अखिलेश यादव का चुनाव आयोग पर हमला, बोले-‘चुनाव मुचुआ’ त्यागपत्र दें
Digital UP News Desk
लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक बार फिर चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर सवाल उठाए हैं। 24 सितंबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर की गई अपनी टिप्पणी में अखिलेश यादव ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए त्यागपत्र की मांग की।
उन्होंने अपने पोस्ट में ‘मुँह नुचुआ’ का जिक्र करते हुए ‘चुनाव मुचुआ’ शब्द का इस्तेमाल किया और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रखीं। उनकी टिप्पणी के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में चुनाव आयोग को लेकर बहस फिर तेज हो गई है।
भारत निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, ज्ञानेश कुमार वर्तमान में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त हैं। उन्होंने 19 फरवरी 2025 को 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में कार्यभार संभाला था।
अखिलेश यादव ने एक्स पर क्या लिखा?
अखिलेश यादव ने अपने एक्स पोस्ट में लिखा, “मुँह नुचुआ तो सुना था अब ‘चुनाव मुचुआ’ आ गये हैं। अब एक देश का एक मत, भ्रष्ट ‘मुचुआ’ दें त्यागपत्र।” इसके बाद उन्होंने लिखा कि बाकी अर्थ समझने के लिए Gen-Z और जागरूक हो चुकी जनता काफी समझदार है। उनकी इस टिप्पणी को चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उनके ताजा राजनीतिक हमले के तौर पर देखा जा रहा है।
अखिलेश यादव इससे पहले भी चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया को लेकर कई बार सवाल उठा चुके हैं। खासतौर पर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के संदर्भ में उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर आपत्ति जताई थी।
उनका कहना रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया को लेकर आयोग की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
चुनाव आयोग की भूमिका पर पहले भी उठाए सवाल
दरअसल, अखिलेश यादव लंबे समय से मतदाता सूची, चुनावी प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराते रहे हैं। उन्होंने दावा किया था कि वर्ष 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान कुछ ऐसे क्षेत्रों में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए, जहां समाजवादी पार्टी के समर्थकों की संख्या अधिक थी।
हालांकि, ये आरोप अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं। इन दावों को प्रस्तुत करते समय चुनावी संस्थाओं के आधिकारिक रिकॉर्ड और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया को अलग-अलग देखना जरूरी है।
चुनाव आयोग भारत में लोकसभा, राज्यसभा और राज्य विधानसभाओं सहित विभिन्न चुनावों के संचालन की संवैधानिक जिम्मेदारी निभाता है।
चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों का मुद्दा भी उठाया
अखिलेश यादव ने इससे पहले मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए निर्वाचन आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर भी सवाल उठाए थे। उनका दावा था कि करीब 10 महीनों में दो चुनाव आयुक्तों ने आयोग के कुछ निर्णयों पर कई बार आपत्ति दर्ज कराई।
इसी आधार पर उन्होंने कहा था कि यदि किसी स्वतंत्र संवैधानिक संस्था के सदस्यों को अपने विचार रखने की पर्याप्त स्वतंत्रता नहीं मिलती या उनकी आपत्तियों पर सुनवाई नहीं होती, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
हालांकि, इस तरह के दावों को लेकर आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों के प्रत्यक्ष बयान महत्वपूर्ण होते हैं। भारत निर्वाचन आयोग की वर्तमान आधिकारिक जानकारी में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के नाम दर्ज हैं।
2027 विधानसभा चुनाव को लेकर बढ़ सकती है राजनीतिक बहस
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज हो रही हैं। ऐसे में चुनाव आयोग की निष्पक्षता, मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे आने वाले समय में राजनीतिक विमर्श का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं।
विपक्षी दल चुनावी संस्थाओं की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठाते रहे हैं, जबकि निर्वाचन आयोग चुनाव प्रक्रिया को नियमों और संवैधानिक प्रावधानों के तहत संचालित करने वाली संस्था है।
इसलिए चुनाव से जुड़े किसी भी आरोप या दावे को आधिकारिक दस्तावेजों, चुनावी आंकड़ों और आयोग की प्रतिक्रिया के आधार पर समझना महत्वपूर्ण होगा।
‘एक देश, एक मत’ पर अखिलेश का जोर
अपने ताजा बयान में अखिलेश यादव ने ‘एक देश का एक मत’ की बात भी कही। इसके जरिए उन्होंने मताधिकार की समानता और चुनावी प्रक्रिया में निष्पक्षता के मुद्दे को उठाया। उनका कहना है कि लोकतंत्र में प्रत्येक मतदाता का वोट समान महत्व रखता है और चुनावी संस्थाओं से निष्पक्ष भूमिका की अपेक्षा की जाती है।
वहीं, निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार आयोग का संवैधानिक दायित्व देश में चुनावी प्रक्रियाओं का संचालन और प्रबंधन करना है। आयोग की वेबसाइट पर चुनावी नियमों, मतदाता सूची, पर्यवेक्षकों और विभिन्न चुनावी प्रक्रियाओं से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जाती है।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच बढ़ी चुनावी सरगर्मी
कुल मिलाकर, अखिलेश यादव का ताजा बयान चुनाव आयोग को लेकर समाजवादी पार्टी की पहले से चली आ रही राजनीतिक आपत्तियों की अगली कड़ी है।
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग करते हुए चुनावी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, इन आरोपों को लेकर चुनाव आयोग की ओर से किसी आधिकारिक प्रतिक्रिया को भी पूरे संदर्भ के साथ देखना जरूरी होगा।
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को अभी समय है, लेकिन राजनीतिक दलों की तैयारियां और चुनावी मुद्दों को लेकर बयानबाजी लगातार सामने आ रही है। ऐसे में आने वाले महीनों में मतदाता सूची, चुनावी पारदर्शिता, निर्वाचन प्रक्रिया और चुनाव आयोग की भूमिका से जुड़े मुद्दे राजनीतिक चर्चा में बने रहने की संभावना है।

