हमीरपुर में माया वाल्मीकि के समर्थन में उतरा वाल्मीकि समाज, कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन

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रिपोर्ट: मोहम्मद अकरम

हमीरपुर। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष माया वाल्मीकि के समर्थन में वाल्मीकि समाज के लोगों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया। सैकड़ों की संख्या में समाज के लोग जिला मुख्यालय पहुंचे और मामले में निष्पक्ष जांच तथा न्याय की मांग को लेकर अपनी आवाज उठाई। प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट परिसर स्थित गोल चबूतरे पर धरना दिया और प्रशासन से पूरे प्रकरण में उचित कार्रवाई की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान वाल्मीकि समाज के लोगों ने नारेबाजी करते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वर्तमान भाजपा नगर पंचायत अध्यक्ष आशा रानी कबीर की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमे के मामले में कार्रवाई एकतरफा तरीके से की जा रही है। हालांकि, यह प्रदर्शनकारियों का आरोप है और मामले के सभी तथ्यों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

कलेक्ट्रेट पहुंचकर जताई नाराजगी

पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष माया वाल्मीकि के समर्थन में बड़ी संख्या में वाल्मीकि समाज के लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे। लोगों ने पहले गोल चबूतरे पर धरना दिया और इसके बाद अपनी मांगों को लेकर प्रशासन के समक्ष ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्षता के साथ जांच की जानी चाहिए, ताकि वास्तविक तथ्यों के आधार पर कार्रवाई हो सके।

प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, किसी भी मामले में कार्रवाई तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होनी चाहिए। इसी मांग को लेकर समाज के लोगों ने जिला प्रशासन का ध्यान मामले की ओर आकर्षित किया।

जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन

धरने और प्रदर्शन के बाद वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से मामले में निष्पक्ष जांच कराने और संबंधित पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर देने की मांग की गई।

प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से आग्रह किया कि मामले की जांच सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए की जाए। साथ ही, उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाती है तो वह जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए।

मुकदमे को लेकर सामने आया विरोध

यह पूरा प्रदर्शन वर्तमान भाजपा नगर पंचायत अध्यक्ष आशा रानी कबीर द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमे को लेकर सामने आया है। वाल्मीकि समाज के लोगों ने आरोप लगाया कि इस प्रकरण में एक पक्ष के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है, जबकि दूसरे पक्ष की बात को पर्याप्त रूप से सामने नहीं रखा जा रहा है।

इसी को लेकर समाज के लोगों में नाराजगी देखने को मिली। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए। उनका कहना है कि किसी भी कार्रवाई से पहले पूरे प्रकरण के तथ्यों की जांच जरूरी है।

हालांकि, मामले में पुलिस और प्रशासन की ओर से की जा रही कार्रवाई तथा दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के आधिकारिक निष्कर्ष के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

प्रदर्शन के दौरान जमकर हुई नारेबाजी

कलेक्ट्रेट परिसर में धरने के दौरान प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी की और अपनी मांगों को प्रशासन तक पहुंचाया। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने माया वाल्मीकि के समर्थन में एकजुटता दिखाई। समाज के लोगों का कहना था कि वे मामले में न्यायपूर्ण और निष्पक्ष प्रक्रिया चाहते हैं।

प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मांग की कि पूरे मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से कराई जाए और यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो उसके अनुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही, उन्होंने प्रशासन से यह भी आग्रह किया कि मामले को लेकर किसी भी पक्ष के साथ भेदभाव न हो।

माया वाल्मीकि के समर्थन में एकजुट हुआ समाज

पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष माया वाल्मीकि के समर्थन में हुए इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में वाल्मीकि समाज के लोगों की मौजूदगी रही। प्रदर्शन के जरिए समाज ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि वह मामले को लेकर एकजुट है और प्रशासन से न्याय की मांग कर रहा है।

वहीं, प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य प्रशासन के सामने अपनी बात रखना और निष्पक्ष जांच की मांग करना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जिला प्रशासन ज्ञापन में उठाई गई मांगों पर गंभीरता से विचार करेगा और मामले के सभी पहलुओं की जांच कर उचित कदम उठाएगा।

प्रशासन से उचित कार्रवाई की मांग

प्रदर्शन के अंत में वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से मामले में उचित कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान सभी संबंधित पक्षों के बयान लिए जाएं और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष निर्णय किया जाए।

फिलहाल, इस मामले को लेकर वाल्मीकि समाज की ओर से प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपे जाने के बाद प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है। मामले में जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विवाद से जुड़े आरोपों और दावों में वास्तविक स्थिति क्या है।

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