बागपत में केसी त्यागी का अखिलेश यादव पर पलटवार, रालोद-एनडीए को लेकर किया बड़ा दावा
रिपोर्ट-हैदर मलिक
बागपत: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिमी यूपी की सियासत में बयानबाजी तेज होती जा रही है। बागपत में राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के हालिया बयानों पर पलटवार किया है। केसी त्यागी ने अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए कहा कि वह उनके नेता रहे मुलायम सिंह यादव के बेटे हैं और उन्हें राजनीतिक बयान देते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए।
केसी त्यागी के इस बयान के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर रालोद, सपा और एनडीए के बीच राजनीतिक विरासत तथा गठबंधन की चर्चा तेज हो गई है। खास तौर पर बागपत और आसपास के जिलों में आने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर अलग-अलग दल अपनी रणनीति और राजनीतिक आधार मजबूत करने में जुटे हैं।
अखिलेश यादव पर केसी त्यागी का पलटवार
केसी त्यागी ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि अखिलेश यादव उनके नेता रहे मुलायम सिंह यादव के बेटे हैं। ऐसे में उन्हें बड़ी-बड़ी बातें नहीं करनी चाहिए। उनके इस बयान को हाल के दिनों में अखिलेश यादव और रालोद नेतृत्व के बीच चल रही राजनीतिक बयानबाजी की कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है।
दरअसल, उत्तर प्रदेश की राजनीति में रालोद और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक समीकरण पिछले कुछ वर्षों में कई बार बदले हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में दोनों दलों ने साथ चुनाव लड़ा था, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले रालोद एनडीए में शामिल हो गया। अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों पक्ष पश्चिमी यूपी में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
लोकदल और मुलायम सिंह यादव की राजनीतिक विरासत का जिक्र
केसी त्यागी ने लोकदल की राजनीतिक विरासत का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लोकदल, मुलायम सिंह यादव और जयंत चौधरी की पार्टी की जननी है। इस बयान के जरिए उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में लोकदल और किसान राजनीति से जुड़े पुराने राजनीतिक संबंधों की ओर इशारा किया।
पश्चिमी यूपी की राजनीति में चौधरी चरण सिंह की राजनीतिक विरासत का विशेष महत्व रहा है। समय के साथ इस विरासत से जुड़े दलों और नेताओं के राजनीतिक रास्ते अलग-अलग हुए। मौजूदा दौर में राष्ट्रीय लोकदल का नेतृत्व जयंत चौधरी कर रहे हैं और पार्टी एनडीए के साथ गठबंधन में है। वहीं, सपा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपना जनाधार मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
रालोद-एनडीए गठबंधन को लेकर बड़ा दावा
केसी त्यागी ने आगामी विधानसभा चुनाव में रालोद और एनडीए की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने दावा किया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 93 सीटों पर एनडीए गठबंधन शतक पार करने की स्थिति में रहेगा। हालांकि, यह केसी त्यागी का राजनीतिक दावा है, चुनाव परिणाम या स्वतंत्र चुनावी पूर्वानुमान नहीं।
उन्होंने कहा कि आने वाले चुनाव में रालोद और एनडीए मिलकर चुनावी मैदान में उतरेंगे। सीटों के बंटवारे को लेकर भी उन्होंने संकेत दिया कि दोनों दल आपसी बातचीत और सहमति से सीटों का फैसला करेंगे।
इस बीच, रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी भी यूपी विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन और सीट बंटवारे को लेकर सार्वजनिक रूप से अपनी बात रख चुके हैं। सितंबर 2026 में सामने आए उनके बयानों में एनडीए के घटक दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने और सीटों के तालमेल पर चर्चा का उल्लेख है।
पश्चिमी यूपी में बढ़ी राजनीतिक हलचल
2027 का विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां बढ़ गई हैं। बागपत, मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली, बिजनौर, सहारनपुर, हापुड़ और आसपास के क्षेत्रों में किसान, गन्ना, रोजगार और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दे चुनावी चर्चा का हिस्सा बन रहे हैं।
विशेष रूप से पश्चिमी यूपी में किसान राजनीति और गन्ने से जुड़े मुद्दों का चुनावी विमर्श में महत्वपूर्ण स्थान रहा है। हालिया राजनीतिक विश्लेषणों में भी गन्ना नीति, किसान मुद्दों और गठबंधन के समीकरणों को पश्चिमी यूपी की चुनावी राजनीति से जोड़कर देखा गया है।
किसान को लाभकारी मूल्य देने की मांग
केसी त्यागी ने राजनीतिक बयानबाजी के साथ किसान हित का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने मांग की कि सदन के सत्र में किसानों को उनकी फसलों का लाभकारी मूल्य दिलाने के विषय पर प्रभावी चर्चा होनी चाहिए।
किसानों की आय, गन्ने का मूल्य, कृषि लागत और ग्रामीण अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लंबे समय से राजनीतिक चर्चा के केंद्र में रहे हैं। ऐसे में चुनावी तैयारियों के बीच किसानों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता मिलना स्वाभाविक है।
सीट बंटवारे पर निगाहें
अब सबसे ज्यादा नजर रालोद और एनडीए के बीच संभावित सीट बंटवारे पर रहेगी। केसी त्यागी के बयान के मुताबिक दोनों पक्ष मिलकर चुनाव लड़ने की तैयारी करेंगे। हालांकि, अंतिम सीटों और उम्मीदवारों को लेकर आधिकारिक तस्वीर गठबंधन की बातचीत पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
वहीं दूसरी ओर, सपा भी पश्चिमी यूपी में अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ा रही है। सितंबर 2026 में लोकदल अध्यक्ष चौधरी सुनील सिंह की अखिलेश यादव से मुलाकात और पश्चिमी यूपी की सीटों पर चर्चा ने इस क्षेत्र की राजनीति को और चर्चा में ला दिया था।

