हमीरपुर जिला अस्पताल में 55 दिन के मासूम की मौत, परिजनों ने इलाज में देरी का लगाया आरोप

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रिपोर्ट- मो. अकरम

हमीरपुर। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले से एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। यहां जिला अस्पताल में 55 दिन के एक मासूम की मौत के बाद परिवार में हड़कंप मच गया। परिजनों ने अस्पताल की उपचार व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए इलाज में देरी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि टीकाकरण के बाद मासूम की तबीयत बिगड़ गई थी और उसे उपचार के लिए जिला अस्पताल लाया गया, लेकिन समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण उसकी जान चली गई।

मामला हमीरपुर स्थित दीवान शत्रुघ्न सिंह जिला अस्पताल से जुड़ा है। घटना की जानकारी सामने आने के बाद प्रशासन में भी हलचल मच गई। जिलाधिकारी ने जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण किया और मामले का संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। अब जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मासूम की मौत की वास्तविक वजह क्या थी और अस्पताल में उपचार के दौरान निर्धारित चिकित्सकीय प्रक्रिया का पालन हुआ था या नहीं।

टीकाकरण के दो दिन बाद बिगड़ी तबीयत

परिजनों के मुताबिक, 55 दिन के मासूम का टीकाकरण कराया गया था। इसके करीब दो दिन बाद उसकी तबीयत खराब होने लगी। परिवार का कहना है कि बच्चे की हालत बिगड़ने पर उन्होंने उसे उपचार के लिए जिला अस्पताल पहुंचाया। परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल पहुंचने के बाद बच्चे को तत्काल आवश्यक उपचार नहीं मिल सका।

हालांकि, अभी तक बच्चे की मौत को टीकाकरण से सीधे जोड़ने वाला कोई आधिकारिक चिकित्सकीय निष्कर्ष सामने नहीं आया है। इसलिए इस संबंध में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच रिपोर्ट का इंतजार करना जरूरी है। विशेषज्ञ जांच के माध्यम से ही यह पता चल सकेगा कि बच्चे की तबीयत बिगड़ने के पीछे क्या चिकित्सकीय कारण था।

परिजनों ने इलाज में देरी का लगाया आरोप

मासूम के परिवार का आरोप है कि जब बच्चे की हालत गंभीर हुई तो वे उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे थे। परिजनों के अनुसार, उस समय बच्चे को तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता थी, लेकिन उपचार में कथित देरी हुई। उनका दावा है कि समय पर इलाज मिल जाता तो बच्चे की जान बचाई जा सकती थी।

परिजनों के इन आरोपों के बाद जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि अस्पताल की ओर से बच्चे को किस समय देखा गया, कौन-कौन से उपचार या जांच किए गए और उस दौरान बच्चे की चिकित्सकीय स्थिति क्या थी। इन सभी बिंदुओं की जानकारी जांच के बाद ही सामने आने की उम्मीद है।

जिलाधिकारी ने लिया मामले का संज्ञान

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी अस्पताल के औचक निरीक्षण के लिए पहुंचे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने घटना की जानकारी ली और संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की जानकारी प्राप्त की। इसके बाद जिलाधिकारी ने मामले की जांच कराने के निर्देश दिए।

प्रशासन की ओर से जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि मासूम को अस्पताल पहुंचने के बाद किस प्रकार की चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई और उपचार में किसी स्तर पर लापरवाही या देरी हुई थी या नहीं। साथ ही, बच्चे की मौत के वास्तविक कारणों को भी जांच के माध्यम से स्पष्ट किया जाएगा।

जांच रिपोर्ट के बाद सामने आएगी तस्वीर

इस घटना के बाद अब सबसे बड़ा सवाल मासूम की मौत की वास्तविक वजह को लेकर है। परिवार की ओर से जहां टीकाकरण के बाद तबीयत बिगड़ने और अस्पताल में इलाज में देरी के आरोप लगाए गए हैं, वहीं इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

चिकित्सकीय मामलों में किसी उपचार या टीकाकरण के बाद हुई घटना को सीधे तौर पर उसी प्रक्रिया का परिणाम मानना उचित नहीं होता। इसके लिए बच्चे की मेडिकल हिस्ट्री, टीकाकरण का रिकॉर्ड, अस्पताल में पहुंचने का समय, चिकित्सकीय जांच, दिए गए उपचार और अन्य मेडिकल दस्तावेजों का परीक्षण जरूरी होता है। इसलिए प्रशासनिक जांच के साथ-साथ उपलब्ध चिकित्सकीय रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

स्वास्थ्य सेवाओं पर फिर उठे सवाल

हमीरपुर जिला अस्पताल में सामने आई इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में आपात स्थिति के दौरान त्वरित चिकित्सा व्यवस्था को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। इससे पहले भी जिला अस्पतालों में मरीजों की भीड़ और चिकित्सकीय सेवाओं से जुड़ी व्यवस्थाओं को लेकर खबरें सामने आती रही हैं। हाल ही में हमीरपुर जिला अस्पताल में बड़ी संख्या में मरीजों के पहुंचने की खबर भी सामने आई थी, जहां ओपीडी में मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण उन्हें इंतजार करना पड़ा था।

ऐसे में इस मामले की जांच से न केवल मासूम की मौत के कारणों का पता चलेगा, बल्कि यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि अस्पताल में गंभीर हालत वाले बच्चों के लिए तत्काल उपचार की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।

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