सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व की मांग, आजाद समाज पार्टी-भीम आर्मी ने जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन

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रिपोर्ट – धर्मेंद्र पाण्डे

सोनभद्र। अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), महिलाओं तथा अन्य वंचित वर्गों के सामाजिक न्याय, समान अवसर और उचित प्रतिनिधित्व की मांग को लेकर आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) और भीम आर्मी की ओर से 24 सितंबर 2026 को ‘संपूर्ण भागीदारी आंदोलन’ आयोजित किया गया। आंदोलन के तहत जिला मुख्यालय पर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर विभिन्न मांगों को उठाया गया। देश के अन्य हिस्सों में भी दोनों संगठनों की ओर से जिला स्तर पर ज्ञापन दिए जाने की खबरें सामने आई हैं।

ज्ञापन में कहा गया कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को समानता और समान अवसर का अधिकार देता है। इसके बावजूद सामाजिक और ऐतिहासिक रूप से वंचित वर्गों के प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दे अभी भी सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा हैं। संगठन की ओर से शिक्षा, रोजगार, राजनीति, प्रशासन, न्यायपालिका और निर्णय लेने वाली संस्थाओं में SC, ST और OBC समेत अन्य वंचित वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग की गई।

आरक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग

आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी की ओर से दिए गए ज्ञापन में कहा गया कि आरक्षण को केवल आर्थिक स्थिति के आधार पर देखने के बजाय सामाजिक और शैक्षणिक वंचना तथा प्रतिनिधित्व के संदर्भ में भी समझा जाना चाहिए। संगठनों ने आरक्षित वर्गों के लिए निर्धारित पदों के प्रभावी क्रियान्वयन, रिक्त आरक्षित पदों की भर्ती और बैकलॉग पदों को भरने की मांग रखी।

ज्ञापन में यह भी कहा गया कि सरकारी संस्थानों और सेवाओं में आरक्षण से जुड़े प्रावधानों का प्रभावी पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि पात्र वर्गों को संवैधानिक व्यवस्था के तहत मिलने वाले अवसर प्राप्त हो सकें। इसके साथ ही SC, ST और OBC वर्गों की शिक्षा तथा रोजगार के क्षेत्र में भागीदारी बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की गई।

महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण की मांग

आंदोलन में महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। संगठन ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023’ के तहत महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने की मांग की। इसके साथ ही दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षण में ‘कोटे के अंदर कोटा’ देने की मांग भी ज्ञापन में शामिल की गई।

गौरतलब है कि मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था के तहत नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटों के आरक्षण का प्रावधान करता है। केंद्र सरकार के आधिकारिक विवरण के अनुसार यह प्रावधान संविधान के 106वें संशोधन से जुड़ा है।

इसी क्रम में संगठन ने स्थानीय निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने की मांग भी रखी। केंद्र सरकार के अनुसार पंचायती राज संस्थाओं में संविधान के तहत महिलाओं के लिए कम से कम एक-तिहाई आरक्षण का प्रावधान है, जबकि कई राज्यों ने इसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया है।

शिक्षा और रोजगार में भागीदारी बढ़ाने पर जोर

ज्ञापन में शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में वंचित वर्गों की भागीदारी को लेकर भी कई मांगें रखी गईं। संगठनों ने आरक्षित वर्ग के विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक अवसर बढ़ाने, छात्रावासों की संख्या में वृद्धि करने तथा छात्रवृत्ति से संबंधित व्यवस्थाओं को प्रभावी बनाने की मांग की।

इसके अलावा सरकारी सेवाओं में खाली आरक्षित पदों और बैकलॉग को समयबद्ध तरीके से भरने की मांग की गई। संगठन का कहना है कि जब तक आरक्षित पदों पर नियुक्तियां नहीं होतीं, तब तक प्रतिनिधित्व से जुड़ा उद्देश्य पूरी तरह हासिल नहीं हो सकता।

ज्ञापन में सरकारी संस्थानों के साथ-साथ निर्णय लेने वाली संस्थाओं में भी SC, ST और OBC वर्गों की भागीदारी बढ़ाने की मांग की गई। साथ ही निजी क्षेत्र, सरकारी ठेकों और खरीद से जुड़े अवसरों में भी वंचित वर्गों की भागीदारी को लेकर मांगें रखी गईं।

राजनीतिक और न्यायिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा

आंदोलन के दौरान राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी उठाया गया। संगठन की ओर से OBC समाज को लोकसभा और विधानसभाओं में उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की मांग की गई। इसके अलावा राज्यसभा और विधान परिषदों में SC, ST और OBC वर्गों की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग ज्ञापन में शामिल की गई।

वहीं, उच्च न्यायपालिका में सामाजिक प्रतिनिधित्व बढ़ाने की मांग भी रखी गई। संगठन ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में SC, ST और OBC वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक नियुक्तियों से जुड़ी व्यवस्था में बदलाव की मांग की।

जातिगत आंकड़ों और सामाजिक योजनाओं की मांग

ज्ञापन में जातिगत जनगणना से संबंधित मांग भी रखी गई। संगठन ने OBC की आबादी का वैज्ञानिक और पारदर्शी आकलन करने तथा संबंधित आंकड़ों को नीति निर्माण में उपयोग करने की मांग की।

इसके साथ ही केंद्र और राज्य सरकारों की योजनाओं तथा बजट में SC, ST, OBC और अन्य वंचित वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग की गई। संगठन का तर्क है कि योजनाओं के निर्माण और उनके क्रियान्वयन में संबंधित वर्गों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखना आवश्यक है।

सफाई कर्मचारियों से जुड़े मुद्दे भी उठाए

आंदोलन के दौरान सफाई कर्मचारियों की स्थिति से जुड़े मुद्दों को भी ज्ञापन में शामिल किया गया। संगठनों ने आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त कर सफाई कर्मचारियों को स्थायी नियुक्ति देने, रिक्त पदों पर भर्ती करने तथा समान काम के लिए समान वेतन और सामाजिक सुरक्षा का लाभ देने की मांग की।

इसके अलावा सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई में मानव प्रवेश रोकने तथा आधुनिक तकनीक और मशीनों के माध्यम से सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई। सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा और उनके परिवारों के पुनर्वास से जुड़े मुद्दों को भी ज्ञापन में प्रमुखता से रखा गया।

आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी की ओर से कहा गया कि ‘संपूर्ण भागीदारी आंदोलन’ का उद्देश्य सामाजिक न्याय, समान अवसर और विभिन्न वंचित वर्गों की भागीदारी से जुड़े मुद्दों को सरकार के समक्ष रखना है। इसी क्रम में जिला मुख्यालय पर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मांगों पर आवश्यक कार्रवाई किए जाने का अनुरोध किया गया।

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