प्राथमिक विद्यालय में बच्चों के नाम काटने का आरोप, पिता ने डीएम से की शिकायत
रिपोर्ट: शानू वर्मा
बांदा। जिले के तिंदवारी क्षेत्र के वासिलपुर गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय को लेकर एक पिता ने गंभीर शिकायत जिलाधिकारी से की है। वासिलपुर निवासी राममिलन पुत्र राजकरन यादव ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया है कि प्राथमिक विद्यालय वासिलपुर के प्रधानाचार्य ने उनके बेटे और बेटी का स्कूल से नाम काट दिया तथा उन्हें दूसरे विद्यालय में अटैच कर दिया। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की जांच कराकर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत के अनुसार राममिलन यादव के बेटे धनीराम का नाम प्राथमिक विद्यालय वासिलपुर में कक्षा-1 में तथा बेटी खुशी का नाम कक्षा-2 में दर्ज था। पिता का कहना है कि दोनों बच्चे विद्यालय में नियमित रूप से पढ़ने जा रहे थे और करीब दो माह तक हाजिरी रजिस्टर में उनकी उपस्थिति भी दर्ज की गई। ऐसे में अचानक दोनों बच्चों का नाम विद्यालय से हटाए जाने को लेकर परिवार ने सवाल उठाए हैं।
प्रधानाचार्य पर लगाया नाम काटने का आरोप
राममिलन यादव ने जिलाधिकारी को दिए शिकायती पत्र में प्राथमिक विद्यालय वासिलपुर के प्रधानाचार्य विजय शंकर शुक्ला पर आरोप लगाया है कि उनके दोनों बच्चों का नाम विद्यालय से काट दिया गया। शिकायतकर्ता के मुताबिक, इसके बाद बच्चों को प्राथमिक विद्यालय सैमरी भाग-2 से अटैच कर दिया गया।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस पूरी प्रक्रिया में प्राथमिक विद्यालय सैमरी भाग-2 की प्रधानाचार्य अचेतना की भी भूमिका रही। हालांकि, ये सभी आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
पिता का कहना है कि बच्चों के नाम विद्यालय में दर्ज होने और दो माह तक उनकी उपस्थिति लगने के बाद अचानक नाम हटाए जाने की जानकारी मिलने पर वह मामले को लेकर प्रधानाचार्य से बातचीत करने पहुंचे थे। उनका आरोप है कि इस दौरान उन्हें संतोषजनक जवाब देने के बजाय वहां से जाने के लिए कहा गया।
पिता ने लगाया धमकी देने का आरोप
शिकायतकर्ता राममिलन यादव ने आरोप लगाया कि जब वह अपने बच्चों को लेकर विद्यालय के प्रधानाचार्य के पास पहुंचे, तो उनके साथ कथित तौर पर अनुचित व्यवहार किया गया। पिता के अनुसार, प्रधानाचार्य ने उनसे कहा कि वह उनके बच्चों को नहीं पढ़ाएंगे। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बाद उन्हें वहां से भगा दिया गया।
मामले को लेकर पिता ने जिलाधिकारी से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और विद्यालय में नामांकन से संबंधित स्थिति स्पष्ट नहीं है। उन्होंने प्रशासन से विद्यालय के रिकॉर्ड की जांच कराने तथा बच्चों के नाम हटाने की प्रक्रिया की जानकारी सामने लाने की मांग की है।
जांच के बाद स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
शिकायत के सामने आने के बाद अब पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। जांच के दौरान विद्यालय के प्रवेश रजिस्टर, हाजिरी रजिस्टर, बच्चों के नामांकन से संबंधित दस्तावेज और स्कूल रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण होगी। इसके साथ ही यह भी देखा जा सकता है कि बच्चों को दूसरे विद्यालय में अटैच करने के संबंध में कोई आधिकारिक आदेश या प्रक्रिया अपनाई गई थी या नहीं।
वहीं, शिकायत में लगाए गए आरोपों पर संबंधित विद्यालय के प्रधानाचार्य या शिक्षा विभाग की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने की जानकारी नहीं है। इसलिए फिलहाल मामले में दोनों पक्षों के तथ्यों और विभागीय जांच के निष्कर्ष का इंतजार रहेगा।
बच्चों की पढ़ाई को लेकर परिवार चिंतित
राममिलन यादव ने जिलाधिकारी से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, बच्चों के विद्यालय में नामांकन और उपस्थिति से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की जाए तथा यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
परिवार का कहना है कि बच्चों की शिक्षा किसी भी विवाद से प्रभावित नहीं होनी चाहिए। ऐसे में प्रशासन के सामने यह स्पष्ट करना जरूरी होगा कि धनीराम और खुशी का नाम किस आधार पर विद्यालय के रिकॉर्ड से हटाया गया और उन्हें दूसरे विद्यालय में अटैच करने की प्रक्रिया किस नियम के तहत की गई।
फिलहाल मामला जिलाधिकारी के समक्ष शिकायत के रूप में पहुंच चुका है। अब संबंधित शिक्षा विभाग की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और बच्चों के विद्यालय परिवर्तन या नाम हटाए जाने के पीछे वास्तविक कारण क्या था।

