अमेठी में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण मामले में दो लेखपाल निलंबित, हाईकोर्ट में 7 अक्टूबर को अगली सुनवाई
रिपोर्ट – अंजनी मिश्रा
अमेठी: जिले के कोतवाली क्षेत्र के रामदैपुर गांव में सार्वजनिक उपयोग के लिए दर्ज सरकारी भूमि पर कथित अतिक्रमण और निर्माण के मामले में प्रशासन ने कार्रवाई की है। मामले की जांच के बाद राजस्व विभाग के दो लेखपालों को निलंबित किया गया है। इनमें पूर्व लेखपाल विक्रम और वर्तमान लेखपाल कुलदीप शुक्ल शामिल हैं। प्रशासन के अनुसार, जांच में प्रथम दृष्टया राजस्व कर्मियों की लापरवाही सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई।
यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में विचाराधीन है। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान प्रशासन की ओर से अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की गई। इसके साथ ही सरकारी भूमि पर हुए निर्माण से संबंधित तस्वीरें भी कोर्ट में पेश की गईं। मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को निर्धारित है।
सरकारी जमीन पर अतिक्रमण को लेकर मामला हाईकोर्ट पहुंचा
रामदैपुर गांव में जिस भूमि को लेकर विवाद सामने आया है, वह राजस्व अभिलेखों में सार्वजनिक उपयोग के लिए दर्ज बताई जा रही है। इस भूमि पर अतिक्रमण और निर्माण को लेकर मामला न्यायालय तक पहुंचा। इसके बाद हाईकोर्ट ने प्रशासन से जमीन की मौजूदा स्थिति और अतिक्रमण हटाने के लिए की गई कार्रवाई का ब्योरा मांगा।
सुनवाई के दौरान प्रशासन की ओर से अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी अदालत को दी गई। सरकारी भूमि पर मौजूद निर्माण से संबंधित तस्वीरें भी प्रस्तुत की गईं। इसके बाद न्यायालय ने जिलाधिकारी अमेठी को व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करने और मामले में की गई कार्रवाई का विस्तृत विवरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
इससे स्पष्ट है कि अब मामले में केवल अतिक्रमण की स्थिति ही नहीं, बल्कि संबंधित राजस्व अधिकारियों की भूमिका और प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई भी न्यायिक निगरानी में है।
दो लेखपालों पर हुई विभागीय कार्रवाई
उपजिलाधिकारी पंकज मिश्र के अनुसार, मामले की जांच के दौरान राजस्व कर्मियों की लापरवाही प्रथम दृष्टया सामने आई। इसके बाद पूर्व लेखपाल विक्रम और वर्तमान लेखपाल कुलदीप शुक्ल को निलंबित कर दिया गया।
प्रशासन की ओर से की गई यह कार्रवाई सरकारी भूमि की निगरानी और संरक्षण में राजस्व कर्मचारियों की जिम्मेदारी को लेकर महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, निलंबन विभागीय कार्रवाई है और इससे संबंधित कर्मचारियों की अंतिम जवाबदेही जांच और विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तय होगी।
वहीं, प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि सरकारी भूमि पर कब्जा करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। यानी मामले में केवल राजस्व कर्मियों की भूमिका की जांच नहीं हो रही, बल्कि कथित अतिक्रमण से जुड़े पक्ष के खिलाफ भी निर्धारित कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
जिलाधिकारी को व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश
हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी अमेठी को व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही न्यायालय ने भूमि की वर्तमान स्थिति तथा अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासन की ओर से अब तक उठाए गए कदमों का विस्तृत ब्योरा मांगा है।
ऐसे मामलों में अदालत के सामने प्रशासनिक कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होता है। खासकर जब भूमि सार्वजनिक उपयोग के लिए दर्ज हो, तब उसके संरक्षण और रिकॉर्ड के अनुरूप उपयोग को लेकर प्रशासन की जिम्मेदारी बढ़ जाती है।
उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर अतिक्रमण हटाने को लेकर हाईकोर्ट पहले भी राजस्व अधिकारियों की जिम्मेदारी पर जोर दे चुका है। एक हालिया न्यायिक आदेश में अदालत ने सार्वजनिक भूमि से जुड़े अतिक्रमण की सूचना मिलने पर समयबद्ध कार्रवाई और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की आवश्यकता बताई थी।
सरकारी भूमि पर कब्जे के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान
सरकारी या ग्राम सभा की सार्वजनिक उपयोग वाली भूमि के संरक्षण को लेकर राजस्व व्यवस्था में अधिकारियों और ग्राम स्तर के जिम्मेदार कर्मचारियों की भूमिका निर्धारित है। हाईकोर्ट ने अलग-अलग मामलों में इस बात पर जोर दिया है कि सार्वजनिक उपयोग की जमीन पर अतिक्रमण की शिकायत मिलने पर मौके का निरीक्षण और नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
रामदैपुर के मामले में भी प्रशासन की ओर से इसी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है। हालांकि, अतिक्रमण की अंतिम स्थिति और जमीन से जुड़े सभी तथ्य न्यायालय के समक्ष चल रही कार्यवाही में स्पष्ट होंगे।
अतिक्रमण करने वालों पर भी होगी कार्रवाई
एसडीएम पंकज मिश्र के मुताबिक, सरकारी भूमि पर कब्जा करने वालों के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि जमीन की स्थिति और संबंधित रिकॉर्ड के आधार पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
इसका उद्देश्य सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराना और उसे उसके निर्धारित सार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित रखना है। इसके अलावा राजस्व अभिलेखों और मौके की स्थिति के बीच किसी तरह का अंतर पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा सकती है।
7 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
रामदैपुर सरकारी भूमि अतिक्रमण मामले में अब अगली महत्वपूर्ण तारीख 7 अक्टूबर है। उस दिन न्यायालय के समक्ष प्रशासन की ओर से दाखिल किए जाने वाले शपथपत्र और अब तक की कार्रवाई का आगे परीक्षण हो सकता है।
फिलहाल प्रशासन की ओर से दो लेखपालों को निलंबित करने की कार्रवाई की जा चुकी है। वहीं, कथित अतिक्रमण को लेकर संबंधित पक्ष के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई जारी होने की बात कही गई है।
अमेठी जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर राजस्व न्यायालय और भूमि रिकॉर्ड से संबंधित सेवाओं के लिए अलग व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं, जिससे भूमि संबंधी मामलों की प्रशासनिक प्रक्रिया के महत्व का भी पता चलता है।
कुल मिलाकर, रामदैपुर गांव का यह मामला सरकारी भूमि के संरक्षण, राजस्व कर्मचारियों की जिम्मेदारी और न्यायिक निगरानी से जुड़ा है। एक ओर प्रशासन ने प्रथम दृष्टया लापरवाही के आधार पर दो लेखपालों को निलंबित किया है, वहीं दूसरी ओर हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी से व्यक्तिगत शपथपत्र के जरिए भूमि की मौजूदा स्थिति और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का विस्तृत विवरण मांगा है। अब 7 अक्टूबर की सुनवाई में मामले की आगे की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।

