जेआईसीए के सहयोग से प्रभावी वन प्रबंधन परियोजना पर क्षमता संवर्धन कार्यशाला
Digital UP News Desk
नई दिल्ली। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने नई दिल्ली में जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जेआईसीए) के सहयोग से आयोजित ‘प्रभावी वन प्रबंधन परियोजना के लिए क्षमता संवर्धन’ विषयक कार्यशाला का शुभारंभ किया। इस कार्यशाला का उद्देश्य देश में वन एवं वन्यजीव प्रबंधन से जुड़े अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों की क्षमताओं को मजबूत करना और बदलती पर्यावरणीय चुनौतियों के अनुरूप प्रशिक्षण एवं तकनीकी व्यवस्था को बेहतर बनाना है।
कार्यशाला में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ जेआईसीए इंडिया के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसके अलावा विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वन विभागों, भारतीय अनुसंधान संस्थानों तथा वानिकी क्षेत्र से जुड़े केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। इस दौरान वन प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता संरक्षण और आधुनिक तकनीकों के उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।
वन कर्मियों की क्षमता बढ़ाने पर जोर
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने अपने संबोधन में कहा कि वन देश की पारिस्थितिकी, जैव विविधता और वन-आश्रित समुदायों की आजीविका के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच वन क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों की क्षमता को लगातार विकसित करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि क्षमता निर्माण केवल कक्षा आधारित प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसके बजाय आधुनिक तकनीकों, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और जमीनी स्तर पर अपनाई जा रही सफल कार्यप्रणालियों को प्रशिक्षण का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। साथ ही, स्थानीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान और उनके अनुभवों को भी उचित महत्व दिया जाना चाहिए।
मंत्री ने क्षेत्र-विशिष्ट क्षमता निर्माण मॉड्यूल विकसित करने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उनके अनुसार, अलग-अलग क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियां, स्थानीय चुनौतियां और वन प्रबंधन की आवश्यकताएं अलग हो सकती हैं। इसलिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप तैयार किया जाना चाहिए।
वनाग्नि प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन पर फोकस
भूपेंद्र यादव ने वनाग्नि प्रबंधन को वैश्विक चुनौती बताते हुए कहा कि प्रस्तावित परियोजना इस क्षेत्र में तकनीकी और जमीनी स्तर की क्षमताओं को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसके साथ ही जैव विविधता संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए भी आधुनिक तकनीकों और बेहतर प्रबंधन पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता है।
उन्होंने परियोजना के तहत अनुसंधान एवं विकास को मजबूत करने, व्यावहारिक तकनीकी समाधान तैयार करने तथा नई तकनीकों के जमीनी उपयोग के लिए पायलट परियोजनाएं संचालित करने पर जोर दिया। इसके अलावा प्रशिक्षण संस्थानों की क्षमता बढ़ाने और विभिन्न देशों के साथ बेहतर कार्यप्रणालियों को साझा करने की दिशा में भी काम किया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि पारंपरिक ज्ञान, वैज्ञानिक अनुसंधान और उभरती प्रौद्योगिकियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करके वन प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। इसके परिणामस्वरूप जमीनी स्तर पर वन संरक्षण और प्रबंधन से जुड़े कार्यों को नई दिशा मिल सकती है।
537.10 करोड़ रुपये की परियोजना
मंत्रालय के एडीजी (वन्यजीव) रमेश पांडे ने परियोजना की जानकारी देते हुए बताया कि क्षमता संवर्धन परियोजना का कुल परिव्यय 537.10 करोड़ रुपये है। इसमें जेआईसीए की ओर से 440.42 करोड़ रुपये और भारत सरकार की ओर से 96.68 करोड़ रुपये का योगदान शामिल है।
यह परियोजना वर्ष 2025-26 से 2031-32 तक सात वर्षों में लागू की जाएगी। परियोजना के दायरे में भारत के सभी राज्य शामिल होंगे। नए भागीदार राज्यों को प्राथमिकता देने के साथ उन राज्यों को भी सहायता दी जाएगी, जो पहले से संबंधित जेआईसीए परियोजनाओं में शामिल रहे हैं।
इस परियोजना का उद्देश्य वन एवं वन्यजीव प्रबंधन की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप अग्रिम पंक्ति के वन कर्मियों को बेहतर प्रशिक्षण और तकनीकी ज्ञान उपलब्ध कराना है। साथ ही, अनुसंधान के परिणामों को प्रशिक्षण और टिकाऊ वन प्रबंधन की व्यावहारिक पद्धतियों में बदलने पर भी जोर दिया जाएगा।
भारत-जापान सहयोग को मिलेगा विस्तार
जेआईसीए इंडिया कार्यालय के वरिष्ठ प्रतिनिधि एइजी वाकामात्सु ने कहा कि यह परियोजना भारतीय और जापानी अनुसंधान संस्थानों को एक मंच पर लाने का अवसर प्रदान करेगी। इसके माध्यम से वन प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन और क्षमता निर्माण जैसी वैश्विक चुनौतियों के समाधान विकसित करने की दिशा में सहयोग को आगे बढ़ाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि वानिकी क्षेत्र में भारत और जेआईसीए की साझेदारी करीब तीन दशकों से जारी है और इस सहयोग से अब तक सात लाख से अधिक लोगों को लाभ पहुंचा है। परियोजना के दूसरे चरण में लकड़ी प्रसंस्करण, आजीविका सृजन, वन प्रबंधन में डिजिटल परिवर्तन और सहयोगात्मक अकादमिक अनुसंधान जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जेआईसीए सतत वन प्रबंधन और क्षमता निर्माण के लिए केंद्र तथा राज्य सरकारों के साथ अपने सहयोग को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
परियोजना विवरणिका का विमोचन
कार्यशाला के दौरान परियोजना की विवरणिका का भी विमोचन किया गया। इसमें परियोजना के प्रमुख उद्देश्यों, गतिविधियों और सहयोग के क्षेत्रों की जानकारी दी गई है। तकनीकी सत्र में मंत्रालय की ओर से परियोजना के उद्देश्यों और कार्यक्षेत्र पर प्रस्तुति दी गई।
इसके बाद जेआईसीए प्रतिनिधियों ने परियोजना को लेकर अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। राज्यों के वन विभागों, अनुसंधान संस्थानों और केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ संवादात्मक सत्र भी आयोजित किया गया।

