अर्चना के साथ संतों का सम्मान किया गया तथा सात्विक भोजन प्रसाद का वितरण भी किया गया।
आयोजकों ने बताया कि इस प्रकार के धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों का उद्देश्य भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं और संत समाज के प्रति सम्मान की भावना को प्रोत्साहित करना है।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित संतों ने भौमवती अमावस्या के धार्मिक महत्व पर भी प्रकाश डाला और समाज में सेवा, सद्भाव तथा आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाने का संदेश दिया।
पूजा-अर्चना के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना से हुई। डंडी स्वामी आश्रम में उपस्थित संतों और श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से प्रार्थना कर देश, समाज और मानव कल्याण की कामना की।
इसके बाद संतों का पारंपरिक सम्मान किया गया। आयोजन स्थल पर आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला, जहां वैदिक मंत्रोच्चारण और भजन-कीर्तन के बीच श्रद्धालुओं ने कार्यक्रम में सहभागिता की।
आयोजकों ने बताया कि धार्मिक पर्व केवल पूजा तक सीमित नहीं होते, बल्कि समाज में सेवा और सहयोग की भावना को भी मजबूत करते हैं।
संतों को किया गया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित संतों को सम्मान स्वरूप दक्षिणा, नारायण वस्त्र, उपहार तथा राम दरबार का चित्र भेंट किया गया।
आयोजन से जुड़े डॉ. हेमंत मोहन और डॉ. आरती मोहन ने स्वयं संतों का सम्मान किया तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि संत समाज भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में उनका सम्मान करना समाज के लिए गौरव की बात है।
उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज में सकारात्मक सोच और सेवा भावना को बढ़ावा मिलता है।
सात्विक चूल्हे पर तैयार हुआ भोजन प्रसाद
कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण सात्विक भोजन प्रसाद रहा।
आयोजकों के अनुसार, महाराज उदितानंद महाराज के निर्देशानुसार भोजन पारंपरिक चूल्हे पर तैयार कराया गया। श्रद्धालुओं का मानना है कि पारंपरिक विधि से तैयार किया गया सात्विक भोजन धार्मिक आयोजनों की परंपरा और आध्यात्मिक वातावरण को और अधिक सुदृढ़ करता है।
पूजा-अर्चना के उपरांत उपस्थित संतों और श्रद्धालुओं को श्रद्धापूर्वक भोजन प्रसाद वितरित किया गया।
डॉ. हेमंत मोहन और डॉ. आरती मोहन ने स्वयं संतों को प्रसाद परोसकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर सेवा भावना और विनम्रता का विशेष वातावरण देखने को मिला।
संतों ने बताया भौमवती अमावस्या का महत्व
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न संतों ने भौमवती अमावस्या के धार्मिक महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि भारतीय सनातन परंपरा में अमावस्या का विशेष स्थान माना जाता है। इस अवसर पर श्रद्धा, दान, सेवा, पूजा-अर्चना और सत्संग का विशेष महत्व बताया जाता है।
संतों ने लोगों से धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक उत्तरदायित्व निभाने, पर्यावरण संरक्षण, सेवा कार्यों में भागीदारी और समाज में सद्भाव बनाए रखने का भी संदेश दिया।
वैदिक मंत्रोच्चारण से गूंजा आश्रम परिसर
कार्यक्रम के दौरान आश्रम परिसर में वैदिक मंत्रोच्चारण और आशीर्वचनों का आयोजन भी हुआ।
इस अवसर पर श्री प्रकाश आश्रम, रामानंद आश्रम तथा अवध बिहारी शुक्ला सहित अन्य संतों ने वैदिक मंत्रों का उच्चारण करते हुए उपस्थित श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया। धार्मिक वातावरण के बीच श्रद्धालुओं ने संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया और कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता निभाई।
सेवा और आध्यात्मिकता का मिला संदेश
आयोजकों ने कहा कि धार्मिक आयोजन केवल अनुष्ठान तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि समाज सेवा और मानवीय मूल्यों को भी मजबूत करने चाहिए। इसी उद्देश्य से कार्यक्रम में संत सम्मान, प्रसाद वितरण और सामूहिक सहभागिता को विशेष महत्व दिया गया। उनका कहना था कि समाज में परस्पर सहयोग, सम्मान और सेवा की भावना ही भारतीय संस्कृति की पहचान है। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे सामाजिक एवं धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
बड़ी संख्या में श्रद्धालु और गणमान्य लोग रहे उपस्थित
कार्यक्रम में संत समाज के साथ विभिन्न क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं और गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया। इस अवसर पर श्रीमती पुष्पा मोहन, अशोक मोहन, ममता तिवारी, अखिल त्यागी, अनीता मिश्रा, अलका मोहन, अनीता त्यागी, प्रिया शर्मा, बृजेश मिश्रा, शैलू गुप्ता, सुनील गुप्ता, राकेश तिवारी सहित अनेक लोग उपस्थित रहे। सभी ने कार्यक्रम की सफलता के लिए आयोजकों की सराहना की और संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया।
धार्मिक आयोजन सामाजिक एकता को भी देते हैं मजबूती
विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन समाज में आपसी संवाद, सहयोग और सामाजिक एकता को बढ़ावा देते हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय परंपराओं, आध्यात्मिक मूल्यों और सेवा की भावना से जोड़ने का अवसर मिलता है। साथ ही, समाज में सकारात्मक वातावरण और पारस्परिक सम्मान की भावना भी मजबूत होती है।
श्रद्धा, सेवा और सम्मान का प्रेरक आयोजन
भौमवती अमावस्या के अवसर पर नवाबगंज स्थित डंडी स्वामी आश्रम में आयोजित यह कार्यक्रम श्रद्धा, सेवा और संत सम्मान का सुंदर उदाहरण बनकर सामने आया।
पूजा-अर्चना, संत सम्मान, सात्विक भोजन प्रसाद और आध्यात्मिक संदेशों के माध्यम से उपस्थित लोगों ने भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं को आत्मसात करने का प्रयास किया।
आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में भी इस प्रकार के आयोजन समाज में धार्मिक जागरूकता, सेवा भावना और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।

