हैलट अस्पताल में सर्पदंश से पीड़ित 53 बच्चों में 52 की बची जान, डॉक्टरों ने बताया समय पर इलाज का महत्व
रिपोर्ट – हरी शंकर शर्मा
कानपुर: जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से संबद्ध लाला लाजपत राय (एलएलआर) अस्पताल के बाल रोग विभाग में सर्पदंश से पीड़ित बच्चों के इलाज को लेकर चिकित्सकों ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। अस्पताल के अनुसार, हाल के मामलों में गंभीर स्थिति में लाए गए 53 बच्चों में से 52 को उपचार के बाद बचाया गया, जबकि हमीरपुर से बेहद गंभीर हालत में लाए गए एक बच्चे को तमाम प्रयासों के बावजूद बचाया नहीं जा सका।
बाल रोग विभाग के चिकित्सकों के मुताबिक, सर्पदंश के मामलों में समय पर अस्पताल पहुंचना और उचित चिकित्सा उपचार शुरू होना बेहद महत्वपूर्ण है। इसी क्रम में चिकित्सकों ने अभिभावकों से अपील की कि सांप के काटने के बाद घरेलू उपचार या झाड़-फूंक में समय गंवाने के बजाय मरीज को तत्काल चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाया जाए।
गंभीर हालत में पहुंचे बच्चों का किया गया उपचार
एलएलआर अस्पताल के बाल रोग विभाग के अनुसार, हाल के समय में सर्पदंश के कई गंभीर मामले अस्पताल पहुंचे। इनमें 53 बच्चे ऐसे थे, जिनकी स्थिति को चिकित्सकीय निगरानी और उपचार की आवश्यकता थी। डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की टीम ने इन बच्चों की लगातार निगरानी की और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया।
अस्पताल के अनुसार, 53 में से 52 बच्चों को उपचार के बाद सुरक्षित बचाया गया। वहीं, एक बच्चे की स्थिति अत्यंत गंभीर थी और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
चिकित्सकों का कहना है कि बच्चों में सर्पदंश का प्रभाव कई बार तेजी से गंभीर हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, बच्चों को वयस्कों की तुलना में गंभीर प्रभाव का अधिक जोखिम हो सकता है, क्योंकि उनके शरीर का वजन कम होता है।
भारत में सर्पदंश बड़ी स्वास्थ्य चुनौती
बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. शैलेंद्र ने सर्पदंश को भारत की महत्वपूर्ण स्वास्थ्य समस्याओं में शामिल बताते हुए इसके व्यापक प्रभाव की जानकारी दी। उन्होंने इंडियन मिलियन डेथ स्टडी और विश्व स्वास्थ्य संगठन से जुड़े आंकड़ों का उल्लेख किया।
WHO के अनुसार, भारत में वर्ष 2000 से 2019 के बीच सर्पदंश से करीब 12 लाख मौतों का अनुमान लगाया गया था, यानी औसतन लगभग 58 हजार मौतें प्रतिवर्ष। इस अध्ययन के अनुसार मृतकों में एक चौथाई से अधिक 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चे थे।
WHO की मौजूदा जानकारी के अनुसार भी भारत सर्पदंश से सबसे अधिक प्रभावित देशों में शामिल है और ग्रामीण क्षेत्रों में इसका असर विशेष रूप से अधिक देखा जाता है।
डॉक्टरों के मुताबिक, भारत में गंभीर सर्पदंश के लिए कोबरा, करैत और रसेल वाइपर सहित कुछ प्रमुख जहरीली प्रजातियां जिम्मेदार मानी जाती हैं। हालांकि, क्षेत्र के अनुसार सर्पदंश का कारण बनने वाली प्रजातियों में अंतर हो सकता है। WHO भारत के संदर्भ में इन्हें प्रमुख जहरीली प्रजातियों में शामिल करता है।
शुरुआती समय में अस्पताल पहुंचना जरूरी
बाल रोग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अमितेश यादव ने सर्पदंश प्रबंधन से जुड़े चिकित्सकीय पहलुओं की जानकारी देते हुए कहा कि सांप के काटने के बाद शुरुआती समय में मरीज को चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाना महत्वपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि सर्पदंश के बाद मरीज की स्थिति तेजी से बदल सकती है। कुछ मामलों में जहर तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकता है और सांस लेने में परेशानी जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। दूसरी ओर, कुछ विष रक्तस्राव या रक्त के जमने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।
