फतेहपुर में तेज हवा और बारिश से धान की फसल प्रभावित, खेतों में खड़ी फसल गिरी, किसानों की बढ़ी चिंता
रिपोर्ट- अशोक सिंह
खागा/फतेहपुर। गुरुवार देर रात से शुक्रवार दिनभर तेज हवा के साथ हुई बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में पककर तैयार खड़ी धान की फसल पर मौसम की मार पड़ने से किसान संभावित नुकसान को लेकर परेशान हैं। तेज हवा के झोंकों के कारण कई खेतों में धान की तैयार फसल जमीन पर गिर गई है। इससे जहां फसल की कटाई प्रभावित होने की आशंका है, वहीं बारिश के कारण दानों की गुणवत्ता और उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।
ऐरायां विकास खंड क्षेत्र के कई गांवों में मौसम का असर खेतों में साफ दिखाई दे रहा है। किसानों के मुताबिक धान की करीब 40 प्रतिशत फसल अभी खेतों में पककर तैयार खड़ी है और उसकी कटाई होना बाकी है। ऐसे में अचानक बदले मौसम ने किसानों की मेहनत पर चिंता की स्थिति पैदा कर दी है। किसान अब लगातार आसमान की ओर नजर बनाए हुए हैं और मौसम साफ होने की उम्मीद कर रहे हैं।
तेज हवा से खेतों में बिछी धान की फसल
कोड़ारवर गांव निवासी किसान राम गोपाल दुबे, बरसाती पटेल, उदय सिंह पटेल तथा कंचन पटेल बढाईय्यापुर समेत क्षेत्र के अन्य किसानों ने बताया कि पिछले कुछ समय से धान की फसल कटाई के लिए तैयार हो रही थी। किसानों को उम्मीद थी कि मौसम सामान्य रहने पर जल्द ही फसल की कटाई कर उसे सुरक्षित कर लिया जाएगा। हालांकि, तेज हवा और बारिश ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।
किसानों का कहना है कि विशेष रूप से बासमती धान की फसल पर तेज हवा का अधिक प्रभाव पड़ा है। बासमती धान के पौधों की लंबाई अधिक होने के कारण तेज हवा के झोंकों में उनके गिरने की संभावना बढ़ जाती है। यही वजह है कि कई खेतों में पककर तैयार धान की फसल जमीन पर बिछ गई है।
इसके अलावा जमीन पर गिरी हुई फसल के लगातार बारिश में भीगने से दानों की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है। यदि खेत में पानी अधिक समय तक बना रहा तो किसानों को कटाई और फसल को सुरक्षित करने में अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
करीब 40 प्रतिशत फसल की कटाई अभी बाकी
किसानों के अनुसार क्षेत्र में धान की बड़ी मात्रा अभी खेतों में खड़ी है। लगभग 40 प्रतिशत फसल ऐसी बताई जा रही है, जिसकी कटाई होना बाकी है। ऐसे में मौसम का मौजूदा मिजाज किसानों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
किसानों का कहना है कि तैयार फसल को समय पर काट लेना जरूरी है, लेकिन बारिश और तेज हवा के कारण खेतों में पहुंचकर कटाई करना भी मुश्किल हो रहा है। वहीं, यदि मौसम साफ नहीं हुआ तो खेतों में गिरी फसल को नुकसान बढ़ने की आशंका बनी रहेगी।किसानों ने उम्मीद जताई है कि जल्द मौसम साफ होगा और धूप निकलने के बाद खेतों में नमी कम होगी। इसके बाद वे तेजी से कटाई कर तैयार फसल को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।
केले की फसल पर भी पड़ा तेज हवा का असर
धान के साथ-साथ क्षेत्र में केले की खेती करने वाले किसानों की चिंता भी बढ़ गई है। लाडलेपुर, लाठी और टिकरी सहित आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर केले की खेती की जाती है। लाडलेपुर निवासी शाहिद तथा लाठी-टिकरी क्षेत्र के अफाक ने बताया कि तेज हवा के कारण केले की फसल को भी नुकसान पहुंचा है।
केले के पौधे तेज हवा के झोंकों को लंबे समय तक सहन नहीं कर पाते। हवा की गति बढ़ने पर कई स्थानों पर केले के पौधों के गिरने और उनकी पत्तियां क्षतिग्रस्त होने की स्थिति सामने आई है। जिन पौधों में फल लगे हुए हैं, उनके गिरने से किसानों को आर्थिक नुकसान हो सकता है।
किसानों के मुताबिक केले की फसल में पौधों के गिरने के बाद उन्हें दोबारा खड़ा करना आसान नहीं होता। वहीं, क्षतिग्रस्त पत्तियों का असर पौधे के विकास और फल की गुणवत्ता पर भी पड़ सकता है। इसलिए धान के साथ केला उत्पादक किसान भी मौसम के जल्द सामान्य होने की उम्मीद कर रहे हैं।
किसानों की निगाहें अब आसमान पर
लगातार बारिश और तेज हवा के चलते क्षेत्र के किसानों की निगाहें अब मौसम पर टिकी हुई हैं। किसानों का कहना है कि इस समय खेतों में तैयार फसल को सुरक्षित करना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। यदि मौसम साफ रहा तो वे जल्द से जल्द धान और अन्य तैयार फसलों की कटाई पूरी करने का प्रयास करेंगे।
वहीं, किसानों को आशंका है कि यदि बारिश और तेज हवा का सिलसिला आगे भी जारी रहा तो खेतों में खड़ी तथा गिरी हुई फसलों को अतिरिक्त नुकसान हो सकता है। इसलिए किसान मौसम साफ होने की प्रार्थना कर रहे हैं, ताकि तैयार फसल को समय रहते सुरक्षित किया जा सके।

