लखीमपुर में शिक्षिका निशात फातिमा हत्याकांड का CCTV फुटेज वायरल, SOG चालक निलंबित

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रिपोर्ट: शरद अवस्थी

लखीमपुर। चिल्ड्रन एकेडमी की शिक्षिका निशात फातिमा की हत्या से जुड़े सीसीटीवी फुटेज के सोशल मीडिया पर वायरल होने के मामले में पुलिस ने कार्रवाई की है। जांच के दौरान सामने आया कि हत्याकांड की जांच के लिए पुलिस के कब्जे में लिए गए सीसीटीवी फुटेज को बिना अनुमति साझा किया गया था। मामले में एसएसपी डॉ. ख्याति गर्ग ने एसओजी के चालक संजय कुमार को निलंबित कर दिया है।

पुलिस की जांच के अनुसार, एसओजी चालक संजय कुमार ने हत्याकांड से संबंधित सीसीटीवी फुटेज अपने एक परिचित युवक तक पहुंचाया था। इसके बाद यह फुटेज सोशल मीडिया के माध्यम से सामने आया और तेजी से प्रसारित होने लगा। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए फुटेज के प्रसार की जांच शुरू की। जांच में चालक की भूमिका सामने आने के बाद उसके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई।

स्कूल से लिया गया था CCTV DVR

जानकारी के मुताबिक, चिल्ड्रन एकेडमी की शिक्षिका निशात फातिमा की गोली मारकर हत्या की गई थी। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू करते हुए स्कूल में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग को महत्वपूर्ण साक्ष्य के तौर पर सुरक्षित किया था। इसके लिए पुलिस ने सीसीटीवी का डीवीआर अपने कब्जे में लिया था, ताकि घटना से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जा सके।

जांच के दौरान सीसीटीवी रिकॉर्डिंग में मौजूद घटनाक्रम से जुड़े कुछ हिस्से सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। फुटेज सामने आने के बाद पुलिस अधिकारियों ने यह पता लगाने का प्रयास किया कि जांच से संबंधित संवेदनशील सामग्री आखिर किस माध्यम से बाहरी लोगों तक पहुंची।

जांच में सामने आई SOG चालक की भूमिका

पुलिस के अनुसार, फुटेज वायरल होने के मामले की पड़ताल में एसओजी के चालक संजय कुमार की भूमिका सामने आई। आरोप है कि उसने जांच से संबंधित वीडियो अपने एक परिचित युवक को उपलब्ध कराया था। इसके बाद यह सामग्री आगे साझा की गई और सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।

हालांकि, पुलिस की कार्रवाई का आधार जांच में सामने आया फुटेज साझा करने का तथ्य है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि किसी भी आपराधिक मामले की जांच से जुड़ी सामग्री को सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना बाहरी व्यक्ति के साथ साझा करना विभागीय अनुशासन के विपरीत है।

संवेदनशील जांच सामग्री साझा करने पर कार्रवाई

एसएसपी डॉ. ख्याति गर्ग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संजय कुमार को निलंबित किया है। पुलिस विभाग की ओर से यह कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि जांच के दौरान जुटाए गए डिजिटल साक्ष्य को सुरक्षित रखना पुलिस की जिम्मेदारी होती है।

दरअसल, सीसीटीवी फुटेज किसी भी आपराधिक मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकता है। ऐसे में जांच पूरी होने से पहले इससे संबंधित वीडियो या अन्य सामग्री का अनधिकृत रूप से प्रसारित होना जांच की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। यही वजह है कि पुलिस विभाग ने फुटेज के अनधिकृत प्रसार को अनुशासनहीनता माना है।

आगे फुटेज फैलाने वालों की भी होगी जांच

पुलिस अब इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि एसओजी चालक से फुटेज प्राप्त करने के बाद उसे किन-किन लोगों तक पहुंचाया गया और सोशल मीडिया पर इसे किस तरह प्रसारित किया गया। जांच का उद्देश्य फुटेज के प्रसार की पूरी कड़ी का पता लगाना है।

पुलिस यह भी जांच कर सकती है कि वायरल वीडियो को सबसे पहले किस व्यक्ति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया। इसके अलावा, फुटेज को आगे प्रसारित करने वाले अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।

घटना की जांच में डिजिटल साक्ष्यों की अहम भूमिका

निशात फातिमा हत्याकांड की जांच में सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सहित अन्य डिजिटल साक्ष्यों की भूमिका महत्वपूर्ण है। ऐसे मामलों में पुलिस घटनास्थल से प्राप्त इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को सुरक्षित रखते हुए उसकी जांच करती है। इसलिए जांच से जुड़े वीडियो का अनधिकृत प्रसार पुलिस के लिए गंभीर विषय बन जाता है।

पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई से यह भी स्पष्ट है कि जांच से संबंधित सामग्री को निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही संभालने के निर्देश हैं। किसी कर्मचारी या अधिकारी द्वारा ऐसी सामग्री को निजी स्तर पर किसी बाहरी व्यक्ति तक पहुंचाना विभागीय कार्रवाई का आधार बन सकता है।

फिलहाल एसओजी चालक संजय कुमार के निलंबन के बाद पुलिस की जांच आगे बढ़ रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि वायरल सीसीटीवी फुटेज किन माध्यमों से आगे प्रसारित हुआ। साथ ही, मामले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

पुलिस का कहना है कि हत्याकांड की जांच से संबंधित संवेदनशील सामग्री को बिना अनुमति साझा करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। ऐसे में सोशल मीडिया पर वायरल हुए फुटेज के स्रोत और उसके प्रसार की पूरी कड़ी सामने आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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