कानपुर के ओंकारेश्वर मंदिर में डॉ. उमाशंकर पचौरी ने सुनाया श्री हनुमत चरित्र, दिए प्रेरक सूत्र
रिपोर्ट – विक्की रघुवंशी
कानपुर। जवाहर नगर स्थित ओंकारेश्वर मंदिर प्रांगण में आयोजित श्री हनुमत चरित्र कथा एवं जीवन प्रबंधन विषयक व्याख्यान में श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक ज्ञान और जीवन मूल्यों से जुड़े प्रेरक विचारों का श्रवण किया। इस अवसर पर प्रख्यात शिक्षाविद एवं कथावाचक आचार्य डॉ. उमाशंकर पचौरी ने भगवान श्री हनुमान के आदर्श चरित्र के माध्यम से जीवन प्रबंधन, सेवा भावना, विनम्रता और सकारात्मक दृष्टिकोण का महत्व समझाया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। व्याख्यान के दौरान आचार्य पचौरी ने कहा कि यदि व्यक्ति अपने जीवन में श्री हनुमान जी के आदर्शों को अपनाता है तो वह न केवल व्यक्तिगत बल्कि सामाजिक जीवन में भी सफलता और संतुलन प्राप्त कर सकता है।
सत्संग जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम
आचार्य डॉ. उमाशंकर पचौरी ने कहा कि जब व्यक्ति के शुभ कर्म फलित होते हैं, तभी उसे सत्संग का अवसर प्राप्त होता है। वहीं, यदि कोई व्यक्ति सत्संग से संकल्प लेकर लौटता है और उसे अपने जीवन में उतारने का प्रयास करता है, तो उसका जीवन नए अध्याय की शुरुआत करता है।
उन्होंने कहा कि सत्संग केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह आत्मचिंतन और आत्मसुधार का माध्यम भी है। इसके माध्यम से व्यक्ति अपने विचारों, व्यवहार और जीवन शैली में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।
परमात्मा का स्मरण संकट में देता है संबल
व्याख्यान के दौरान उन्होंने परमात्मा के स्मरण का महत्व बताते हुए कहा कि जैसे वर्षा ऋतु में छाता व्यक्ति को भीगने से बचाता है, उसी प्रकार ईश्वर का स्मरण और भक्ति जीवन की कठिन परिस्थितियों में मानसिक शक्ति और धैर्य प्रदान करती है।
उन्होंने कहा कि भक्ति का अर्थ केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करना, दूसरों के प्रति सद्भाव रखना और समाज के हित में कार्य करना भी सच्ची भक्ति का स्वरूप है।
दृष्टिकोण बदलने की आवश्यकता
आचार्य पचौरी ने कहा कि वर्तमान समय में संसार को बदलने की अपेक्षा स्वयं की सोच और दृष्टिकोण को बदलना अधिक आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति स्वयं को स्वामी नहीं बल्कि सेवक मानकर कार्य करेगा और प्रत्येक प्राणी में ईश्वर का स्वरूप देखेगा, तो उसके व्यवहार और आचरण में स्वतः परिवर्तन आ जाएगा।
उन्होंने बताया कि अनन्य भक्ति का अर्थ यही है कि व्यक्ति अपने अहंकार को त्यागकर सेवा और समर्पण के भाव से जीवन जीए।
परिवार में मधुर व्यवहार का महत्व
उन्होंने पारिवारिक जीवन को सुखद बनाने के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश दिया। उनके अनुसार परिवार में संवाद के समय चेहरे पर प्रसन्नता और वाणी में मधुरता होनी चाहिए। कठोर शब्द कई बार रिश्तों में दूरी पैदा कर देते हैं, जबकि विनम्र और कोमल व्यवहार परिवार को जोड़कर रखता है।
उन्होंने कहा कि यदि परिवार के सदस्य एक-दूसरे के प्रति सम्मान और स्नेह का भाव रखें तो अधिकांश समस्याओं का समाधान सहज रूप से हो सकता है।
श्री हनुमान जी के जीवन से लें प्रेरणा
व्याख्यान के दौरान आचार्य पचौरी ने श्री हनुमान जी के जीवन चरित्र का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि श्री हनुमान जी सेवा, समर्पण, कर्तव्यनिष्ठा और विनम्रता के सर्वोच्च उदाहरण हैं।
