कानपुर में मठ मंदिर रक्षा समिति विवाद, धीरज चड्ढा ने निष्कासन के दावे को बताया निराधार
रिपोर्टर – हनुमंत सिंह पिंटू
कानपुर नगर। मठ मंदिर रक्षा समिति से जुड़े विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। समिति के कानपुर महामंत्री पद को लेकर धीरज चड्ढा ने मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा है। उन्होंने जिलाध्यक्ष उमेश तिवारी की ओर से जारी किए गए वीडियो और उनके निष्कासन संबंधी दावे को निराधार बताया है। धीरज चड्ढा का कहना है कि उन्हें समिति में कानपुर महामंत्री की जिम्मेदारी प्रदेश अध्यक्ष अजय द्विवेदी और प्रदेश उपाध्यक्ष सुधीर द्विवेदी की ओर से दी गई थी।
धीरज चड्ढा ने अपने बयान में कहा कि उन्हें पद से हटाए जाने को लेकर प्रदेश स्तर से उन्हें कोई आधिकारिक आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। उनका दावा है कि जब तक प्रदेश पदाधिकारियों की ओर से उन्हें पद से हटाने का कोई औपचारिक आदेश जारी नहीं किया जाता, तब तक वह स्वयं को समिति के कानपुर महामंत्री पद पर ही मानते हैं।
निष्कासन के दावे पर धीरज चड्ढा का जवाब
धीरज चड्ढा के मुताबिक, जिलाध्यक्ष उमेश तिवारी द्वारा सोशल मीडिया या अन्य माध्यम से जारी किए गए वीडियो में उनके निष्कासन की बात कही गई है, लेकिन इस संबंध में प्रदेश अध्यक्ष या प्रदेश उपाध्यक्ष की ओर से कोई लिखित अथवा आधिकारिक निर्देश उन्हें नहीं मिला है। इसी आधार पर उन्होंने जिलाध्यक्ष के दावे पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि समिति में किसी पदाधिकारी को हटाने के लिए संगठन की निर्धारित प्रक्रिया और सक्षम पदाधिकारी का आदेश महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में प्रदेश स्तर से आदेश जारी नहीं होने की स्थिति में उनके मुताबिक उनका पद बरकरार है।
हालांकि, इस पूरे मामले में समिति के अन्य पदाधिकारियों का पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण है। फिलहाल उपलब्ध बयान में धीरज चड्ढा ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि वह अपने पद पर बने हुए हैं।
पीड़ितों और मंदिर से जुड़े मामलों को लेकर भी उठाए सवाल
धीरज चड्ढा ने कानपुर में पीड़ित लोगों की मदद और मंदिरों से जुड़े मामलों को लेकर भी जिलाध्यक्ष उमेश तिवारी पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि जब भी शहर में किसी पीड़ित की सहायता या मंदिर से संबंधित किसी मामले में सक्रिय भूमिका निभाने की जरूरत पड़ी, तब जिलाध्यक्ष की ओर से अपेक्षित स्तर पर पहल नहीं की गई।
धीरज चड्ढा ने दावा किया कि वह ऐसे मामलों में लगातार अपनी भूमिका निभाते रहे हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस समाचार में नहीं की जा रही है। संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद पूरे मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
कई लोगों पर साजिश का आरोप
धीरज चड्ढा ने अपने बयान में अधिवक्ता अमित कुमार गुप्ता, आशीष शुक्ला उर्फ बिल्लू एडवोकेट, विनोद गुप्ता उर्फ बिन्नू, परमट के पार्षद जितेंद्र वाजपेयी उर्फ जीतू और नवनीत मिश्रा के नाम लेते हुए उनके खिलाफ साजिश का आरोप लगाया है।
उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ चल रहे विवाद के पीछे इन्हीं लोगों की भूमिका है। हालांकि, यह आरोप धीरज चड्ढा द्वारा लगाए गए हैं और समाचार में संबंधित लोगों का पक्ष उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। संबंधित व्यक्तियों की प्रतिक्रिया मिलने पर उसे भी समाचार में शामिल किया जा सकता है।
कार्रवाई की मांग, आगे की रणनीति बताई
धीरज चड्ढा ने पुलिस प्रशासन से भी पूरे मामले में कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि उनके द्वारा लगाए गए आरोपों के संबंध में पुलिस कार्रवाई नहीं करती है, तो वह अपनी मांगों को लेकर आगे की रणनीति अपनाएंगे।
उन्होंने अपने बयान में कहा कि वह 1 अक्टूबर को नंगे पैर पैदल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने जाने की बात कह रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने 6 सितंबर को आत्मदाह करने के लिए मजबूर होने जैसी बात भी कही है। हालांकि, आत्मदाह संबंधी किसी भी कथन को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और संबंधित प्रशासन को मामले में आवश्यक सुरक्षा एवं संवाद के कदम उठाने चाहिए।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि आत्मदाह जैसी बात किसी भी विवाद के समाधान का उचित तरीका नहीं है। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति को प्रशासन और पुलिस के समक्ष अपनी शिकायत रखने तथा कानूनी प्रक्रिया अपनाने पर जोर देना चाहिए।
संगठनात्मक विवाद के बीच सामने आया बयान
मठ मंदिर रक्षा समिति से जुड़े इस विवाद में फिलहाल मुख्य मुद्दा कानपुर महामंत्री पद को लेकर सामने आया है। एक ओर जिलाध्यक्ष स्तर से धीरज चड्ढा को पद से हटाए जाने का दावा सामने आया है, जबकि दूसरी ओर धीरज चड्ढा का कहना है कि उन्हें प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश उपाध्यक्ष की ओर से पद से हटाने का कोई आदेश नहीं दिया गया है।
इस कारण अब विवाद का समाधान संगठन के प्रदेश पदाधिकारियों की आधिकारिक स्थिति से स्पष्ट होने की संभावना है। यदि प्रदेश नेतृत्व इस मामले में लिखित आदेश या आधिकारिक बयान जारी करता है, तो उससे यह तय करने में मदद मिलेगी कि संगठनात्मक स्तर पर कानपुर महामंत्री पद को लेकर वास्तविक स्थिति क्या है।
फिलहाल धीरज चड्ढा ने मीडिया के सामने आकर अपना पक्ष रख दिया है। उन्होंने अपने ऊपर लगाए जा रहे निष्कासन संबंधी दावों को खारिज किया है और कहा है कि वह अपने पद पर बने हुए हैं। साथ ही उन्होंने पुलिस से कार्रवाई की मांग करते हुए आगे आंदोलनात्मक कदम उठाने की बात कही है।
मामले में अब समिति के प्रदेश पदाधिकारियों, जिलाध्यक्ष और जिन लोगों पर आरोप लगाए गए हैं, उनकी प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। सभी पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही विवाद की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

