92 साल के बाबा राधेश्याम की 10 साल पुरानी मांग: कठारा के 200 साल पुराने माता भुइयां रानी मंदिर तक कब बनेगी सड़क?
रिपोर्ट- अमन कुमार
कानपुर: उम्र 92 वर्ष, शरीर अब पहले जैसा साथ नहीं देता, लेकिन संकल्प आज भी अडिग है। कानपुर के बिधनू क्षेत्र के कठारा गांव निवासी बाबा राधेश्याम पिछले करीब 10 वर्षों से एक ही मांग को लेकर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के दरवाजे खटखटा रहे हैं।
उनकी इच्छा है कि गांव के करीब 200 वर्ष पुराने माता भुइयां रानी मंदिर तक पक्की सड़क का निर्माण हो जाए, ताकि श्रद्धालुओं को आने-जाने में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
हालांकि, कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को प्रार्थना पत्र देने के बावजूद अब तक सड़क निर्माण का कार्य शुरू नहीं हो सका है। ऐसे में बाबा राधेश्याम की उम्र बढ़ने के साथ उनकी चिंता भी बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि वे अपने जीवनकाल में मंदिर तक सड़क बनती हुई देखना चाहते हैं।
करीब एक किलोमीटर कच्चे रास्ते से गुजरते हैं श्रद्धालु
कठारा गांव के पास रेलवे लाइन के किनारे स्थित माता भुइयां रानी मंदिर क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां प्रतिदिन स्थानीय श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं, जबकि विशेष अवसरों पर आसपास के कई गांवों और जिलों से भी लोग माता के दर्शन करने आते हैं।
इसके बावजूद मंदिर तक पहुंचने के लिए आज भी करीब एक किलोमीटर लंबा कच्चा रास्ता ही उपलब्ध है। सामान्य दिनों में भी इस मार्ग पर चलना आसान नहीं होता, वहीं बरसात के मौसम में रास्ता कीचड़ और पानी से भर जाता है।
परिणामस्वरूप बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे बच्चों के साथ आने वाले श्रद्धालुओं को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस मार्ग का पक्की सड़क के रूप में निर्माण हो जाए तो मंदिर तक पहुंचना सभी के लिए सुविधाजनक हो जाएगा।
रेलवे से सेवानिवृत्ति के बाद मंदिर सेवा को समर्पित किया जीवन
बाबा राधेश्याम वर्ष 1992 में भारतीय रेलवे से सेवानिवृत्त हुए थे। सेवा निवृत्ति के बाद वे दिल्ली से अपने पैतृक गांव कठारा लौट आए। इसके बाद उन्होंने अपने पूर्वजों द्वारा स्थापित माता भुइयां रानी मंदिर की सेवा और संरक्षण का जिम्मा अपने हाथों में लिया।
उन्होंने अपने निजी संसाधनों से मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य कराया। इसके साथ ही मंदिर परिसर का विकास भी कराया और यहां लगभग 35 से 40 फीट ऊंची हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित करवाई। आज यह प्रतिमा श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन चुकी है।
समय के साथ मंदिर की प्रसिद्धि भी बढ़ी है और अब यहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। हालांकि, सड़क की समस्या आज भी पहले की तरह बनी हुई है।
“अपने लिए कुछ नहीं, सिर्फ मंदिर तक सड़क चाहिए”
बाबा राधेश्याम का कहना है कि उन्होंने कभी अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए किसी से कोई मांग नहीं की। उनकी एकमात्र इच्छा यही है कि माता के दरबार तक आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा मिल सके।
उन्होंने भावुक होकर कहा कि उम्र अब काफी हो चुकी है और मंदिर तक पैदल पहुंचना भी पहले जैसा आसान नहीं रहा। फिर भी वे चाहते हैं कि उनके जीवनकाल में सड़क का निर्माण पूरा हो जाए। उनके अनुसार यदि ऐसा हो जाता है तो उन्हें लगेगा कि उनका जीवन सफल हो गया।
