हमीरपुर में अकील तिराहे से हटाए गए रेहड़ी-पटरी दुकानदारों ने डीएम से लगाई गुहार
रिपोर्ट- मोहम्मद अकरम
हमीरपुर। जिले में अकील तिराहे के आसपास लंबे समय से रेहड़ी-पटरी लगाकर परिवार का पालन-पोषण करने वाले छोटे दुकानदारों ने दुकानें हटाए जाने के बाद जिलाधिकारी से मदद की गुहार लगाई है। दुकानदारों का कहना है कि नगर पालिका की कार्रवाई के बाद उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने प्रशासन से मामले का संज्ञान लेते हुए उन्हें दोबारा दुकान लगाने के लिए स्थान उपलब्ध कराने की मांग की है।
दुकानदारों के मुताबिक वे पिछले कई वर्षों से अकील तिराहे के आसपास अपनी छोटी-छोटी दुकानें और रेहड़ियां लगाकर कारोबार करते आ रहे थे। इनमें कई दुकानदारों का दावा है कि वे करीब 10 से 20 वर्षों से इसी स्थान पर व्यापार कर अपने परिवार का खर्च चला रहे थे। अचानक दुकानें हटाए जाने के बाद उनके सामने आय का कोई दूसरा साधन नहीं बचा है।
कार्रवाई के बाद रोजगार प्रभावित होने का दावा
दुकानदारों ने आरोप लगाया कि नगर पालिका की कार्रवाई के चलते उनका वर्षों पुराना रोजगार प्रभावित हुआ है। उनका कहना है कि छोटे स्तर पर कारोबार करने वाले लोगों के लिए रेहड़ी-पटरी ही परिवार की आय का प्रमुख जरिया है। ऐसे में दुकान हटने से उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ा है।
दुकानदारों का कहना है कि वे किसी प्रकार का विवाद नहीं चाहते, बल्कि प्रशासन से नियमों के दायरे में उनके लिए उचित स्थान उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि उन्हें व्यवस्थित तरीके से स्थान दे दिया जाए तो वे अपना कारोबार जारी रखते हुए परिवार का भरण-पोषण कर सकेंगे।
जमीन के क्षेत्राधिकार को लेकर भी उठाया सवाल
दुकानदारों ने जिस स्थान से उन्हें हटाया गया है, उसके क्षेत्राधिकार को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनके मुताबिक संबंधित जमीन पुलिस लाइन के क्षेत्राधिकार में आती है। दुकानदारों का दावा है कि पूर्व में अलाव कमेटी को भी यहां अनौपचारिक रूप से स्थान दिए जाने की व्यवस्था रही है।
हालांकि, जमीन के वास्तविक स्वामित्व और क्षेत्राधिकार से संबंधित दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में दुकानदारों ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की जांच कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि प्रशासनिक स्तर पर कोई वैकल्पिक व्यवस्था संभव है तो उन्हें वहां स्थान उपलब्ध कराया जाए।
डीएम से दुकान और स्थान दोबारा आवंटित करने की मांग
दुकानदारों ने जिलाधिकारी के समक्ष अपनी समस्या रखते हुए कहा कि उनकी स्थिति पर मानवीय दृष्टिकोण से विचार किया जाए। उन्होंने मांग की कि वर्षों से छोटा कारोबार कर रहे दुकानदारों के लिए उपयुक्त स्थान चिह्नित कर दुकानें अथवा रेहड़ी लगाने की अनुमति दी जाए।
उनका कहना है कि वे प्रशासन के सभी आवश्यक नियमों का पालन करने के लिए तैयार हैं। इसके साथ ही दुकानदारों ने यह भी मांग की कि यदि मौजूदा स्थान पर दुकानें लगाना संभव नहीं है तो नगर पालिका अथवा प्रशासन की ओर से कोई वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराया जाए, ताकि उनका कारोबार दोबारा शुरू हो सके।
दुकानदारों के अनुसार, छोटे व्यापारियों के लिए रोजाना की कमाई ही परिवार की जरूरतों को पूरा करने का मुख्य आधार होती है। इसलिए दुकान हटाए जाने के बाद केवल व्यापार प्रभावित नहीं हुआ, बल्कि परिवार की दैनिक जरूरतों को पूरा करना भी मुश्किल हो गया है।
छोटे व्यापारियों ने रोजगार बचाने की अपील की
दुकानदारों ने प्रशासन से अपील करते हुए कहा कि उनके रोजगार को ध्यान में रखते हुए समाधान निकाला जाए। उन्होंने कहा कि वे लंबे समय से इसी कारोबार पर निर्भर हैं और अचानक दुकान हटने से उनके सामने आर्थिक कठिनाइयां बढ़ गई हैं।
दुकानदारों का कहना है कि यदि प्रशासन उन्हें निर्धारित नियमों के तहत स्थान उपलब्ध कराता है तो इससे न केवल उनका रोजगार बच सकता है, बल्कि बाजार क्षेत्र में छोटे व्यापारियों के कारोबार को भी व्यवस्थित किया जा सकता है। साथ ही, निर्धारित स्थान मिलने से यातायात और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े प्रशासनिक मानकों का भी पालन किया जा सकता है।
इस मामले में अब दुकानदारों की निगाह प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। उन्होंने जिलाधिकारी से जल्द से जल्द मामले की जांच कर उचित समाधान निकालने की मांग की है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने भी उठाई दुकानदारों की समस्या
मामले को लेकर कांग्रेस प्रवक्ता उज्ज्वल पाठक ने भी दुकानदारों की समस्या का उल्लेख करते हुए प्रशासन से मामले पर विचार करने की बात कही। दुकानदारों की ओर से रोजगार बचाने और वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने की मांग की जा रही है।
फिलहाल, अकील तिराहे से हटाए गए रेहड़ी-पटरी दुकानदारों की मांग प्रशासन के समक्ष पहुंच चुकी है। अब यह देखना होगा कि प्रशासन मामले की जांच के बाद दुकानदारों के लिए क्या व्यवस्था करता है। दुकानदारों को उम्मीद है कि उनकी वर्षों पुरानी आजीविका को ध्यान में रखते हुए कोई व्यावहारिक समाधान निकाला जाएगा।

