फतेहपुर में छात्राओं को पॉक्सो एक्ट की जानकारी, न्यायिक अधिकारियों ने बताए कानूनी अधिकार
रिपोर्ट – अशोक सिंह
फतेहपुर। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज फतेहपुर में छात्राओं को उनके कानूनी अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों की जानकारी देने के उद्देश्य से विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान और माननीय जनपद न्यायाधीश के अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारियों ने छात्राओं को पॉक्सो एक्ट सहित बच्चों की सुरक्षा से संबंधित विभिन्न कानूनी प्रावधानों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को कानून के प्रति जागरूक करना और उन्हें यह समझाना था कि किसी भी अनुचित स्थिति या परेशानी की स्थिति में उन्हें अपने अधिकारों की जानकारी होनी चाहिए। इस दौरान न्यायिक अधिकारियों ने छात्राओं से संवाद करते हुए उनकी सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की।
छात्राओं को पॉक्सो एक्ट के प्रावधानों की जानकारी
कार्यक्रम में अपर सत्र न्यायाधीश सुभाष चंद्र मौर्य, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट दिव्या सिंह एवं आनंद उमराव ने छात्राओं को पॉक्सो एक्ट के विभिन्न प्रावधानों के बारे में बताया। उन्होंने समझाया कि बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से पॉक्सो कानून बनाया गया है।
न्यायिक अधिकारियों ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा के लिए कानून में विशेष प्रावधान किए गए हैं। इसलिए छात्राओं को अपने अधिकारों के साथ-साथ उन कानूनी व्यवस्थाओं की भी जानकारी होनी चाहिए, जिनके माध्यम से जरूरत पड़ने पर सहायता प्राप्त की जा सकती है।
इसके अलावा छात्राओं को यह भी बताया गया कि किसी भी प्रकार की अनुचित घटना, उत्पीड़न या अपराध की स्थिति में चुप रहने के बजाय उचित माध्यम से इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाना महत्वपूर्ण है। समय पर सूचना मिलने से संबंधित एजेंसियां आवश्यक कानूनी कार्रवाई कर सकती हैं और पीड़ित बच्चे को सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है।
अधिकारों और सुरक्षा को लेकर किया जागरूक
विधिक जागरूकता कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को उनके कानूनी अधिकारों के बारे में भी जानकारी दी गई। न्यायिक अधिकारियों ने बताया कि कानून बच्चों की सुरक्षा को गंभीरता से लेता है और उनकी गरिमा एवं सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विभिन्न कानूनी प्रावधान लागू किए गए हैं।
उन्होंने छात्राओं को समझाया कि किसी भी ऐसी परिस्थिति में, जिसमें उन्हें असहजता या असुरक्षा महसूस हो, उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही किसी विश्वसनीय व्यक्ति, अभिभावक, शिक्षक या संबंधित अधिकारी को समय रहते जानकारी देना आवश्यक है।
कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को यह संदेश भी दिया गया कि कानून की जानकारी केवल किसी घटना के बाद ही उपयोगी नहीं होती, बल्कि इसके बारे में पहले से जागरूक रहना भी सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसी उद्देश्य से विद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
न्यायिक अधिकारियों ने छात्राओं से किया संवाद
कार्यक्रम की एक महत्वपूर्ण विशेषता न्यायिक अधिकारियों और छात्राओं के बीच संवाद रहा। अधिकारियों ने छात्राओं को कानूनी विषयों को सरल तरीके से समझाने का प्रयास किया, ताकि वे अपने अधिकारों और उपलब्ध कानूनी सहायता को आसानी से समझ सकें।
इस दौरान छात्राओं को बताया गया कि किसी घटना की जानकारी होने पर उसे छिपाने के बजाय उचित माध्यम से सामने लाना जरूरी है। साथ ही उन्हें यह समझाया गया कि कानूनी प्रक्रिया के संबंध में जानकारी और सहायता के लिए संबंधित विधिक सेवा संस्थाओं से भी संपर्क किया जा सकता है।
न्यायिक अधिकारियों ने छात्राओं को जागरूक करते हुए कहा कि समाज में बच्चों की सुरक्षा सामूहिक जिम्मेदारी है। परिवार, विद्यालय, समाज और संबंधित संस्थाओं के बीच समन्वय से बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार किया जा सकता है।
पैरालीगल वालंटियर्स ने भी किया सहयोग
कार्यक्रम में पैरालीगल वालंटियर शेखर एवं रामेंद्र श्रीवास्तव भी मौजूद रहे। उन्होंने विधिक जागरूकता अभियान में सहयोग किया और छात्राओं तक कानून से जुड़ी जानकारी पहुंचाने में अपनी भूमिका निभाई।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से छात्राओं को कानूनी अधिकारों और सुरक्षा संबंधी प्रावधानों की जानकारी दी गई। साथ ही उन्हें यह संदेश दिया गया कि किसी भी समस्या की स्थिति में उचित सहायता लेने में संकोच नहीं करना चाहिए।
कानून की जानकारी से बढ़ेगा आत्मविश्वास
विद्यालय में आयोजित इस विधिक जागरूकता कार्यक्रम का उद्देश्य केवल कानून की जानकारी देना ही नहीं, बल्कि छात्राओं में अपने अधिकारों को लेकर जागरूकता और आत्मविश्वास बढ़ाना भी रहा। कार्यक्रम में पॉक्सो एक्ट के साथ-साथ बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कानूनी पहलुओं को समझाने पर विशेष जोर दिया गया।
इस तरह के कार्यक्रम छात्राओं को कानून और न्याय व्यवस्था के प्रति जागरूक बनाने में उपयोगी साबित हो सकते हैं। वहीं, समय-समय पर आयोजित होने वाले ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों और किशोरियों को यह समझने में मदद मिलती है कि किसी भी समस्या की स्थिति में वे उचित सहायता और कानूनी संरक्षण प्राप्त कर सकती हैं।
कार्यक्रम के अंत में छात्राओं को उनके अधिकारों और सुरक्षा के प्रति सजग रहने का संदेश दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि जागरूकता ही सुरक्षित वातावरण तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार है। विद्यालय स्तर पर इस प्रकार के कार्यक्रमों से छात्राओं को कानून की बुनियादी जानकारी मिलती है और वे आवश्यकता पड़ने पर उचित कदम उठाने के लिए अधिक जागरूक हो सकती हैं।

