अंबेडकरनगर में फूड प्वाइजनिंग से 21 महिला वर्कर और प्रशिक्षु बीमार, 17 मेडिकल कॉलेज में भर्ती
रिपोर्ट-अनन्त कुशवाहा
अंबेडकरनगर। जिले में पार्थ ट्रेड धागा मिल में काम करने वाली महिला वर्करों और कौशल विकास के तहत प्रशिक्षण ले रही युवतियों की तबीयत बिगड़ने से हड़कंप मच गया। मिल में खाना खाने के बाद 21 महिलाओं और युवतियों के फूड प्वाइजनिंग की चपेट में आने की सूचना है। इनमें से 17 लोगों को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है। वहीं, चार लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद इमरजेंसी से छुट्टी दे दी गई।
जानकारी के मुताबिक, बीमार हुईं अधिकांश युवतियों की उम्र 18 से 24 वर्ष के बीच है। बताया गया है कि इनमें छह युवतियां कौशल विकास मिशन के तहत प्रशिक्षण ले रही थीं, जबकि अन्य महिला वर्कर के तौर पर धागा मिल में काम कर रही थीं। घटना के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। साथ ही खाद्य विभाग की टीम ने मिल में संचालित कैंटीन से भोजन के नमूने लिए हैं।
रात में बिगड़ी तबीयत, सुबह मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया
बताया जा रहा है कि मंगलवार तड़के करीब तीन बजे कुछ महिला वर्करों और प्रशिक्षु युवतियों ने पेट में दर्द और उल्टी की शिकायत की। इसके बाद मिल प्रशासन की ओर से उन्हें दवाएं दी गईं। हालांकि, कुछ समय बाद तबीयत अधिक बिगड़ने पर उन्हें मेडिकल कॉलेज ले जाया गया।
मिली जानकारी के अनुसार, करीब सुबह 10 बजे बीमार महिलाओं और युवतियों को मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया। एक साथ कई लोगों के पहुंचने से अस्पताल में भी स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता बढ़ गई। फूड प्वाइजनिंग की सूचना मिलते ही मेडिकल कॉलेज के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक बृजेश कुमार चिकित्सकों की टीम के साथ उपचार में जुट गए।
इसके बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी प्रमोद कुमार और टांडा के उपजिलाधिकारी संजीव कुमार भी मेडिकल कॉलेज पहुंचे। अधिकारियों ने मरीजों से बातचीत कर उनकी स्थिति की जानकारी ली और चिकित्सकों से इलाज के संबंध में जानकारी प्राप्त की।
कैंटीन में खाना खाने के बाद बिगड़ी तबीयत
प्राथमिक जानकारी के अनुसार, बीमार हुई महिला वर्करों और प्रशिक्षु युवतियों ने धागा मिल परिसर में संचालित कैंटीन में भोजन किया था। इसके बाद कुछ लोगों की तबीयत खराब होने लगी। हालांकि, भोजन के कारण ही बीमारी हुई है या किसी अन्य वजह से स्वास्थ्य प्रभावित हुआ, इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
घटना की जानकारी मिलने के बाद खाद्य विभाग के अधिकारियों ने धागा मिल का निरीक्षण किया। इस दौरान कैंटीन में तैयार किए गए भोजन के नमूने लिए गए। इसके अलावा टांडा एसडीएम संजीव कुमार ने मिल परिसर में उपलब्ध पीने के पानी की भी जांच कराने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन की ओर से भोजन और पानी दोनों की गुणवत्ता की जांच कराई जा रही है।
17 मरीजों का मेडिकल कॉलेज में उपचार जारी
मुख्य चिकित्सा अधिकारी प्रमोद कुमार के अनुसार, रात में कुछ लोगों की तबीयत खराब हुई थी और इसके बाद उन्हें सुबह मेडिकल कॉलेज लाया गया। इनमें कौशल विकास मिशन के तहत प्रशिक्षण लेने वाली कुछ युवतियां भी शामिल हैं।
सीएमओ ने बताया कि वर्तमान में सभी मरीजों की स्थिति स्थिर है। चार लोगों को इमरजेंसी से ही उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि 17 लोगों का मेडिकल कॉलेज में इलाज जारी है। चिकित्सकों की टीम लगातार मरीजों की निगरानी कर रही है।
बीमार हुई महिलाओं और युवतियों में सुमित्रा, चंद्रकला, पूर्णिमा, सोनालिका, लालती, आरती, गुड़िया, शिवांगी, संजना, कुमकुम, दीपिका, शिल्पा, अमृता, कोमल और मंगेश के नाम बताए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इनमें कई की उम्र 18 से 24 वर्ष के बीच है।
परिजनों की मौजूदगी को लेकर भी सामने आई जानकारी
घटना के करीब 12 घंटे बाद तक कई पीड़ितों के परिजन मेडिकल कॉलेज नहीं पहुंच पाए थे। मौके पर तत्काल कोई परिजन मौजूद नहीं मिला। ऐसे में अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम ही मरीजों के उपचार और निगरानी में जुटी रही।
वहीं, घटना के बाद प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। खाद्य विभाग द्वारा लिए गए भोजन के नमूनों की जांच के साथ ही मिल में इस्तेमाल होने वाले पानी की गुणवत्ता की भी जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही फूड प्वाइजनिंग के वास्तविक कारणों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
प्रशासन ने शुरू की जांच
एक साथ 21 लोगों के बीमार होने की सूचना के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया। अधिकारियों ने पहले धागा मिल का निरीक्षण किया और इसके बाद मेडिकल कॉलेज पहुंचकर मरीजों का हाल जाना। प्रशासन की ओर से कैंटीन के भोजन और पानी की गुणवत्ता से जुड़े पहलुओं की जांच कराई जा रही है।
फिलहाल मेडिकल कॉलेज में भर्ती 17 मरीजों की हालत स्थिर बताई गई है। चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार जारी है। वहीं, चार लोगों को उपचार के बाद छुट्टी मिलने से स्वास्थ्य विभाग ने राहत की सांस ली है। अब जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि आखिर किन परिस्थितियों में एक साथ इतनी महिला वर्करों और प्रशिक्षु युवतियों की तबीयत खराब हुई।