उन्होंने बताया कि लंका से माता सीता का पता लगाकर लौटने के बाद भी श्री हनुमान जी ने अपनी उपलब्धि का श्रेय स्वयं नहीं लिया। जब भगवान श्रीराम ने उनकी प्रशंसा की, तब उन्होंने अत्यंत विनम्रता के साथ कहा कि जो कुछ भी हुआ, वह प्रभु की कृपा से संभव हुआ।
आचार्य पचौरी ने कहा कि यही भाव प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में होना चाहिए। व्यक्ति को अपने कार्य पूरी निष्ठा से करने चाहिए, लेकिन सफलता का अहंकार नहीं करना चाहिए।
अहंकार से बचने का दिया संदेश
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कई लोग बिना पर्याप्त प्रयास किए भी सफलता और सम्मान की अपेक्षा रखते हैं। जबकि वास्तविक सफलता निरंतर परिश्रम, ईमानदारी और विनम्रता से प्राप्त होती है।
उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति श्रेय लेने की मानसिकता छोड़कर सेवा भावना से कार्य करता है, तभी उसका व्यक्तित्व प्रभावशाली बनता है।
हर व्यक्ति में छिपी होती है अपार क्षमता
आचार्य पचौरी ने श्री हनुमान जी के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे उन्हें अपनी शक्ति का स्मरण कराया गया था, उसी प्रकार प्रत्येक व्यक्ति के भीतर भी असीम संभावनाएं मौजूद होती हैं। आवश्यकता केवल आत्मविश्वास, सही मार्गदर्शन और निरंतर प्रयास की होती है।
उन्होंने कहा कि कई बार लोग अपनी क्षमता को पहचान नहीं पाते और कठिनाइयों से घबराकर प्रयास करना छोड़ देते हैं। जबकि निरंतर प्रयास से बड़े से बड़ा लक्ष्य भी प्राप्त किया जा सकता है।
पवित्र उद्देश्य से ही मिलती है सफलता
व्याख्यान के दौरान उन्होंने कहा कि किसी भी कार्य की सफलता केवल मेहनत पर ही निर्भर नहीं करती, बल्कि उसके पीछे का उद्देश्य भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। यदि व्यक्ति का मन स्वार्थ, ईर्ष्या या नकारात्मक विचारों से प्रभावित होगा तो वह स्थायी सफलता प्राप्त नहीं कर सकेगा।
उन्होंने कहा कि शुद्ध विचार, सकारात्मक सोच और समाज हित की भावना व्यक्ति को जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
आचार्य डॉ. उमाशंकर पचौरी का हुआ सम्मान
कार्यक्रम के समापन पर ओंकारेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से आचार्य डॉ. उमाशंकर पचौरी को श्रीफल, उत्तरीय और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने उनके प्रेरक व्याख्यान की सराहना करते हुए इसे जीवनोपयोगी बताया।
अनेक गणमान्य लोग रहे उपस्थित
इस अवसर पर क्षेत्र के अनेक शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता और श्रद्धालु उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से डॉ. अंगद सिंह, डॉ. नीरजा अग्निहोत्री, डॉ. ओम प्रकाश सिंह, फणीन्द्र दत्त त्रिपाठी, शैल त्रिपाठी, डॉ. ममता तिवारी, डॉ. पूजा अवस्थी, राममिलन सिंह, शिवानी सिंह, राम दिनेश त्रिवेदी और आर.पी. अवस्थी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कार्यक्रम में सहभागिता की।
जवाहर नगर स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में आयोजित श्री हनुमत चरित्र कथा एवं जीवन प्रबंधन व्याख्यान ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक चिंतन के साथ-साथ व्यवहारिक जीवन के महत्वपूर्ण सूत्र भी प्रदान किए। आचार्य डॉ. उमाशंकर पचौरी ने श्री हनुमान जी के आदर्श चरित्र के माध्यम से सेवा, समर्पण, विनम्रता, सकारात्मक सोच और कर्तव्यनिष्ठा का संदेश देते हुए बताया कि यदि व्यक्ति इन मूल्यों को अपने जीवन में अपनाए, तो वह व्यक्तिगत, पारिवारिक और सामाजिक जीवन में संतुलन तथा सफलता दोनों प्राप्त कर सकता है।