WHO भी सर्पदंश को ऐसी चिकित्सकीय आपात स्थिति मानता है, जिसमें शीघ्र चिकित्सा सहायता और उपयुक्त एंटीवेनम उपचार महत्वपूर्ण हो सकता है।
एलएलआर में एंटी-स्नेक वेनम की उपलब्धता
वरिष्ठ चिकित्सक एवं पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. अरुण आर्या ने बताया कि विषैले सर्पदंश के मामलों में एंटी-स्नेक वेनम यानी एंटीवेनम प्रमुख उपचारों में शामिल है। उनके अनुसार, एलएलआर अस्पताल के बाल रोग विभाग में यह दवा मरीजों के लिए उपलब्ध है।
उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि यदि बच्चे को सांप काट ले तो समय बर्बाद किए बिना अस्पताल पहुंचाया जाए। चिकित्सक मरीज के लक्षणों और चिकित्सकीय स्थिति के आधार पर आगे का उपचार तय करते हैं।
WHO के अनुसार, उपयुक्त और सुरक्षित एंटीवेनम अधिकांश विषैले सर्पदंश के विषैले प्रभावों को रोकने या उलटने का सबसे प्रभावी उपचार है।
सांप काटने पर क्या करें?
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. वाईके राव ने अभिभावकों को सर्पदंश की स्थिति में सावधानी बरतने की सलाह दी। सबसे पहले बच्चे को शांत रखें और उसे अनावश्यक रूप से चलने या दौड़ने से रोकें। प्रभावित हाथ या पैर को यथासंभव स्थिर रखें और बच्चे को जल्द से जल्द नजदीकी उपयुक्त चिकित्सा केंद्र पहुंचाएं।
इसके अलावा, यदि हाथ या पैर में अंगूठी, चूड़ी, घड़ी या कोई अन्य तंग वस्तु हो तो सूजन बढ़ने से पहले उसे हटा देना उचित है।
WHO की प्राथमिक चिकित्सा संबंधी सलाह में भी प्रभावित अंग को स्थिर रखने और मरीज को शीघ्र चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाने पर जोर दिया गया है।
क्या नहीं करना चाहिए?
चिकित्सकों ने स्पष्ट किया कि सर्पदंश के बाद झाड़-फूंक, घरेलू उपचार या अन्य गैर-वैज्ञानिक उपायों में समय नहीं गंवाना चाहिए। घाव को काटना, मुंह से जहर चूसने की कोशिश करना या प्रभावित अंग पर कसकर रस्सी बांधना भी नहीं करना चाहिए।
WHO की सलाह के अनुसार, घाव को काटने या कसकर टॉर्निकेट लगाने जैसी प्रक्रियाओं से बचना चाहिए और मरीज को तत्काल चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाना चाहिए।
इसी तरह, बर्फ, जड़ी-बूटी या किसी रसायन को घाव पर लगाने के बजाय चिकित्सकीय सहायता लेना अधिक जरूरी है।
समय पर इलाज से बच सकती है जान
एलएलआर अस्पताल के चिकित्सकों द्वारा साझा की गई जानकारी एक बार फिर यह बताती है कि सर्पदंश के मामलों में समय पर चिकित्सा सुविधा तक पहुंचना कितना महत्वपूर्ण है। 53 गंभीर बच्चों में 52 के उपचार का अस्पताल द्वारा बताया गया आंकड़ा इसी दिशा में चिकित्सा व्यवस्था की भूमिका को रेखांकित करता है।
हालांकि, सर्पदंश को लेकर जागरूकता केवल अस्पताल तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में परिवारों को यह जानकारी होना जरूरी है कि सांप काटने के बाद प्राथमिक कदम क्या हों और किन पारंपरिक उपायों से बचना चाहिए।
इसलिए किसी भी सर्पदंश की स्थिति में सबसे महत्वपूर्ण कदम है—मरीज को शांत रखना, प्रभावित अंग को स्थिर रखना और बिना अनावश्यक देरी के योग्य चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाना। समय पर उपचार और उपयुक्त एंटीवेनम की उपलब्धता गंभीर परिणामों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

