यूपीएओईकॉन 2026 में लाइव सर्जरी से छात्रों ने सीखी ईएनटी उपचार की आधुनिक तकनीकें

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रिपोर्ट – हरि शंकर शर्मा

कानपुर। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, कानपुर के नाक, कान एवं गला रोग विभाग की ओर से आयोजित 43वीं यूपीएओईकॉन-2026 के दूसरे दिन शुक्रवार को विभिन्न शैक्षणिक सत्रों, विशेषज्ञ व्याख्यानों, इंस्ट्रक्शनल कोर्स और लाइव सर्जरी का आयोजन किया गया। सम्मेलन में देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे वरिष्ठ ईएनटी विशेषज्ञों ने आधुनिक चिकित्सा तकनीकों, जटिल सर्जिकल प्रक्रियाओं और मरीजों के उपचार से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। खास बात यह रही कि लाइव सर्जरी के माध्यम से चिकित्सा विद्यार्थियों और प्रतिभागियों को ऑपरेशन की बारीकियों को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिला।

सम्मेलन के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि ईएनटी चिकित्सा क्षेत्र में लगातार नई तकनीकें विकसित हो रही हैं। ऐसे में चिकित्सकों और मेडिकल छात्रों के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण का महत्व और बढ़ जाता है। इसी उद्देश्य से यूपीएओईकॉन में लाइव सर्जिकल प्रदर्शन और विशेषज्ञों के साथ संवाद को विशेष स्थान दिया गया।

फेशियल नर्व पाल्सी पर विशेषज्ञों ने साझा की जानकारी

कार्यक्रम के दूसरे दिन ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. हरेन्द्र कुमार के साथ विनय ने आघात के कारण होने वाली फेशियल नर्व पाल्सी और इसके आधुनिक उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी। विशेषज्ञों ने बताया कि चेहरे की नसों से संबंधित समस्याओं में समय पर जांच, सही उपचार पद्धति और मरीज की स्थिति के अनुसार सर्जिकल एवं अन्य उपचार विकल्पों का चयन महत्वपूर्ण होता है।

इसके साथ ही प्रतिभागियों को ऐसे मामलों के प्रबंधन से जुड़ी आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने अपने अनुभवों के आधार पर चिकित्सकों को उपचार के दौरान आने वाली विभिन्न चुनौतियों और उनके समाधान के बारे में भी बताया।

लाइव सर्जरी में जटिल प्रक्रियाओं का प्रदर्शन

सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण लाइव सर्जिकल सत्र रहा। वरिष्ठ ईएनटी सर्जन डॉ. सतीश जैन ने लाइव सर्जरी के माध्यम से नाक, कान और थायरॉइड से संबंधित विभिन्न ऑपरेशन की प्रक्रियाओं का प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रतिभागियों को सर्जरी की तैयारी से लेकर ऑपरेशन की प्रमुख तकनीकों तक की जानकारी दी गई।

विशेष रूप से प्लास्टिक एवं पुनर्निर्माण शल्यक्रिया तथा सीएसएफ राइनोरिया की एंडोस्कोपिक सर्जरी जैसी जटिल प्रक्रियाओं का प्रदर्शन किया गया। एंडोस्कोपिक तकनीक के माध्यम से ऐसी सर्जरी के दौरान विशेषज्ञों द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं को प्रतिभागियों ने करीब से समझा। लाइव सर्जरी का उद्देश्य केवल तकनीक का प्रदर्शन करना ही नहीं, बल्कि चिकित्सकों और छात्रों को वास्तविक परिस्थितियों में निर्णय लेने की प्रक्रिया से परिचित कराना भी रहा।

टायम्पेनोस्क्लेरोसिस और सुनने की समस्या पर चर्चा

मुंबई से आए विशेषज्ञ डॉ. आसिम देसाई ने कान में होने वाली टायम्पेनोस्क्लेरोसिस और इससे उत्पन्न होने वाली श्रवण संबंधी समस्याओं के उपचार पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने बीमारी की पहचान, उपचार के विकल्पों और मरीजों की श्रवण क्षमता को बेहतर बनाने से जुड़े पहलुओं पर चर्चा की।

इस दौरान प्रतिभागियों को कान से जुड़ी जटिल स्थितियों के उपचार में आधुनिक तकनीकों की भूमिका के बारे में भी जानकारी मिली। विशेषज्ञों ने जोर दिया कि सही निदान और मरीज की स्थिति के अनुरूप उपचार योजना तैयार करना ईएनटी चिकित्सा में महत्वपूर्ण है।

मास्टॉइड सर्जरी के बाद मरीजों के पुनर्वास पर जानकारी

बेंगलुरु से आए डॉ. सतीश जैन ने मास्टॉइड सर्जरी के बाद सामने आने वाली संभावित समस्याओं और मरीजों के पुनर्वास के विषय में जानकारी दी। उन्होंने सर्जरी के बाद मरीज की नियमित निगरानी, आवश्यक चिकित्सा देखभाल और पुनर्वास प्रक्रिया के महत्व को समझाया।

विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी सर्जरी के बाद उपचार की निरंतरता और मरीज की स्थिति की निगरानी महत्वपूर्ण होती है। इसलिए चिकित्सकों को ऑपरेशन के साथ-साथ पोस्ट-ऑपरेटिव केयर की आधुनिक प्रक्रियाओं की जानकारी होना भी आवश्यक है।

कॉक्लियर इम्प्लांट पर विशेषज्ञ पैनल चर्चा

दिन के अंतिम सत्र में कॉक्लियर इम्प्लांट को लेकर विशेषज्ञ पैनल चर्चा आयोजित की गई। इसमें लखनऊ के डॉ. रोहित मेहरोत्रा, गोरखपुर के डॉ. रामानंद यादव, डॉ. विशम्भर सहित विभिन्न वरिष्ठ कान रोग विशेषज्ञों ने भाग लिया।

पैनल चर्चा में कॉक्लियर इम्प्लांट के लिए मरीज के चयन, सर्जरी की प्रक्रिया, मैपिंग और ऑपरेशन के बाद आवश्यक श्रवण एवं वाणी पुनर्वास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार साझा किए गए। विशेषज्ञों ने बताया कि कॉक्लियर इम्प्लांट की सफलता के लिए केवल सर्जरी ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऑपरेशन के बाद की नियमित देखभाल और श्रवण-वाणी पुनर्वास भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मेडिकल छात्रों के लिए उपयोगी रहा सम्मेलन

यूपीएओईकॉन-2026 के दूसरे दिन आयोजित शैक्षणिक कार्यक्रमों ने मेडिकल छात्रों, युवा चिकित्सकों और ईएनटी विशेषज्ञों को आधुनिक उपचार तकनीकों को समझने का अवसर प्रदान किया। लाइव सर्जरी के साथ विशेषज्ञ व्याख्यान और पैनल चर्चा ने प्रतिभागियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक जानकारी भी दी।

इस तरह सम्मेलन में नाक, कान और गले से संबंधित विभिन्न रोगों के आधुनिक उपचार, सर्जिकल तकनीकों और मरीजों के पुनर्वास पर व्यापक चर्चा हुई। साथ ही, विशेषज्ञों के अनुभवों के आदान-प्रदान से युवा चिकित्सकों को ईएनटी क्षेत्र में विकसित हो रही नई तकनीकों और उपचार पद्धतियों को समझने में मदद मिली।

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