कानपुर से सीएम योगी से मिलने पैदल लखनऊ निकले धीरज चड्ढा, पढ़िए आखिर क्या कारण है ऐसा?
रिपोर्ट – हनुमंत सिंह
कानपुर: स्थानीय पुलिस और प्रशासन से न्याय न मिलने का आरोप लगाते हुए धीरज चड्ढा गुरुवार को कानपुर से लखनऊ के लिए पैदल रवाना हुए। उन्होंने कहा कि वह अपनी शिकायत सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने रखना चाहते हैं। स्वरूप नगर निवासी धीरज चड्ढा हाथों में मुख्यमंत्री का पोस्टर लेकर अपने घर से निकले और जाजमऊ गंगा पुल पहुंचने के बाद पैदल लखनऊ की ओर रवाना हुए।
धीरज चड्ढा का कहना है कि कथित धोखाधड़ी और वसूली से जुड़े एक मामले को लेकर उन्होंने कानपुर पुलिस कमिश्नर समेत वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की थी। उनके मुताबिक, शिकायत के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसी के चलते उन्होंने मुख्यमंत्री से मिलने और अपनी शिकायत उनके सामने रखने का निर्णय लिया।
हालांकि, धीरज चड्ढा की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस या जिन लोगों पर आरोप लगाए गए हैं, उनकी ओर से इस संबंध में विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
जाजमऊ से शुरू की लखनऊ की पैदल यात्रा
जानकारी के मुताबिक, धीरज चड्ढा गुरुवार सुबह अपने घर से निकले और जाजमऊ गंगा पुल पहुंचे। इसके बाद उन्होंने लखनऊ तक पैदल जाने की बात कही। उनके हाथ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पोस्टर था।
धीरज चड्ढा का कहना है कि उनका उद्देश्य अपनी शिकायत को मुख्यमंत्री तक पहुंचाना है। उनका दावा है कि स्थानीय स्तर पर अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखने के बाद भी मामले में उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिली। इसलिए अब वह सीधे प्रदेश सरकार के मुखिया के सामने अपना पक्ष रखना चाहते हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से मुख्यमंत्री की जनसुनवाई और जनता दर्शन के माध्यम से लोगों की शिकायतें सुने जाने की व्यवस्था है। मुख्यमंत्री के सरकारी आवास पर 28 सितंबर 2026 को आयोजित जनता दर्शन में भी मुख्यमंत्री ने लोगों की समस्याएं सुनी थीं और अधिकारियों को उनके शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए थे।
धोखाधड़ी और वसूली से जुड़े मामले का आरोप
धीरज चड्ढा ने आरोप लगाया है कि उनके साथ कथित तौर पर धोखाधड़ी और वसूली का मामला हुआ है। उनका कहना है कि इस संबंध में उन्होंने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत दी थी।
हालिया रिपोर्टों में भी धीरज चड्ढा की ओर से मुकदमों और लेन-देन से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग किए जाने का उल्लेख है। एक प्रेस वार्ता में उन्होंने कई लोगों के नाम लेते हुए जांच की मांग की थी।
हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों को फिलहाल आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। संबंधित व्यक्तियों की ओर से उनका पक्ष सामने आने और जांच के निष्कर्ष के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पूरे मामले में वास्तविक स्थिति क्या है।
कई लोगों पर लगाए आरोप
धीरज चड्ढा ने अपने बयान में कुछ अधिवक्ताओं, स्थानीय जनप्रतिनिधि और अन्य लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने अमित कुमार गुप्ता, आशीष शुक्ला उर्फ बिल्लू एडवोकेट, विनोद गुप्ता उर्फ बिन्नू, परमट क्षेत्र के पार्षद जितेंद्र वाजपेई उर्फ जीतू और नवनीत मिश्रा के नाम लिए हैं।
धीरज चड्ढा का आरोप है कि इन लोगों की भूमिका उनके विवाद से जुड़े मामले में रही है और उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस मामले में संबंधित लोगों का पक्ष और पुलिस जांच महत्वपूर्ण होगी।
मठ मंदिर रक्षा समिति के पद को लेकर भी विवाद
इस पूरे मामले के बीच धीरज चड्ढा के मठ मंदिर रक्षा समिति से जुड़े पद को लेकर भी विवाद सामने आया है। 28 सितंबर की प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, समिति के जिलाध्यक्ष उमेश तिवारी ने धीरज चड्ढा को महामंत्री पद से हटाए जाने की बात कही थी। जिलाध्यक्ष की ओर से संगठन के कार्यों में अपेक्षित सहयोग नहीं करने और कुछ व्यक्तिगत मामलों में संगठन के नाम एवं पद के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया था।
वहीं, धीरज चड्ढा ने इस कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि उन्हें पद से हटाए जाने संबंधी कोई पत्र नहीं मिला है। उन्होंने संगठन के प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों का हवाला देते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट की थी। ऐसे में समिति में उनके पद को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं।
मुख्यमंत्री से मुलाकात की मांग
लखनऊ की ओर पैदल रवाना हुए धीरज चड्ढा का कहना है कि वह मुख्यमंत्री के सामने अपनी शिकायत और अब तक की पूरी स्थिति रखना चाहते हैं। उनका कहना है कि उन्हें निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की उम्मीद है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनकी शिकायत पर सुनवाई नहीं हुई तो वह आगे का कदम उठाएंगे। उनके बयान में स्वयं को नुकसान पहुंचाने से जुड़ी चेतावनी भी सामने आई है। ऐसी स्थिति में संबंधित प्रशासन और पुलिस के लिए उनकी सुरक्षा तथा स्थिति को शांतिपूर्ण तरीके से संभालना महत्वपूर्ण है।
पुलिस जांच से स्पष्ट होगी स्थिति
फिलहाल पूरे मामले में कई आरोप और दावे सामने आए हैं, लेकिन उनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए किसी भी पक्ष को दोषी मानने से पहले पुलिस जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।
धीरज चड्ढा की शिकायत में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उनका पक्ष और पुलिस की कार्रवाई इस मामले में आगे की दिशा तय कर सकती है। वहीं, मठ मंदिर रक्षा समिति के भीतर उनके पद को लेकर चल रहे विवाद का समाधान संगठन के अधिकृत पदाधिकारियों के निर्णय और संबंधित दस्तावेजों से हो सकता है।
कुल मिलाकर, कानपुर से लखनऊ तक धीरज चड्ढा की पैदल यात्रा ने उनके पुलिस शिकायत से जुड़े मामले को फिर चर्चा में ला दिया है। अब देखना होगा कि उनकी शिकायत पर पुलिस-प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई होती है और मुख्यमंत्री कार्यालय तक उनकी शिकायत किस रूप में पहुंचती है।

