कानपुर में सपा युवजन सभा ने SIR को लेकर राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन, CEC पर कार्रवाई की मांग

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रिपोर्ट – हनुमंत सिंह पिंटू

कानपुर। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और डिजिटल मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया को लेकर कानपुर में समाजवादी युवजन सभा ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजा है। संगठन ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और डेटा सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका की जांच की मांग की है। युवजन सभा ने आरोप लगाया कि यदि मतदाता सूची तैयार करने या संशोधित करने की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं सामने आती हैं तो इसके लिए जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

समाजवादी युवजन सभा कानपुर महानगर के अध्यक्ष एवं अधिवक्ता अर्पित त्रिवेदी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने यह ज्ञापन कानपुर मंडल के अधिकारियों के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजा। संगठन ने ज्ञापन में चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता, मतदाताओं के अधिकार और मतदाता सूची में नामों की शुद्धता सुनिश्चित करने की मांग उठाई।

SIR और डिजिटल प्रक्रिया को लेकर उठाए सवाल

युवजन सभा का कहना है कि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, क्योंकि इसके आधार पर मतदाताओं के नाम, पते और अन्य विवरणों का सत्यापन किया जाता है। संगठन ने आरोप लगाया कि SIR के दौरान डेटा मिलान और डिजिटल पंजीकरण से जुड़ी कुछ प्रक्रियाओं में विसंगतियां सामने आई हैं।

हालांकि, निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर मतदाताओं के लिए नाम खोजने, मतदाता सूची में सुधार, पंजीकरण और प्रस्तावित नाम हटाने पर आपत्ति दर्ज करने जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। आयोग की ओर से SIR से संबंधित जानकारी और मतदाता सेवाओं के लिए डिजिटल व्यवस्था भी उपलब्ध कराई गई है।

14 आपत्तियों की अनदेखी का लगाया आरोप

ज्ञापन में समाजवादी युवजन सभा ने दावा किया कि चुनाव आयोग के दो अन्य आयुक्तों की ओर से करीब 10 महीने की अवधि में 14 बार आपत्तियां दर्ज कराई गईं, लेकिन संगठन के अनुसार इन आपत्तियों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया।

युवजन सभा ने इन दावों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। संगठन का कहना है कि चुनाव से जुड़ी संवैधानिक संस्था में लिए जाने वाले महत्वपूर्ण निर्णयों में पारदर्शिता और संस्थागत प्रक्रिया का पालन होना आवश्यक है।

CEC के खिलाफ कार्रवाई की मांग

ज्ञापन में संगठन ने मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका की जांच कराने तथा कथित अनियमितताओं की जिम्मेदारी तय करने की मांग की। युवजन सभा ने मांग रखी कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाए।

संगठन ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने और महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल की है। यह मांग फिलहाल समाजवादी युवजन सभा की ओर से रखी गई राजनीतिक मांग है; इसे किसी स्थापित तथ्य या जांच के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।

बिना सुनवाई मतदाता का नाम न हटाने की मांग

युवजन सभा ने यह भी मांग की कि किसी भी वैध मतदाता का नाम केवल डिजिटल डेटा मिलान में सामने आई विसंगति के आधार पर नहीं हटाया जाए। संगठन के अनुसार, यदि किसी मतदाता के रिकॉर्ड में कोई अंतर मिलता है तो संबंधित व्यक्ति को जानकारी स्पष्ट करने और अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए।

इस संबंध में निर्वाचन आयोग की प्रक्रियाओं में दावे और आपत्तियां दर्ज करने तथा संबंधित मामलों की जांच और सुनवाई के प्रावधान मौजूद हैं। आयोग की SIR संबंधी जानकारी में भी नोटिस, सुनवाई और सत्यापन की प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है।

दिल्ली के मतदाता रिकॉर्ड का भी दिया हवाला

ज्ञापन में दिल्ली में SIR के दौरान सामने आई मतदाता रिकॉर्ड से जुड़ी विसंगतियों का भी हवाला दिया गया। हालिया रिपोर्टों के अनुसार दिल्ली में बड़ी संख्या में मतदाताओं के रिकॉर्ड में अंतर पाए जाने के बाद नोटिस जारी किए गए हैं। रिपोर्टों में यह भी बताया गया कि कई प्रमुख व्यक्तियों के रिकॉर्ड में भी विसंगतियां मिलीं।

हालांकि, निर्वाचन अधिकारियों की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि SIR से संबंधित नोटिस मिलने का अर्थ अपने आप मतदाता सूची से नाम हटना नहीं है। संबंधित विवरणों के सत्यापन और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अंतिम स्थिति तय होती है।

राष्ट्रपति से निष्पक्ष जांच की मांग

समाजवादी युवजन सभा ने राष्ट्रपति से पूरे मामले का संज्ञान लेकर संबंधित संवैधानिक संस्थाओं से तथ्यात्मक रिपोर्ट मंगाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि मतदाता सूची में किसी भी प्रकार की त्रुटि का असर नागरिकों के मतदान के अधिकार पर पड़ सकता है, इसलिए पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए।

साथ ही, युवजन सभा ने मांग की कि मतदाता सूची में सुधार अथवा सत्यापन के दौरान नागरिकों को पर्याप्त सूचना और अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए। संगठन के अनुसार, डिजिटल प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ-साथ उन लोगों के लिए भी व्यवस्था होनी चाहिए जिन्हें ऑनलाइन प्रक्रिया में कठिनाई होती है।

कानपुर में चुनावी प्रक्रिया को लेकर बढ़ी राजनीतिक सक्रियता

गौरतलब है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण और SIR को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से समय-समय पर सवाल और मांगें सामने आती रही हैं। ऐसे में कानपुर में समाजवादी युवजन सभा का यह ज्ञापन भी इसी व्यापक राजनीतिक बहस का हिस्सा है।

निर्वाचन आयोग के आधिकारिक मतदाता पोर्टल पर नागरिक अपना नाम मतदाता सूची में खोज सकते हैं और पंजीकरण या विवरण में सुधार से संबंधित सेवाओं का उपयोग कर सकते हैं। आयोग मतदाताओं को अपने नाम और विवरण की जांच करने की सलाह देता है।

अब देखना होगा कि समाजवादी युवजन सभा की ओर से राष्ट्रपति को भेजे गए ज्ञापन पर संबंधित स्तर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है। फिलहाल संगठन ने SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता, मतदाताओं को सुनवाई का अवसर और कथित अनियमितताओं की जांच को अपनी प्रमुख मांगों में शामिल किया है।

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