मथुरा में साइबर जागरूकता अभियान, एडीजी समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों ने लोगों को किया जागरूक

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रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज

मथुरा। डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराधों से बचाव को लेकर जागरूकता भी जरूरी हो गई है। इसी उद्देश्य से मंगलवार को मथुरा पुलिस की ओर से एक विशेष साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पुलिस अधिकारियों ने नागरिकों को ऑनलाइन ठगी, फिशिंग लिंक, ओटीपी फ्रॉड और सोशल मीडिया से जुड़े साइबर अपराधों के प्रति सतर्क रहने की जानकारी दी।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में एडीजी आईपीएस एस.के. भगत मौजूद रहे। इसके अलावा डीआईजी आगरा रेंज शैलेश पाण्डेय और एसएसपी मथुरा आईपीएस श्लोक कुमार की भी उपस्थिति रही। वरिष्ठ अधिकारियों ने लोगों से डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तत्काल जानकारी पुलिस को देने की अपील की।

साइबर अपराध से बचाव के बताए तरीके

कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधिकारियों ने बताया कि साइबर अपराधी अलग-अलग तरीकों से लोगों को अपने जाल में फंसाने का प्रयास करते हैं। कभी फर्जी लिंक भेजकर बैंक संबंधी जानकारी हासिल करने की कोशिश की जाती है, तो कभी ओटीपी या अन्य गोपनीय जानकारी मांगकर खाते से रकम निकालने का प्रयास किया जाता है।

अधिकारियों ने नागरिकों को सलाह दी कि किसी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक पर बिना जांच किए क्लिक न करें। इसके साथ ही बैंक खाते से संबंधित पासवर्ड, ओटीपी, एटीएम पिन और अन्य गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।

इसके अलावा सोशल मीडिया अकाउंट की सुरक्षा को लेकर भी लोगों को जागरूक किया गया। अधिकारियों ने कहा कि किसी संदिग्ध संदेश, कॉल या लिंक पर प्रतिक्रिया देने से पहले उसकी सत्यता की जांच करना बेहद जरूरी है। यदि किसी व्यक्ति को ऑनलाइन ठगी का संदेह हो तो उसे घबराने के बजाय तत्काल संबंधित माध्यम से शिकायत दर्ज करानी चाहिए।

व्यापारियों को भी डिजिटल सुरक्षा की सलाह

कार्यक्रम में लघु उद्योग भारती के जिला अध्यक्ष अंकित बंसल ने भी सहभागिता की। उन्होंने साइबर सुरक्षा को लेकर अपने विचार रखते हुए कहा कि डिजिटल लेन-देन के बढ़ते चलन के कारण व्यापारी वर्ग के लिए भी साइबर सुरक्षा महत्वपूर्ण हो गई है।

उन्होंने कहा कि आज व्यापारिक गतिविधियों में ऑनलाइन भुगतान और डिजिटल बैंकिंग का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में व्यापारियों को भी लेन-देन के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर भुगतान करने, संदिग्ध लिंक खोलने या बैंक से जुड़ी जानकारी साझा करने से बचना चाहिए।

उन्होंने कहा कि साइबर जागरूकता केवल आम नागरिकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि व्यापारियों, विद्यार्थियों, कर्मचारियों और डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल करने वाले प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचनी चाहिए।

डिजिटल युग में जागरूकता को बताया जरूरी

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में मोबाइल फोन और इंटरनेट लोगों के दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। बैंकिंग, खरीदारी, शिक्षा, व्यापार और सरकारी सेवाओं समेत कई कार्य अब ऑनलाइन माध्यम से किए जा रहे हैं। ऐसे में डिजिटल सुविधाओं के साथ साइबर सुरक्षा की जानकारी होना भी जरूरी है।

इसी क्रम में पुलिस अधिकारियों ने नागरिकों से कहा कि साइबर अपराध से बचने के लिए सतर्कता सबसे महत्वपूर्ण है। यदि कोई व्यक्ति फोन पर खुद को बैंक अधिकारी, पुलिसकर्मी या किसी अन्य संस्था का प्रतिनिधि बताकर गोपनीय जानकारी मांगता है, तो बिना सत्यापन के कोई जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।

साथ ही, सोशल मीडिया पर मजबूत पासवर्ड रखने, अलग-अलग खातों के लिए अलग पासवर्ड इस्तेमाल करने और उपलब्ध सुरक्षा सुविधाओं को सक्रिय रखने की सलाह भी दी गई।

पुलिस और जनता के बीच जागरूकता बढ़ाने पर जोर

मथुरा पुलिस के इस अभियान का उद्देश्य नागरिकों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करना और डिजिटल सुरक्षा के संबंध में व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराना रहा। अधिकारियों ने कहा कि पुलिस की कार्रवाई के साथ-साथ आम लोगों की जागरूकता भी साइबर अपराधों की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

कार्यक्रम के दौरान नागरिकों को यह संदेश दिया गया कि किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि को नजरअंदाज न करें। इसके अलावा परिवार के बुजुर्गों और बच्चों को भी साइबर सुरक्षा के सामान्य नियमों की जानकारी देने की अपील की गई, क्योंकि डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल अब समाज के लगभग हर वर्ग द्वारा किया जा रहा है।

कार्यक्रम को सफल बनाने में एसपी सिटी राजीव कुमार और एएसपी आईपीएस आशना चौधरी का विशेष योगदान रहा। पुलिस अधिकारियों और अन्य उपस्थित लोगों ने साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए लगातार ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

मथुरा में आयोजित यह साइबर जागरूकता कार्यक्रम नागरिकों को डिजिटल माध्यमों का सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल करने का संदेश देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रहा। पुलिस ने लोगों से अपील की कि वे सावधानी बरतें, अपनी गोपनीय जानकारी सुरक्षित रखें और किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दें।

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