कानपुर में हुआ छात्र अलंकरण समारोह: डॉ. उमाशंकर पचौरी ने विद्यार्थियों को संस्कारों का दिया संदेश

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रिपोर्ट – विक्की रघुवंशी 

कानपुर: विद्यार्थियों में संस्कार, अनुशासन और सकारात्मक जीवन मूल्यों को विकसित करने के उद्देश्य से ओंकारेश्वर सरस्वती विद्या निकेतन इंटर कॉलेज, सतबरी रोड एवं महर्षि डी.बी.एल. इंटर कॉलेज, उमरी में छात्र अलंकरण समारोह एवं जीवन प्रबंधन विषयक व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में भोपाल से पधारे प्रख्यात शिक्षाविद् डॉ. उमाशंकर पचौरी ने विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों को संबोधित किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता ओंकारेश्वर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के संरक्षक डॉ. अंगद सिंह ने की। वहीं, संस्थान की प्रबंध निदेशक डॉ. पूजा अवस्थी, भारतीय शिक्षण मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. ओमप्रकाश सिंह, प्रधानाचार्या आकांक्षा सिंह, शिक्षकगण, अभिभावक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

विद्यार्थियों को जीवन प्रबंधन का महत्व समझाया

अपने प्रेरक संबोधन में डॉ. उमाशंकर पचौरी ने कहा कि वर्तमान समय में तकनीक और डिजिटल संसाधनों का उपयोग आवश्यक है, लेकिन उनका संतुलित प्रयोग भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण के लिए केवल शैक्षणिक सफलता पर्याप्त नहीं है, बल्कि संस्कार, अनुशासन, सकारात्मक सोच और गुरुजनों के प्रति सम्मान भी आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थी यदि अपने शिक्षकों के मार्गदर्शन को गंभीरता से अपनाते हैं तो उनका सर्वांगीण विकास संभव होता है। इसके विपरीत केवल अपनी इच्छा के अनुसार चलने से सीखने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसलिए जीवन में सही मार्गदर्शन का महत्व सदैव बना रहता है।

गुरु-शिष्य परंपरा का बताया महत्व

व्याख्यान के दौरान डॉ. पचौरी ने भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य परंपरा का उल्लेख करते हुए काकभुशुण्डि की कथा का उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि भारतीय परंपरा में गुरु को ज्ञान, मार्गदर्शन और जीवन निर्माण का आधार माना गया है।

उन्होंने कहा कि एक सच्चा गुरु सदैव अपने शिष्य के कल्याण की कामना करता है। इसलिए विद्यार्थियों को अपने शिक्षकों का सम्मान करते हुए उनके अनुभवों से सीखने का प्रयास करना चाहिए।

मोबाइल और डिजिटल दुनिया के संतुलित उपयोग पर दिया जोर

डॉ. पचौरी ने अपने संबोधन में आधुनिक जीवनशैली की चुनौतियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज बच्चे ही नहीं, बल्कि बड़े भी मोबाइल और डिजिटल माध्यमों में अधिक समय व्यतीत कर रहे हैं।

उन्होंने सुझाव दिया कि तकनीक का उपयोग शिक्षा, ज्ञान और रचनात्मक कार्यों के लिए किया जाए। साथ ही परिवार के साथ संवाद, सामाजिक संबंधों और वास्तविक जीवन के अनुभवों को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि संतुलित जीवनशैली विद्यार्थियों के मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास के लिए लाभकारी होती है।

परिवार और संस्कारों की भूमिका पर चर्चा

मुख्य वक्ता ने कहा कि परिवार किसी भी बच्चे के व्यक्तित्व निर्माण की पहली पाठशाला होता है। माता-पिता का दायित्व केवल बच्चों की आवश्यकताओं की पूर्ति करना नहीं, बल्कि उन्हें जिम्मेदार, आत्मनिर्भर और संवेदनशील नागरिक बनाना भी है।

उन्होंने कहा कि बच्चों को उचित मार्गदर्शन, अनुशासन और जीवन के व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिलना चाहिए। इससे उनमें आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है।

संघर्ष को बताया सफलता की कुंजी

अपने उद्बोधन में डॉ. पचौरी ने कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए संघर्ष और निरंतर प्रयास आवश्यक हैं। चुनौतियां व्यक्ति को मजबूत बनाती हैं और नई परिस्थितियों का सामना करना सिखाती हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि कठिनाइयों से घबराने के बजाय उन्हें सीखने का अवसर समझना चाहिए। निरंतर प्रयास, सकारात्मक दृष्टिकोण और धैर्य सफलता का मजबूत आधार बनते हैं।

संतोष और निरंतर प्रयास का संदेश

डॉ. पचौरी ने कहा कि मनुष्य के जीवन में इच्छाएं स्वाभाविक हैं, लेकिन संतुलन और संतोष भी उतने ही आवश्यक हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे अपने लक्ष्य निर्धारित करें, परिश्रम करें और उपलब्धियों के साथ-साथ जीवन के मूल्यों को भी महत्व दें।

उन्होंने कहा कि जीवन केवल उपलब्धियां प्राप्त करने का नाम नहीं है, बल्कि परिवार, समाज और मानवीय संबंधों के साथ संतुलन बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है।

छात्र अलंकरण समारोह में प्रतिभाओं का सम्मान

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों का सम्मान भी किया गया। छात्र अलंकरण समारोह का उद्देश्य विद्यार्थियों को उनकी उपलब्धियों के लिए प्रोत्साहित करना तथा अन्य छात्रों को भी उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित करना था।

सम्मान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों ने इसे अपने लिए प्रेरणादायक क्षण बताया और भविष्य में भी बेहतर प्रदर्शन करने का संकल्प व्यक्त किया।

अतिथियों का सम्मान

कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत समारोह से हुई। डॉ. पूजा अवस्थी ने मुख्य अतिथि का परिचय कराते हुए उनका स्वागत किया। इसके बाद डॉ. ओमप्रकाश सिंह तथा प्रधानाचार्या आकांक्षा सिंह ने स्मृति चिन्ह भेंट कर उन्हें सम्मानित किया।

कार्यक्रम में उपस्थित अभिभावकों ने भी विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास से जुड़े विषयों पर आयोजित इस व्याख्यान की सराहना की।

शिक्षा के साथ जीवन मूल्यों पर भी जोर

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना ही पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, नैतिक मूल्य, अनुशासन, सामाजिक जिम्मेदारी और सकारात्मक सोच का विकास भी उतना ही आवश्यक है। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को जीवन के व्यावहारिक पक्ष को समझने और बेहतर नागरिक बनने के लिए प्रेरित करते हैं।

कानपुर में आयोजित छात्र अलंकरण समारोह एवं जीवन प्रबंधन व्याख्यानमाला विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक रही। मुख्य वक्ता डॉ. उमाशंकर पचौरी ने गुरु-शिष्य परंपरा, जीवन प्रबंधन, संतुलित जीवनशैली, परिवार, संस्कार और सकारात्मक सोच पर अपने विचार साझा किए।

वहीं, उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों का सम्मान कर उन्हें भविष्य में भी उत्कृष्टता की ओर अग्रसर रहने के लिए प्रेरित किया गया। शिक्षा के साथ जीवन मूल्यों को जोड़ने वाला यह आयोजन विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों के लिए समान रूप से उपयोगी और प्रेरक साबित हुआ।

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