लखीमपुर खीरी में 21,600 कंठों ने गाया वंदे मातरम्, 41 विद्यालयों में गूंजा राष्ट्रगीत
रिपोर्ट- शरद अवस्थी
लखीमपुर खीरी/पलिया कला। वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर देशभर में आयोजित किए जा रहे सामूहिक गायन अभियानों के क्रम में शुक्रवार को लखीमपुर खीरी के पलिया कला में देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता का अनूठा दृश्य देखने को मिला। ‘नमामि भारतम्’ वंदे मातरम् सामूहिक गायन अभियान के तहत सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, पलिया कला के परिसर में सामूहिक वंदे मातरम् गायन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान विद्यालय परिसर में मौजूद करीब 1700 विद्यार्थियों, आचार्यों, अभिभावकों, पूर्व छात्रों और नगरवासियों ने एक साथ राष्ट्रगीत का गायन किया।
कार्यक्रम की विशेष बात यह रही कि सरस्वती विद्या मंदिर, पलिया कला के माध्यम से नगर एवं पोषित ग्रामों के कुल 41 विद्यालयों में करीब 21,600 लोगों ने एक साथ वंदे मातरम् का गायन किया। एक ही समय में बड़ी संख्या में लोगों के राष्ट्रगीत गाने से पूरा वातावरण देशभक्ति की भावना से भर उठा।
41 विद्यालयों में एक साथ हुआ सामूहिक गायन
शुक्रवार को आयोजित इस कार्यक्रम में सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज का परिसर विद्यार्थियों और नागरिकों से भरा रहा। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं के साथ विद्यालय के आचार्य, अभिभावक, पूर्व छात्र-छात्राएं और नगर के गणमान्य नागरिक भी शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में वंदे मातरम् का गायन किया।
इसके साथ ही पलिया कला नगर तथा आसपास के पोषित ग्रामों के 41 विद्यालयों को भी इस अभियान से जोड़ा गया। इन विद्यालयों में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और अन्य लोगों ने सामूहिक रूप से राष्ट्रगीत का गायन किया। इस प्रकार कुल 21,600 कंठों से वंदे मातरम् की गूंज सुनाई दी।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। सामूहिक गायन के माध्यम से जहां विद्यार्थियों को राष्ट्रगीत के इतिहास और महत्व से परिचित कराया गया, वहीं राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति की भावना को भी मजबूत करने का संदेश दिया गया।
वंदे मातरम् स्वतंत्रता संघर्ष की प्रेरणादायी विरासत: रमन सिंह
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि खंड शिक्षा अधिकारी रमन सिंह रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं है, बल्कि यह भारत के स्वतंत्रता संघर्ष, त्याग और बलिदान की प्रेरणादायी विरासत का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत से जुड़ी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और उसके भाव को समझना विशेष रूप से युवाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे वंदे मातरम् के शब्दों के साथ-साथ उसके पीछे निहित राष्ट्रीय भावना और इतिहास को भी समझें। उनके अनुसार, ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को देश की स्वतंत्रता यात्रा और राष्ट्रीय मूल्यों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सलिल अग्रवाल ने बताया वंदे मातरम् का महत्व
कार्यक्रम की अध्यक्षता व्यापारी सलिल अग्रवाल ने की। उन्होंने वंदे मातरम् की पंक्तियों में भारत माता के शक्ति और वात्सल्य स्वरूप के समन्वय को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत की भावनाएं देश के प्रति सम्मान, समर्पण और एकता का संदेश देती हैं।
उन्होंने सामूहिक गायन जैसे आयोजनों को विद्यार्थियों और समाज के बीच राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने वाला माध्यम बताया। साथ ही, कार्यक्रम में शामिल सभी लोगों की भागीदारी की सराहना की।
विद्यार्थियों और अभिभावकों ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा
कार्यक्रम में विद्यार्थियों के साथ अभिभावकों और पूर्व छात्रों की भागीदारी भी रही। इससे आयोजन केवल विद्यालय तक सीमित न रहकर सामाजिक सहभागिता का रूप लेता दिखाई दिया। नगर के गणमान्य नागरिकों और विद्यालय प्रबंध समिति के सदस्यों ने भी कार्यक्रम में उपस्थित होकर विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाया।
वहीं, विद्यालय के प्रधानाचार्य ने कहा कि वंदे मातरम् स्वतंत्रता संग्राम की महत्वपूर्ण विरासत होने के साथ-साथ राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति की भावना का प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि सामूहिक रूप से राष्ट्रगीत का गायन विद्यार्थियों में राष्ट्रीय मूल्यों के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का अवसर प्रदान करता है।
आयोजन में सहयोग करने वालों का जताया आभार
कार्यक्रम के समापन अवसर पर विद्यालय के प्रबंधक शिवपाल सिंह ने मुख्य अतिथि, अध्यक्ष, अभिभावकों, पूर्व छात्रों, विद्यालय प्रबंध समिति, आचार्य परिवार और आयोजन में सहयोग करने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम सामूहिक सहभागिता के माध्यम से समाज को एक सूत्र में जोड़ने का कार्य करते हैं। इसके अलावा, विद्यार्थियों को देश की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय विरासत से परिचित कराने में भी इनका विशेष महत्व है।

