यूपी की नौकरशाही से सियासत तक: IAS-IPS अफसरों का राजनीतिक सफर, दिव्या मित्तल से असीम अरुण तक चर्चा
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में लंबे समय तक प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालने वाले कई IAS और IPS अधिकारी समय के साथ राजनीति के मैदान में भी उतरे हैं। किसी ने सरकारी सेवा से इस्तीफा देकर राजनीतिक दल का दामन थामा, तो किसी ने सेवानिवृत्ति के बाद अपनी राजनीतिक पार्टी बनाई। वहीं, कुछ पूर्व अधिकारियों ने चुनाव भी लड़ा और सक्रिय राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश की।
हाल के दिनों में पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल के राजनीति में प्रवेश की घोषणा के बाद एक बार फिर उत्तर प्रदेश में ब्यूरोक्रेसी से राजनीति की ओर जाने वाले अधिकारियों की चर्चा तेज हो गई है। दिव्या मित्तल ने 13 वर्ष की प्रशासनिक सेवा के बाद इस्तीफा दिया और सितंबर 2026 में अपने राजनीतिक प्रवेश की घोषणा की। उन्होंने कहा कि वह किसी राजनीतिक दल के साथ सीधे जुड़ने के बजाय जनता के मुद्दों को उठाने के उद्देश्य से राजनीतिक यात्रा शुरू कर रही हैं।
देवरिया की डीएम रह चुकी हैं दिव्या मित्तल
दिव्या मित्तल उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की IAS अधिकारी रही हैं। उन्होंने संतकबीरनगर और मिर्जापुर के अलावा देवरिया में जिलाधिकारी के रूप में काम किया। जुलाई 2024 में उन्हें देवरिया का जिलाधिकारी बनाया गया था और मई 2026 तक उन्होंने जिले की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद उन्हें राजस्व विभाग में विशेष सचिव बनाया गया।
प्रशासनिक सेवा के दौरान मिर्जापुर में ग्रामीण क्षेत्रों तक पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंचाने की पहल के कारण भी उनका नाम चर्चा में रहा। इस्तीफा स्वीकार होने के बाद उनकी राजनीतिक पारी को लेकर अटकलों का दौर शुरू हुआ और अंततः उन्होंने सितंबर 2026 में राजनीति में सक्रिय होने की घोषणा कर दी।
पीएल पुनिया का प्रशासन से संसद तक सफर
उत्तर प्रदेश की नौकरशाही से राजनीति में पहुंचे प्रमुख नामों में पीएल पुनिया भी शामिल रहे हैं। पूर्व IAS अधिकारी पुनिया बाद में सक्रिय राजनीति में आए और कांग्रेस से जुड़े। उनका राजनीतिक सफर संसद तक पहुंचा। इस तरह उनका उदाहरण उन अधिकारियों में गिना जाता है, जिन्होंने प्रशासनिक अनुभव के बाद राजनीतिक क्षेत्र में अपनी भूमिका बनाई।
इसी तरह उत्तर प्रदेश में समय-समय पर कई अन्य पूर्व IAS अधिकारियों ने भी राजनीतिक दलों का गठन किया या विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ जुड़कर चुनावी राजनीति में प्रवेश किया है। प्रशासनिक अनुभव के कारण ऐसे अधिकारियों के पास शासन-व्यवस्था, नीतियों और सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली की प्रत्यक्ष जानकारी होती है। हालांकि, राजनीति में उनकी आगे की यात्रा अलग-अलग रही है।
राम बहादुर ने भी बदली राजनीतिक दिशा
पूर्व IAS अधिकारी राम बहादुर भी राजनीति में सक्रिय हुए। वह पहले बहुजन समाज पार्टी से विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं और बाद में जनवरी 2022 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि कुछ पूर्व नौकरशाह राजनीतिक दल बदलने या अलग-अलग राजनीतिक मंचों से अपनी भूमिका तलाशने का रास्ता अपनाते रहे हैं।
