कानपुर में रेलवे की अतिक्रमण कार्रवाई का विरोध, 700 परिवारों पर बेघर होने का संकट; पूर्व विधायक ने रुकवाया अभियान
रिपोर्टर – हनुमंत सिंह पिंटू
कानपुर नगर। कानपुर के गेट नंबर 42 स्थित संजय नगर क्षेत्र में रेलवे प्रशासन की ओर से चलाए गए अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान स्थानीय लोगों का भारी विरोध देखने को मिला। रेलवे की टीम जेसीबी मशीन के साथ मौके पर पहुंची और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू करने का प्रयास किया। कार्रवाई की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी मौके पर एकत्र हो गए और उन्होंने अपने घरों को बचाने की मांग को लेकर विरोध दर्ज कराया।
स्थानीय लोगों के अनुसार, प्रस्तावित कार्रवाई से क्षेत्र में रह रहे करीब 700 परिवार प्रभावित हो सकते हैं। लोगों का कहना है कि लंबे समय से यहां रहने वाले परिवारों के सामने अचानक आवास का संकट खड़ा हो गया है। वहीं, रेलवे प्रशासन की कार्रवाई को लेकर लोगों में चिंता का माहौल बना हुआ है।
जेसीबी पहुंचते ही बढ़ा विरोध
संजय नगर में रेलवे की टीम के पहुंचने के बाद स्थिति तेजी से बदल गई। जेसीबी मशीन के साथ अधिकारियों और कर्मचारियों को देखकर स्थानीय लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। महिलाओं और बच्चों समेत बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए।
स्थानीय निवासियों ने कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि यदि उनके मकान और झुग्गी-झोपड़ियां हटाई जाती हैं तो उनके सामने रहने की गंभीर समस्या उत्पन्न हो जाएगी। लोगों ने प्रशासन से मांग की कि किसी भी प्रकार की कार्रवाई से पहले उन्हें पर्याप्त समय दिया जाए।
विरोध कर रहे लोगों का कहना था कि अचानक कार्रवाई किए जाने से परिवारों को अपने सामान और बच्चों के साथ तत्काल दूसरी जगह जाने में परेशानी होगी। इसके साथ ही उन्होंने प्रभावित परिवारों के लिए वैकल्पिक आवास अथवा पुनर्वास की व्यवस्था किए जाने की मांग भी उठाई।
करीब 700 परिवारों के सामने आवास का सवाल
संजय नगर में प्रस्तावित रेलवे कार्रवाई को लेकर सबसे बड़ा मुद्दा प्रभावित परिवारों के पुनर्वास का है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, कार्रवाई होने की स्थिति में बड़ी संख्या में परिवार प्रभावित होंगे। ऐसे में उनके सामने रहने की वैकल्पिक व्यवस्था का सवाल खड़ा हो जाएगा।
लोगों का कहना है कि यदि रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण है तो प्रशासन को नियमानुसार कार्रवाई करने से पहले प्रभावित परिवारों को पर्याप्त अवसर देना चाहिए। साथ ही उनका आग्रह है कि प्रशासन उनकी स्थिति का आकलन कर वैकल्पिक आवास या पुनर्वास के संबंध में स्पष्ट व्यवस्था करे।
हालांकि, इस संबंध में रेलवे प्रशासन की ओर से कार्रवाई और प्रभावित परिवारों की संख्या को लेकर आधिकारिक विस्तृत जानकारी सामने आना अभी बाकी है। इसलिए स्थानीय लोगों द्वारा बताए गए आंकड़ों को उनके दावे के रूप में देखा जाना चाहिए।
पूर्व विधायक रघुनंदन सिंह भदौरिया पहुंचे मौके पर
विरोध और हंगामे की सूचना मिलने के बाद कानपुर कैंट के पूर्व विधायक रघुनंदन सिंह भदौरिया मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्थानीय निवासियों से बातचीत की और उनकी समस्याओं को सुना। इसके बाद उन्होंने रेलवे अधिकारियों से भी बातचीत की।
पूर्व विधायक ने मौके पर चल रही ध्वस्तीकरण कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए प्रभावित परिवारों के लिए पहले पुनर्वास की व्यवस्था किए जाने की मांग रखी। उनके हस्तक्षेप के बाद मौके पर चल रही कार्रवाई फिलहाल रुक गई।
उन्होंने रेलवे प्रशासन से कहा कि जिन परिवारों पर कार्रवाई का असर पड़ने वाला है, उनके लिए पहले उचित व्यवस्था की जाए। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाए।
एक महीने का समय देने की मांग
पूर्व विधायक की ओर से रेलवे प्रशासन के सामने प्रभावित परिवारों को कम से कम एक महीने का समय देने की मांग रखी गई। उनका कहना है कि यदि लोगों को अपने घर खाली करने पड़ते हैं तो उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए।
स्थानीय निवासियों ने भी इसी तरह की मांग दोहराई। लोगों का कहना है कि अचानक घर खाली करना उनके लिए संभव नहीं है। परिवारों के सामान, बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा की जरूरतों को देखते हुए उन्हें समय मिलना जरूरी है।
इसके अलावा स्थानीय लोगों ने प्रशासन से आग्रह किया कि रेलवे और जिला प्रशासन संयुक्त रूप से प्रभावित परिवारों की स्थिति का आकलन करें और आगे की कार्रवाई से पहले पुनर्वास से संबंधित स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराएं।
फिलहाल रुकी कार्रवाई, आगे के फैसले पर नजर
पूर्व विधायक के हस्तक्षेप और स्थानीय लोगों के विरोध के बाद फिलहाल ध्वस्तीकरण अभियान रुक गया है। इससे प्रभावित परिवारों ने कुछ राहत महसूस की है। हालांकि, भविष्य में रेलवे प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाया जाएगा, इसे लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
अब स्थानीय निवासियों की नजर रेलवे प्रशासन और जिला प्रशासन के अगले निर्णय पर है। वहीं, प्रशासन के सामने रेलवे भूमि से जुड़े अतिक्रमण के नियमन और प्रभावित परिवारों की आवासीय समस्या के बीच संतुलन बनाने की चुनौती भी रहेगी।
यदि आगे कार्रवाई की जाती है तो स्थानीय लोगों की मांग है कि उन्हें पर्याप्त समय, स्पष्ट सूचना और वैकल्पिक व्यवस्था से संबंधित जानकारी पहले उपलब्ध कराई जाए। दूसरी ओर, रेलवे भूमि से संबंधित नियमों के तहत प्रशासन की ओर से आगे क्या कदम उठाया जाता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
फिलहाल संजय नगर में स्थिति नियंत्रण में है और स्थानीय लोग इस उम्मीद में हैं कि रेलवे तथा जिला प्रशासन उनकी आवासीय समस्या को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगा।

