फर्रुखाबाद में 40.93 लाख पौधों का महाअभियान रहा सफल, पढ़िए मंत्री असीम अरुण बोले क्या?
रिपोर्ट – हर्ष वर्मा
फर्रुखाबाद: पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार के वृक्षारोपण महाकुंभ-2026 के अंतर्गत रविवार को फर्रुखाबाद जिले में एक ऐतिहासिक अभियान चलाया गया। जिले में एक ही दिन 40 लाख 93 हजार पौधों का रोपण कर हरित उत्तर प्रदेश के संकल्प को नई मजबूती दी गई। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य केवल अधिक से अधिक पौधे लगाना नहीं, बल्कि उनके संरक्षण और संवर्धन के प्रति समाज में जागरूकता पैदा करना भी रहा।
मुख्य कार्यक्रम मोहम्मदाबाद विकासखंड के दरौंदी और पट्टीपुर गांव में आयोजित किया गया। यहां समाज कल्याण एवं अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण विभाग के स्वतंत्र प्रभार मंत्री असीम अरुण ने जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, विद्यार्थियों और स्थानीय नागरिकों के साथ पौधरोपण कर अभियान की शुरुआत की। इस अवसर पर उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी बताया।
विकास और पर्यावरण दोनों साथ-साथ चलें
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री असीम अरुण ने कहा कि किसी भी राज्य या देश का विकास तभी सार्थक माना जाएगा, जब वह पर्यावरण संरक्षण के साथ संतुलित हो। उन्होंने कहा कि यदि आज प्रकृति की रक्षा की जाएगी, तभी आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा, पर्याप्त जल और स्वस्थ वातावरण मिल सकेगा।
उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि पौधरोपण केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं होना चाहिए। इसके बजाय प्रत्येक व्यक्ति को लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल और संरक्षण का संकल्प लेना चाहिए। उनके अनुसार पौधे तभी वृक्ष बनेंगे, जब उनकी समय-समय पर सिंचाई, सुरक्षा और देखरेख सुनिश्चित की जाएगी।
‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान बना जन आंदोलन
मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने इस वर्ष पूरे प्रदेश में 35 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसी क्रम में चलाया जा रहा ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
उन्होंने कहा कि इस अभियान ने समाज के सभी वर्गों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने का कार्य किया है। बड़ी संख्या में विद्यार्थी, स्वयंसेवी संस्थाएं, सामाजिक संगठन, जनप्रतिनिधि और आम नागरिक इसमें सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। यही कारण है कि यह अभियान अब सरकारी कार्यक्रम तक सीमित न रहकर जन आंदोलन का स्वरूप ले चुका है।
पौधरोपण तभी सफल जब पौधे सुरक्षित रहें
जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने अपने संबोधन में कहा कि वृक्षारोपण अभियान की वास्तविक सफलता केवल पौधों की संख्या से नहीं आंकी जा सकती। उन्होंने कहा कि लगाए गए पौधों का जीवित रहना और उनका वृक्ष के रूप में विकसित होना ही इस अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।
उन्होंने सभी विभागों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि पौधों की नियमित निगरानी की जाए। साथ ही ग्राम पंचायतों, स्कूलों और स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित कर पौधों के संरक्षण को प्राथमिकता दी जाए।
लक्ष्य से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी
प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी राजीव कुमार ने अभियान की जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष जनपद में 23 विभागों के माध्यम से 45 लाख 74 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।
उन्होंने बताया कि विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पहले ही 4 लाख 81 हजार पौधों का रोपण किया जा चुका था। इसके बाद रविवार को आयोजित महाअभियान में 40 लाख 93 हजार पौधे लगाए गए, जिसके साथ ही जिले का निर्धारित लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि सभी विभागों को पौधों के संरक्षण की जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि रोपे गए पौधों का अधिकतम जीवित प्रतिशत सुनिश्चित किया जा सके।
विभिन्न विभागों और जनप्रतिनिधियों की रही भागीदारी
इस महाअभियान में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में सांसद मुकेश राजपूत, जिला पंचायत अध्यक्ष मोनिका यादव, भोजपुर विधायक नागेंद्र सिंह राठौर, भाजपा जिलाध्यक्ष फतेहचंद्र वर्मा, पुलिस अधीक्षक आरती सिंह, मुख्य विकास अधिकारी विनोद कुमार गौड़ सहित अनेक अधिकारी उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त एनसीसी कैडेट, स्कूली छात्र-छात्राएं, स्वयंसेवी संगठन और ग्रामीणों ने भी बड़ी संख्या में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी की भूमिका
विशेषज्ञों का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं के माध्यम से संभव नहीं है। इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। जब लोग स्वयं पौधे लगाते हैं और उनकी देखभाल करते हैं, तब हरित क्षेत्र में वास्तविक वृद्धि होती है।
इसी सोच को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने विभिन्न विभागों, शैक्षणिक संस्थानों, स्वयंसेवी संगठनों और ग्रामीण समुदायों को अभियान से जोड़ा है। इससे पौधरोपण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामाजिक जागरूकता भी बढ़ रही है।
जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने का प्रभावी उपाय
बढ़ते तापमान, वायु प्रदूषण और जल संकट जैसी चुनौतियों के बीच वृक्षारोपण को सबसे प्रभावी उपायों में से एक माना जाता है। वृक्ष न केवल वातावरण को स्वच्छ बनाते हैं, बल्कि भूजल संरक्षण, जैव विविधता और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि लगाए गए पौधों का सही तरीके से संरक्षण किया जाए तो आने वाले वर्षों में इसका सकारात्मक प्रभाव जिले के पर्यावरण और स्थानीय जलवायु पर भी देखने को मिलेगा।
फर्रुखाबाद में आयोजित वृक्षारोपण महाकुंभ-2026 पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। एक ही दिन में 40.93 लाख पौधों का रोपण कर जिले ने निर्धारित लक्ष्य को पूरा किया। हालांकि, इस अभियान की वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी, जब लगाए गए पौधों का नियमित संरक्षण किया जाएगा और वे भविष्य में विशाल वृक्ष बनकर पर्यावरण को समृद्ध करेंगे। सरकार, प्रशासन और आम नागरिकों की संयुक्त भागीदारी इस अभियान को दीर्घकालिक सफलता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

