इटावा में कौशल किशोर ठाकुर ने अखिलेश यादव पर साधा निशाना, कृष्ण जन्मभूमि पर आगे आने की दी चुनौती
रिपोर्ट – रोहित सिंह चौहान
इटावा: श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत में बयानबाजी का दौर लगातार जारी है। इसी क्रम में इटावा पहुंचे श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले के पक्षकार और कथावाचक कौशल किशोर ठाकुर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने अखिलेश यादव को ‘तथाकथित कृष्ण वंशज’ बताते हुए श्रीकृष्ण जन्मभूमि की कानूनी लड़ाई में आगे आने की चुनौती दी।
कौशल किशोर ठाकुर ने कहा कि यदि अखिलेश यादव स्वयं को भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ा हुआ मानते हैं, तो उन्हें श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मुद्दे पर भी खुलकर अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि जब मथुरा की श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़ा मामला अदालत में विचाराधीन है, तो इस विषय पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर स्पष्ट रुख क्यों नहीं सामने आता।
‘कृष्ण वंशज’ वाले बयान से अखिलेश यादव पर तंज
कथावाचक कौशल किशोर ठाकुर ने अपने बयान में अखिलेश यादव को ‘तथाकथित कृष्ण वंशज’ कहकर तंज कसा। उन्होंने कहा कि केवल वंश या पारिवारिक पहचान से किसी मुद्दे के प्रति जिम्मेदारी पूरी नहीं होती, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों पर भी अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
उन्होंने दावा किया कि जो लोग भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि के विषय पर खुलकर बोलने से बचते हैं, उनसे इस मामले में सक्रिय भूमिका निभाने की उम्मीद करना उचित नहीं है। हालांकि, ये टिप्पणियां कौशल किशोर ठाकुर का राजनीतिक और धार्मिक मुद्दे पर व्यक्त किया गया मत हैं।
‘भगवान श्रीकृष्ण की जय’ बोलने की भी दी चुनौती
कौशल किशोर ठाकुर ने कहा कि जो नेता सार्वजनिक रूप से भगवान श्रीकृष्ण की जय तक बोलने से बचते हैं, उनसे श्रीकृष्ण जन्मभूमि के पक्ष में मजबूती से आवाज उठाने की उम्मीद कैसे की जा सकती है। उन्होंने अखिलेश यादव से इस मुद्दे पर आगे आने और अपनी स्थिति स्पष्ट करने की अपील की।
दरअसल, श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है। इस मामले में विभिन्न पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे और मांगें सामने आती रही हैं। हाल के दिनों में भी अखिलेश यादव को मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने के लिए सार्वजनिक तौर पर आमंत्रित किया गया है।
‘मूल गर्भगृह हिंदुओं को सौंपा जाए’
कौशल किशोर ठाकुर ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मूल गर्भगृह को हिंदुओं को सौंपने की मांग भी उठाई। उन्होंने कहा कि इस मामले में यदि सर्वे कराया जाता है तो उनके अनुसार वहां प्राचीन धार्मिक संरचनाओं के प्रमाण सामने आ सकते हैं।
उन्होंने दावा किया कि सर्वे होने पर मस्जिद के नीचे शिवालय के अवशेष मिलने की संभावना है। हालांकि, यह कौशल किशोर ठाकुर का दावा है और इसे स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह से संबंधित विवाद न्यायिक प्रक्रिया में है, इसलिए मामले में अंतिम स्थिति अदालत के निर्णय और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगी।
धर्म से दूरी का लगाया आरोप
कौशल किशोर ठाकुर ने अपने बयान में आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक लोग धर्म और धार्मिक मुद्दों से दूरी बनाए रखते हैं और केवल एक वर्ग को खुश करने की राजनीति करते हैं। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े विषयों पर किसी भी नेता को स्पष्ट और संतुलित रुख रखना चाहिए।
उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर यह आरोप भी लगाया कि उनकी पत्नी डिंपल यादव के खिलाफ की गई कथित अमर्यादित टिप्पणी पर उन्होंने अपेक्षित तरीके से प्रतिक्रिया नहीं दी। हालांकि, इस संबंध में भी कौशल किशोर ठाकुर द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस बयान से नहीं होती।
राम मंदिर ट्रस्ट की संरचना पर भी सवाल
कथावाचक ने अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े ट्रस्ट की संरचना को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों से जुड़े ट्रस्ट में समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों को प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। उनके अनुसार किसी एक वर्ग तक सीमित व्यवस्था के बजाय सभी समाजों की सहभागिता से सामाजिक समरसता को बढ़ावा दिया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थाओं की व्यवस्था में व्यापक सामाजिक भागीदारी होने से लोगों के बीच विश्वास मजबूत होगा और सामाजिक दूरी कम करने में मदद मिल सकती है।
गौरतलब है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में वर्ष 2026 में संगठनात्मक स्तर पर भी बदलाव हुए हैं। सितंबर 2026 में स्वामी गोविंददेव गिरि महाराज को ट्रस्ट का पूर्णकालिक महासचिव नियुक्त किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुद्दे पर बढ़ी राजनीतिक हलचल
श्रीकृष्ण जन्मभूमि का मुद्दा हाल के महीनों में राजनीतिक बहस का विषय भी बना हुआ है। जून 2026 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अखिलेश यादव से श्रीकृष्ण जन्मभूमि के विषय में आगे आने की अपील की थी।
इसके बाद अक्टूबर 2026 की शुरुआत में लखनऊ में प्रस्तावित धर्म संसद से पहले अखिलेश यादव के नाम से पोस्टर लगाए जाने की खबरें सामने आईं। इन पोस्टरों के जरिए उन्हें मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण के मुद्दे पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच इटावा में कौशल किशोर ठाकुर का बयान सामने आया है। उन्होंने श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मुद्दे पर अखिलेश यादव से स्पष्ट रुख अपनाने और कानूनी लड़ाई में आगे आने की चुनौती दी है। अब इस बयान पर समाजवादी पार्टी या अखिलेश यादव की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने आती है या नहीं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