विजय शंकर पांडेय ने बनाई राजनीतिक पार्टी
पूर्व IAS अधिकारी विजय शंकर पांडेय ने भी सेवानिवृत्ति के बाद राजनीति में कदम रखा। उन्होंने लोक गठबंधन पार्टी बनाई और वर्ष 2019 में फैजाबाद लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा। इसी क्रम में पूर्व IAS अधिकारी चंद्रपाल ने भी आदर्श समाज पार्टी बनाई। ये उदाहरण बताते हैं कि कुछ अधिकारी पारंपरिक राजनीतिक दलों में शामिल होने के बजाय स्वयं का राजनीतिक मंच तैयार करने का रास्ता चुनते रहे हैं।
अभिषेक सिंह भी राजनीति में सक्रिय
पूर्व IAS अधिकारी अभिषेक सिंह का नाम भी प्रशासनिक सेवा से राजनीति की ओर जाने वाले अधिकारियों में शामिल है। IAS सेवा छोड़ने के बाद वह जौनपुर में सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर सक्रिय रहे हैं। 2026 की रिपोर्टों में उनके रोजगार मेलों और स्थानीय स्तर पर जनसंपर्क गतिविधियों का उल्लेख किया गया है।
IPS अधिकारियों ने भी अपनाई राजनीतिक राह
राजनीति में प्रवेश करने वाले अधिकारियों की सूची केवल IAS तक सीमित नहीं है। पूर्व IPS अधिकारी असीम अरुण ने 2022 में पुलिस सेवा से VRS लेकर भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इसके बाद उन्होंने चुनावी राजनीति में प्रवेश किया।
इसी तरह पूर्व IPS अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने भी पुलिस सेवा के बाद राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई और आजाद अधिकार सेना के जरिए राजनीति में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। दूसरी ओर पूर्व IPS अधिकारी एसआर दारापुरी ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट से जुड़े।
पूर्व DGP सुलखान सिंह ने नवंबर 2023 में बुंदेलखंड लोकतांत्रिक पार्टी का गठन किया। उनकी राजनीति का प्रमुख मुद्दा उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कुछ जिलों को मिलाकर अलग बुंदेलखंड राज्य बनाने की मांग रहा है।
पूर्व IPS अधिकारी ब्रजलाल भी सेवानिवृत्ति के बाद सक्रिय राजनीति में आए। वहीं पूर्व DGP सूर्य कुमार शुक्ला के भी राजनीतिक गतिविधियों से जुड़ने का उल्लेख सार्वजनिक रिपोर्टों में मिलता है।
क्यों आकर्षित करती है राजनीति?
दरअसल, नौकरशाही में वर्षों तक काम करने वाले अधिकारियों को शासन, प्रशासन, कानून-व्यवस्था और सरकारी योजनाओं की गहरी समझ होती है। ऐसे में कुछ अधिकारी सेवानिवृत्ति या सेवा छोड़ने के बाद सार्वजनिक जीवन में अपनी भूमिका को आगे बढ़ाने के लिए राजनीति का रास्ता चुनते हैं।
हालांकि, प्रशासनिक सेवा और चुनावी राजनीति दोनों की प्रकृति अलग है। प्रशासन में अधिकारी संवैधानिक और सरकारी जिम्मेदारियों के तहत काम करते हैं, जबकि राजनीति में जनता के बीच जाकर संगठन, जनसमर्थन और चुनावी प्रक्रिया का सामना करना पड़ता है।
इसलिए उत्तर प्रदेश में IAS और IPS अधिकारियों का राजनीति में प्रवेश कोई नया घटनाक्रम नहीं है। दिव्या मित्तल की 2026 में राजनीतिक सक्रियता की घोषणा ने इस पुराने सिलसिले को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आने वाले समय में उनकी राजनीतिक भूमिका किस रूप में विकसित होती है, यह उनके आगामी फैसलों और सार्वजनिक गतिविधियों से स्पष्ट होगा।