मुख्यमंत्री से लेकर जिलाधिकारी तक भेज चुके हैं प्रार्थना पत्र
बाबा राधेश्याम बताते हैं कि पिछले कई वर्षों में उन्होंने मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी, संबंधित विभागों के अधिकारियों तथा क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को कई बार लिखित प्रार्थना पत्र भेजे हैं। प्रत्येक बार उन्हें सकारात्मक आश्वासन मिला, लेकिन अब तक सड़क निर्माण का कार्य धरातल पर शुरू नहीं हो पाया।
ग्रामीणों का भी कहना है कि मंदिर तक सड़क की मांग नई नहीं है। कई बार यह मुद्दा स्थानीय स्तर पर उठाया गया, लेकिन किसी कारणवश योजना आगे नहीं बढ़ सकी।
धार्मिक आस्था के साथ जुड़ी है स्थानीय मान्यता
माता भुइयां रानी मंदिर को लेकर क्षेत्र में गहरी धार्मिक आस्था है। स्थानीय लोगों का मानना है कि माता के दर्शन और पूजा-अर्चना से गठिया तथा वात संबंधी समस्याओं में राहत मिलती है। यही कारण है कि कानपुर के अलावा आसपास के कई जिलों से भी श्रद्धालु यहां नियमित रूप से पहुंचते हैं।
ग्रामीणों का यह भी दावा है कि बुंदेलखंड क्षेत्र के जलोखर स्थित माता भुइयां रानी मंदिर के बाद कठारा का यह मंदिर सबसे प्राचीन स्थलों में शामिल माना जाता है। हालांकि, इस ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के बावजूद यहां तक पहुंचने के लिए अभी तक पक्का मार्ग उपलब्ध नहीं है।
सड़क बनने से बढ़ेगा धार्मिक और पर्यटन महत्व
स्थानीय ग्रामीणों का मानना है कि यदि मंदिर तक पक्की सड़क बन जाती है तो इसका लाभ केवल श्रद्धालुओं तक सीमित नहीं रहेगा। इससे क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही आसपास के गांवों की आवाजाही आसान होगी और स्थानीय व्यापार को भी नई गति मिल सकती है।
इसके अतिरिक्त, सड़क बनने से बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और महिलाओं के लिए मंदिर तक पहुंचना काफी सरल हो जाएगा। बरसात के दिनों में भी श्रद्धालुओं को कीचड़ और जलभराव जैसी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा।
ग्राम प्रधान ने कहा- प्रस्ताव तैयार, जल्द निर्माण का प्रयास
ग्राम प्रधान अरविंद कुशवाहा के अनुसार बराखेड़ा गांव के पीछे से मंदिर तक सड़क निर्माण की कार्ययोजना तैयार की जा चुकी है। इस संबंध में संबंधित अधिकारियों से लगातार बातचीत की जा रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद सड़क निर्माण का कार्य शुरू कराया जाएगा।
हालांकि, निर्माण कार्य कब शुरू होगा, इसे लेकर अभी कोई निश्चित समयसीमा सामने नहीं आई है।
प्रशासन से ग्रामीणों की उम्मीद कायम
कठारा गांव के लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण की मांग केवल एक विकास कार्य नहीं, बल्कि हजारों श्रद्धालुओं की सुविधा और क्षेत्र की धार्मिक पहचान से जुड़ा विषय है। बाबा राधेश्याम की वर्षों पुरानी इच्छा भी इसी मांग से जुड़ी हुई है।
अब सभी की निगाहें प्रशासन और संबंधित विभागों पर टिकी हैं। यदि जल्द सड़क निर्माण शुरू होता है तो न केवल श्रद्धालुओं को राहत मिलेगी, बल्कि 92 वर्षीय बाबा राधेश्याम की वर्षों पुरानी इच्छा भी पूरी हो सकेगी।
गांव के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन इस मांग को प्राथमिकता देगा, ताकि आने वाले समय में माता भुइयां रानी मंदिर तक श्रद्धालु सुरक्षित और सुगम मार्ग से पहुंच सकें।

