कानपुर देहात के जुनैद पहलवान का सियासी सफर, बसपा से सपा तक पहुंची सियासत

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रिपोर्ट – विशाल मिश्रा

कानपुर देहात। भोगनीपुर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में अमरौधा निवासी जुनैद खान, जिन्हें स्थानीय स्तर पर जुनैद पहलवान के नाम से जाना जाता है, एक बार फिर चर्चा में हैं। करीब दो दशक से सक्रिय राजनीति में मौजूद जुनैद खान ने स्थानीय जनसंपर्क और चुनावी राजनीति के कई पड़ाव पार किए हैं। सितंबर 2026 में बहुजन समाज पार्टी से निष्कासन के बाद उन्होंने समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। इसके बाद भोगनीपुर की राजनीति में उनकी आगे की भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

जुनैद खान का राजनीतिक सफर वर्ष 2003 से शुरू हुआ। शुरुआती दौर में उन्होंने स्थानीय स्तर पर जनसंपर्क और सामाजिक गतिविधियों के जरिए अपनी पहचान बनाने की कोशिश की। इसके बाद वर्ष 2006 में उनकी मां इदरीसा बेगम अमरौधा टाउन एरिया की चेयरमैन चुनी गईं। स्थानीय निकाय की राजनीति में परिवार की सक्रियता बढ़ने के साथ ही जुनैद खान की राजनीतिक गतिविधियां भी क्षेत्र में दिखाई देने लगीं।

2012 में बसपा से टिकट की घोषणा

जुनैद पहलवान के राजनीतिक सफर में वर्ष 2012 को महत्वपूर्ण माना जाता है। उनके मुताबिक, उस समय बहुजन समाज पार्टी ने उन्हें विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्याशी बनाए जाने की घोषणा की थी। हालांकि, एक मुकदमे के चलते वह उस चुनाव में मैदान में नहीं उतर सके। जुनैद खान का कहना है कि बाद में इस मुकदमे में उन्हें दोषमुक्त कर दिया गया।

इस घटनाक्रम के कारण विधानसभा चुनाव लड़ने की उनकी योजना आगे नहीं बढ़ सकी। हालांकि, इसके बावजूद उन्होंने क्षेत्र में अपनी राजनीतिक सक्रियता जारी रखी और जनसंपर्क के जरिए लोगों के बीच अपनी मौजूदगी बनाए रखी।

जनसेवा के कामों से भी बनी पहचान

राजनीतिक गतिविधियों के साथ ही जुनैद खान की पहचान क्षेत्र में जनसेवा से जुड़े कार्यों को लेकर भी रही है। बताया जाता है कि जिस समय अमरौधा और आसपास के क्षेत्र में 108 एंबुलेंस सेवा उपलब्ध नहीं थी, उस दौरान उन्होंने करीब छह वर्षों तक निजी स्तर पर जरूरतमंद लोगों को एंबुलेंस सुविधा उपलब्ध कराने में भूमिका निभाई।

सड़क हादसों में घायल लोगों और गंभीर रूप से बीमार मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में इस सेवा का इस्तेमाल किया जाता था। इसके अलावा जरूरतमंद परिवारों की सहायता और स्थानीय स्तर पर लोगों से संपर्क ने भी उनकी सामाजिक पहचान को मजबूत किया। हालांकि, इन सेवाओं से संबंधित विस्तृत स्वतंत्र सार्वजनिक रिकॉर्ड सीमित हैं।

अधिवक्ता भी हैं जुनैद खान

वर्ष 2013 में जुनैद खान ने एलएलबी की पढ़ाई पूरी की और इसके बाद अधिवक्ता के रूप में भी काम शुरू किया। कानून की पढ़ाई और वकालत के साथ उनकी राजनीतिक सक्रियता भी जारी रही। धीरे-धीरे उनकी गतिविधियां स्थानीय स्तर से बढ़कर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति तक पहुंचीं।

वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने भोगनीपुर सीट से पीस पार्टी के प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा। चुनाव परिणाम में उन्हें 18,380 वोट मिले और वह चौथे स्थान पर रहे। हालांकि, इस चुनाव में जीत हासिल नहीं कर सके, लेकिन विधानसभा क्षेत्र में उनकी चुनावी मौजूदगी दर्ज हुई।

2022 में बसपा के टिकट पर मिला बड़ा जनसमर्थन

इसके बाद जुनैद खान बहुजन समाज पार्टी से जुड़े और वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें भोगनीपुर विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया। इस चुनाव में उन्हें 47,332 वोट मिले और वह तीसरे स्थान पर रहे।

इस चुनाव में भाजपा के राकेश सचान विजयी हुए, जबकि समाजवादी पार्टी के नरेंद्र पाल सिंह दूसरे स्थान पर रहे। वहीं जुनैद खान को मिले 47 हजार से अधिक वोटों ने उन्हें भोगनीपुर की चुनावी राजनीति में एक प्रमुख स्थानीय चेहरा बनाया।

परिवार की भी रही राजनीतिक भूमिका

जुनैद पहलवान की राजनीतिक पहचान में परिवार की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। अमरौधा क्षेत्र में उनके परिवार की कृषि और आवासीय संपत्ति होने की बात सामने आती रही है। उनकी मां इदरीसा बेगम का स्थानीय निकाय की राजनीति में सक्रिय रहना भी परिवार की क्षेत्रीय राजनीतिक पहचान से जुड़ा रहा है।

हालांकि, जुनैद खान को ‘पहलवान’ नाम से संबोधित किए जाने की शुरुआत कब और किस वजह से हुई, इस बारे में स्पष्ट सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसी तरह कुश्ती के क्षेत्र में उनकी उपलब्धियों को लेकर भी पुख्ता सार्वजनिक रिकॉर्ड सीमित हैं।

बसपा से निष्कासन के बाद सपा में एंट्री

अब जुनैद पहलवान के राजनीतिक सफर का नया अध्याय समाजवादी पार्टी के साथ शुरू हुआ है। सितंबर 2026 में बहुजन समाज पार्टी ने जुनैद खान को पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता के आरोपों के चलते निष्कासित कर दिया। बसपा की ओर से कहा गया कि उन्हें पहले भी चेतावनी दी गई थी।

इसके बाद जुनैद खान ने अपने समर्थकों के साथ समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। सपा में शामिल होने के बाद उनकी समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात भी चर्चा में रही। इसके साथ ही भोगनीपुर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में उनकी नई भूमिका को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है।

आगे की राजनीति पर निगाह

जुनैद पहलवान का राजनीतिक सफर वर्ष 2003 से शुरू होकर स्थानीय राजनीति, सामाजिक गतिविधियों, विधानसभा चुनावों और अलग-अलग राजनीतिक दलों से होते हुए अब समाजवादी पार्टी तक पहुंचा है। वर्ष 2017 में पीस पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने के बाद वर्ष 2022 में बसपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरना उनके राजनीतिक सफर के महत्वपूर्ण पड़ाव रहे।

अब सपा में शामिल होने के बाद भोगनीपुर विधानसभा क्षेत्र में उनकी राजनीतिक सक्रियता किस रूप में सामने आती है, यह आने वाला समय बताएगा। साथ ही यह भी देखना महत्वपूर्ण होगा कि संगठन में उन्हें किस प्रकार की भूमिका मिलती है और वह क्षेत्र में अपने पुराने जनसंपर्क को किस तरह आगे बढ़ाते हैं।

अमरौधा से शुरू हुआ जुनैद पहलवान का करीब दो दशक लंबा राजनीतिक सफर अब एक नए राजनीतिक मंच पर पहुंच चुका है। भोगनीपुर की राजनीति में उनकी आगे की भूमिका, संगठनात्मक सक्रियता और क्षेत्रीय स्तर पर उनकी राजनीतिक रणनीति आने वाले समय में इस नए अध्याय की दिशा तय करेगी।

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