बांदा के पचोखर में हाईटेंशन तार टूटने से 3 मवेशियों की मौत, बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
रिपोर्ट-शेलेन्द्र शानू वर्मा
बांदा: बांदा जिले के अतर्रा क्षेत्र के ग्राम पचोखर में एक हाईटेंशन विद्युत लाइन का तार टूटकर खेत में गिर जाने के बाद तीन मवेशियों की मौत का मामला सामने आया है।
घटना के बाद ग्रामीणों और किसानों ने विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि तार टूटने की सूचना संबंधित अधिकारियों को दिए जाने के बावजूद समय पर आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई, जिससे यह घटना हुई।
ग्रामीणों के अनुसार, खेत में गिरे हाईटेंशन तार में लंबे समय तक विद्युत प्रवाह बना रहा।
इस दौरान दो गौवंश और एक जंगली मवेशी करंट की चपेट में आ गए और उनकी मृत्यु हो गई।
घटना के बाद क्षेत्र में चिंता का माहौल बन गया तथा ग्रामीणों ने विद्युत सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की मांग की।
खेत में गिरा रहा हाईटेंशन तार, ग्रामीणों ने जताई चिंता
स्थानीय लोगों का कहना है कि मुख्य विद्युत लाइन का तार खेत में गिरा हुआ था, जबकि उसी क्षेत्र में किसान नियमित रूप से कृषि कार्य कर रहे थे।
ग्रामीणों का मानना है कि यदि समय रहते लाइन को सुरक्षित किया जाता या बिजली आपूर्ति रोक दी जाती, तो इस प्रकार की घटना को टाला जा सकता था।
इसके अलावा ग्रामीणों ने आशंका व्यक्त की कि यदि उस दौरान कोई व्यक्ति भी करंट की चपेट में आ जाता, तो स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती थी।
इसी कारण ग्रामीणों ने विद्युत सुरक्षा मानकों के प्रभावी पालन की आवश्यकता पर जोर दिया।
सूचना देने के बावजूद कार्रवाई में देरी का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि घटना की जानकारी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को दी गई थी।
हालांकि उनका कहना है कि समय पर मौके पर टीम नहीं पहुंची और न ही तत्काल बिजली आपूर्ति बंद की गई।
हालांकि, इस संबंध में विभाग की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया या विस्तृत स्पष्टीकरण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
इसलिए यह आरोप संबंधित पक्षों के दावों पर आधारित हैं और इनकी पुष्टि सक्षम जांच के बाद ही हो सकेगी।
ग्रामीणों ने लाइन जोड़ने से पहले जिम्मेदारी तय करने की मांग की
घटना के बाद जब बिजली विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे, तब ग्रामीणों और किसानों ने उनसे पहले पूरे मामले की जांच कराने तथा जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की।
ग्रामीणों का कहना था कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
इसी दौरान मृत गौवंश के स्वामी ने भी अपनी क्षति का उल्लेख करते हुए कहा कि समय पर आवश्यक कदम उठाए जाते तो नुकसान को रोका जा सकता था।
गौरक्षा समिति ने भी कार्रवाई की मांग उठाई
घटना के बाद गौरक्षा समिति के जिला अध्यक्ष महेश प्रजापति ने भी मामले का संज्ञान लिया।
उन्होंने बताया कि घटना से संबंधित जानकारी एकत्र की जा रही है तथा संबंधित अधिकारियों से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की जाएगी।
उन्होंने कहा कि विद्युत सुरक्षा से जुड़े मामलों में समयबद्ध कार्रवाई अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि इससे मवेशियों के साथ-साथ मानव जीवन की सुरक्षा भी जुड़ी होती है।
तकनीकी व्यवस्था को लेकर भी उठे सवाल
घटना के बाद स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी सामने आई कि कुछ परिस्थितियों में विद्युत लाइन में फॉल्ट होने की सूचना नियंत्रण केंद्र तक समय पर नहीं पहुंच पाती।
हालांकि इस संबंध में विभाग की ओर से कोई आधिकारिक तकनीकी रिपोर्ट जारी नहीं की गई है।
यदि जांच में ऐसी तकनीकी कमियां सामने आती हैं, तो तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि उन्हें प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की संभावना कम हो सके।
साथ ही यह भी आवश्यक है कि विद्युत लाइनों का नियमित निरीक्षण और रखरखाव निर्धारित समय पर किया जाए।
आला,अधिकारियों तक पहुंची शिकायत
ग्रामीणों और किसानों ने पूरे मामले की शिकायत जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शिकायत नरैनी क्षेत्र की विधायक ओममणि वर्मा, चित्रकूटधाम मंडल के आयुक्त अजीत कुमार तथा विद्युत विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी गई।
इसके बाद विभागीय कर्मचारी और स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंचे। आवश्यक औपचारिकताओं के बाद मृत पशुओं के अंतिम निस्तारण की प्रक्रिया पूरी कराई गई।
सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा तेज
यह घटना सामने आने के बाद क्षेत्र में विद्युत सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में हाईटेंशन लाइनों का नियमित निरीक्षण किया जाना चाहिए ताकि संभावित जोखिमों को समय रहते रोका जा सके।
तकनीकी विशेषज्ञ भी मानते हैं कि विद्युत वितरण प्रणाली में नियमित रखरखाव, समय-समय पर निरीक्षण और शिकायतों के त्वरित निस्तारण से इस प्रकार की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार रोकथाम के लिए आवश्यक कदम
विद्युत सुरक्षा तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए कुछ महत्वपूर्ण उपायों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए—
- हाईटेंशन लाइनों का नियमित तकनीकी निरीक्षण।
- फॉल्ट डिटेक्शन सिस्टम को अधिक प्रभावी बनाना।
- ग्रामीण क्षेत्रों में त्वरित शिकायत निस्तारण व्यवस्था विकसित करना।
- लाइन टूटने की स्थिति में तुरंत बिजली आपूर्ति बंद करने की व्यवस्था सुनिश्चित करना।
- किसानों और ग्रामीणों को विद्युत सुरक्षा के प्रति समय-समय पर जागरूक करना।
यदि इन उपायों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए तो भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की संभावना कम हो सकती है।
जांच के बाद तय होगी जिम्मेदारी
फिलहाल इस मामले में ग्रामीणों ने लापरवाही के आरोप लगाए हैं, जबकि विभागीय स्तर पर जांच और प्रशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ने की बात सामने आई है।
ऐसे में जिम्मेदारी तय होने का प्रश्न जांच रिपोर्ट और संबंधित अधिकारियों के निष्कर्षों पर निर्भर करेगा।
तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी दुर्घटना के बाद पारदर्शी जांच न केवल तथ्य सामने लाने में मदद करती है, बल्कि भविष्य में सुधारात्मक कदम उठाने का भी आधार बनती है।
बांदा जिले के ग्राम पचोखर में हाईटेंशन विद्युत लाइन से जुड़ी यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की आवश्यकता की ओर संकेत करती है।
घटना के बाद ग्रामीणों ने समय पर कार्रवाई नहीं होने के आरोप लगाए हैं, जबकि मामले की शिकायत संबंधित अधिकारियों तक पहुंच चुकी है।
अब स्थानीय लोगों की अपेक्षा है कि जांच निष्पक्ष रूप से पूरी हो, तथ्यों के आधार पर आवश्यक निर्णय लिए जाएं और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।

