कानपुर में आलू किसानों का प्रदर्शन, उचित दाम और नई आलू नीति की मांग

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रिपोर्टर/ हनुमंत सिंह पिंटू
कानपुर।
उत्तर प्रदेश में लगातार दो वर्षों से आलू की फसल का उचित मूल्य नहीं मिलने से परेशान किसानों, आढ़तियों और शीतगृह स्वामियों ने शुक्रवार को कानपुर में जोरदार प्रदर्शन किया। ‘किसान आन्दोलन’ के बैनर तले आयोजित इस प्रदर्शन का नेतृत्व संगठन के प्रदेश अध्यक्ष अजय अनमोल ने किया। प्रदर्शनकारियों ने आलू किसानों की समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन कानपुर मंडल के आयुक्त को सौंपा और सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।

आंदोलनकारियों का कहना है कि प्रदेश के कई जिलों में आलू उत्पादक किसान लगातार आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। विशेष रूप से फर्रुखाबाद समेत आलू उत्पादन वाले क्षेत्रों में किसानों को उनकी उपज का लागत के अनुरूप मूल्य नहीं मिल पा रहा है। परिणामस्वरूप कई किसान कर्ज के बोझ में दबते जा रहे हैं और आगामी फसल की तैयारी को लेकर भी उनके सामने आर्थिक चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

दो साल से उचित भाव नहीं मिलने का आरोप

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आलू उत्पादन में बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई, मजदूरी, परिवहन और शीतगृह में भंडारण जैसी लागत लगातार बढ़ रही है। इसके बावजूद बाजार में आलू का अपेक्षित मूल्य नहीं मिलने से किसानों की आमदनी प्रभावित हुई है। किसानों के मुताबिक, यदि उत्पादन लागत के अनुपात में उपज का मूल्य नहीं मिलता है तो खेती करना उनके लिए आर्थिक रूप से मुश्किल होता जा रहा है।

आंदोलनकारियों ने सरकार की पूर्व की आलू खरीद व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि सरकार ने 22 लाख मीट्रिक टन आलू 605 रुपये 9 पैसे प्रति क्विंटल की दर से खरीदने का निर्णय लिया था। इसके लिए फर्रुखाबाद मंडी समेत प्रदेश में 35 क्रय केंद्र खोले गए थे। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इन केंद्रों को संचालित करने पर सरकारी धन खर्च हुआ, लेकिन किसानों से एक किलो आलू की भी खरीद नहीं की गई।

किसान संगठनों का कहना है कि यदि सरकारी खरीद की व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती तो बाजार में कीमतों पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती थी। इसलिए अब वे सरकार से ऐसी व्यवस्था बनाने की मांग कर रहे हैं, जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित और स्थिर मूल्य मिल सके।

‘आलू किसान बचाओ आंदोलन’ के तहत उठाई मांगें

किसानों ने अपनी समस्याओं के समाधान के लिए ‘आलू किसान बचाओ आंदोलन’ शुरू करने की बात कही है। संगठन की ओर से सरकार के सामने कई प्रमुख मांगें रखी गई हैं। सबसे प्रमुख मांग आलू किसानों के लिए एक व्यापक और स्थायी नीति बनाने की है।

संगठन के अनुसार, सरकार को ऐसी आलू नीति बनानी चाहिए, जिसमें उत्पादन लागत का कम से कम डेढ़ गुना न्यूनतम मूल्य सुनिश्चित किया जाए। इससे किसानों को बाजार में कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव से कुछ राहत मिल सकती है।

इसके अलावा किसानों ने शीतगृहों में भंडारित आलू का पूरा भंडारण शुल्क सरकार द्वारा वहन किए जाने की मांग की है। किसानों का कहना है कि कम बाजार भाव की स्थिति में लंबे समय तक आलू को कोल्ड स्टोरेज में रखने पर भंडारण खर्च भी बढ़ता जाता है। ऐसे में किसानों पर दोहरी आर्थिक मार पड़ती है।

मंडी टैक्स खत्म करने की मांग

आंदोलनकारियों ने उत्तर प्रदेश में आलू पर लगने वाले मंडी टैक्स को तत्काल समाप्त करने की मांग भी उठाई है। उनका तर्क है कि अन्य राज्यों में किसानों को राहत देने के लिए विभिन्न स्तरों पर शुल्क संबंधी व्यवस्थाओं में बदलाव किए गए हैं। इसी तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी आलू किसानों को राहत दी जानी चाहिए।

इसके साथ ही संगठन ने अलग-अलग किस्म के आलू के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने की मांग रखी है। संगठन के अनुसार हाइब्रिड आलू का MSP 1,000 रुपये प्रति क्विंटल और चिप्सोना/हॉलैंड यानी प्रोसेसिंग क्वालिटी आलू का MSP 1,500 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया जाना चाहिए।

किसानों ने यह भी मांग की है कि यदि बाजार भाव सरकार द्वारा निर्धारित मूल्य से नीचे चला जाता है तो किसानों को अंतर की राशि उपलब्ध कराने के लिए भावान्तर योजना लागू की जाए। इससे बाजार में कीमत गिरने की स्थिति में किसानों को सीधे आर्थिक राहत मिल सकेगी।

रेल परिवहन का भाड़ा फ्री करने की मांग

आलू की मांग बढ़ाने के लिए किसानों ने घरेलू मंडियों तक उपज पहुंचाने की व्यवस्था को भी आसान बनाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि मौजूदा संकट समाप्त होने तक देशभर में आलू के रेल परिवहन का भाड़ा पूरी तरह मुफ्त किया जाना चाहिए।

किसान नेताओं के अनुसार, यदि आलू को कम लागत पर उन राज्यों और मंडियों तक पहुंचाया जा सके जहां इसकी मांग अधिक है, तो किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर बाजार मिल सकता है। इससे एक ओर मंडियों में आलू की उपलब्धता बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर उत्पादन वाले क्षेत्रों में कीमतों पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।

सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

प्रदर्शन के दौरान किसानों, आढ़तियों और शीतगृह स्वामियों ने एक स्वर में कहा कि आलू क्षेत्र से जुड़े सभी पक्षों को राहत देने के लिए सरकार को तत्काल कदम उठाने चाहिए। किसानों का कहना है कि समस्या केवल एक सीजन तक सीमित नहीं है, बल्कि लगातार कम कीमत मिलने से इसका असर उनकी आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है।

ज्ञापन के माध्यम से आंदोलनकारियों ने सरकार से आलू खरीद व्यवस्था को प्रभावी बनाने, किसानों को उचित मूल्य दिलाने और भंडारण से जुड़ी लागत कम करने सहित विभिन्न मांगों पर जल्द निर्णय लेने की अपील की।

फिलहाल किसानों की नजर सरकार की आगामी कार्रवाई पर है। यदि उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता है तो आंदोलन को आगे बढ़ाने की रणनीति पर भी विचार किया जा सकता है। हालांकि, किसानों की ओर से उठाई गई मांगों और सरकार की ओर से उन पर संभावित कार्रवाई के बीच अंतिम निर्णय संबंधित विभागों द्वारा लिया जाना है।

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