बांदा की डीएम कॉलोनी में पांच दिनों से गंदे पानी की सप्लाई, लोगों ने प्रशासन से त्वरित समाधान की मांग की
रिपोर्ट- शलेन्द्र शानू वर्मा
बांदा: उत्तर प्रदेश के बांदा शहर स्थित डीएम कॉलोनी में पिछले पांच दिनों से गंदे और दूषित पानी की आपूर्ति होने की शिकायत सामने आई है। लोगों का कहना है कि नलों से आ रहा पानी बदरंग और दुर्गंधयुक्त दिखाई दे रहा है। जिसके कारण पेयजल की गुणवत्ता को लेकर लोगों में चिंता बढ़ गई है। स्थानीय ने आशंका जताई है कि यदि समस्या का जल्द समाधान नहीं हुआ तो जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। सभी ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह समस्या पिछले कई दिनों से लगातार बनी हुई है। उनका कहना है कि नलों से आने वाले पानी का उपयोग पीने या खाना बनाने के लिए सुरक्षित नहीं लग रहा। अधिकांश परिवारों को पीने के पानी के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ रही है, जिससे अतिरिक्त आर्थिक और दैनिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
पांच दिन से बनी हुई है समस्या
डीएम कॉलोनी के निवासियों का कहना है कि करीब पांच दिन पहले जलापूर्ति के दौरान पानी का रंग बदलना शुरू हुआ। शुरुआत में लोगों ने इसे अस्थायी तकनीकी समस्या समझा, लेकिन स्थिति लगातार बनी रहने से चिंता बढ़ने लगी।
कई लोगों ने बताया कि पानी में मिट्टी जैसे कण और दुर्गंध महसूस हो रही है। हालांकि, पानी के दूषित होने की आधिकारिक पुष्टि अभी संबंधित विभाग द्वारा नहीं की गई है। स्थानीय लोगों का आग्रह है कि पानी के नमूनों की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए।
नागरिकों ने जताई आशंका
स्थानीय निवासियों का कहना है कि दूषित पानी के उपयोग से जलजनित रोगों का खतरा बढ़ सकता है। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के स्वास्थ्य को लेकर परिवारों में चिंता देखी जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि पेयजल की गुणवत्ता प्रभावित होती है तो दस्त, टाइफाइड, हैजा, पीलिया और अन्य जलजनित संक्रमणों का जोखिम बढ़ सकता है। किसी भी बीमारी के फैलने की पुष्टि केवल स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद ही की जा सकती है। इसी कारण लोगों ने प्रशासन से एहतियाती कदम उठाने और जल गुणवत्ता की तत्काल जांच कराने की मांग की है।
पानी की व्यवस्था करने को परिवार मजबूर
गंदे पानी की शिकायत के बाद कई परिवारों ने पीने के लिए बोतलबंद पानी खरीदना शुरू कर दिया है, जबकि कुछ लोग निजी हैंडपंप या अन्य सुरक्षित स्रोतों से पानी लाने को मजबूर हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रोजाना अतिरिक्त पानी की व्यवस्था करना सभी परिवारों के लिए आसान नहीं है। इससे आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है और दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। वहीं कुछ निवासियों ने बताया कि घरेलू उपयोग के लिए भी पानी को कई बार छानने और उबालने के बाद ही इस्तेमाल किया जा रहा है।
जलापूर्ति व्यवस्था की मांग
नागरिकों ने संबंधित जल संस्थान और नगर प्रशासन से मांग की है कि पूरी जलापूर्ति लाइन का निरीक्षण कराया जाए। उनका कहना है कि यदि कहीं पाइपलाइन क्षतिग्रस्त है या सीवर लाइन के संपर्क में आ गई है, तो उसे तत्काल ठीक कराया जाना चाहिए।
उन्होंने पेयजल की गुणवत्ता की प्रयोगशाला जांच कराने और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की भी मांग की है, ताकि लोगों को सही जानकारी मिल सके।
लीकेज की आशंका
स्थानीय लोगों का अनुमान है कि समस्या का कारण पाइपलाइन में लीकेज या तकनीकी खराबी हो सकती है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। कई बार पुरानी पाइपलाइन में रिसाव होने पर बाहरी गंदा पानी जलापूर्ति लाइन में प्रवेश कर सकता है। इसलिए समय-समय पर पाइपलाइन का निरीक्षण और रखरखाव आवश्यक होता है।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
निवासियों ने जिला प्रशासन से अनुरोध किया है कि समस्या को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो लोगों को लंबे समय तक असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करने की भी मांग की है।

