बदायूं पुलिस लाइन की गणना व्यवस्था पर सवाल, महिला सिपाही के निलंबन के बाद दो सिपाहियों पर आरोप
Digital UP News Desk
बदायूं: पुलिस लाइन में ड्यूटी और गणना कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। महिला सिपाही आरती सिंह के करीब 11 महीने तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहने के आरोप में निलंबन की कार्रवाई के बाद अब पुलिस लाइन में तैनात दो अन्य सिपाहियों की भूमिका को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित सिपाहियों का पक्ष सामने आना बाकी है।
जानकारी के मुताबिक, महिला सिपाही आरती सिंह पर आरोप था कि वह लंबे समय से ड्यूटी पर उपस्थित नहीं हो रही थीं और इसके बावजूद वेतन प्राप्त कर रही थीं। यह मामला उस समय सामने आया, जब एक ट्विटर हैंडल के माध्यम से महिला कांस्टेबल की शिकायत की गई। शिकायत के बाद पुलिस अधीक्षक अंकित शर्मा ने मामले की जांच कराई। जांच के बाद महिला सिपाही को निलंबित किए जाने की बात सामने आई है।
इस कार्रवाई के बाद अब पुलिस लाइन की ड्यूटी व्यवस्था और विशेष रूप से गणना कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा तेज हो गई है। आरोप लगाने वालों का कहना है कि गणना कार्यालय में पुलिस लाइन में आमद करने वाले कर्मचारियों की ड्यूटी निर्धारित करने से संबंधित कार्य होता है। ऐसे में यहां होने वाली ड्यूटी व्यवस्था की पारदर्शिता और रिकॉर्ड की शुद्धता बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
दो सिपाहियों की भूमिका पर उठे सवाल
अब सिपाही अनुज चौहान और राजेश कुमार को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। आरोप है कि दोनों सिपाहियों की कई बार थानों में तैनाती या तबादला होने के बावजूद वे दोबारा पुलिस लाइन में पहुंच जाते हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि दोनों की गणना कार्यालय में ड्यूटी रहती है और इसी वजह से पुलिस लाइन में उनकी भूमिका लगातार बनी हुई है।
हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि किसी स्वतंत्र जांच या आधिकारिक रिपोर्ट से नहीं हुई है। इसलिए यह स्पष्ट होना बाकी है कि दोनों सिपाहियों की पुलिस लाइन में तैनाती किन प्रशासनिक आदेशों के तहत हुई और गणना कार्यालय में उनकी वास्तविक जिम्मेदारी क्या है।
ड्यूटी लगाने की प्रक्रिया को लेकर शिकायत
आरोपों में यह भी कहा जा रहा है कि गणना कार्यालय में ड्यूटी निर्धारण के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों से कथित तौर पर रुपये लिए जाते हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि कुछ कर्मचारी घर जाना चाहते हैं और उनकी ड्यूटी को लेकर कथित लेनदेन के माध्यम से कागजी रिकॉर्ड में अलग व्यवस्था किए जाने की बात कही जा रही है।
यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला पुलिस विभाग की आंतरिक ड्यूटी व्यवस्था और प्रशासनिक पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर विषय हो सकता है। हालांकि, फिलहाल इन दावों के समर्थन में कोई सार्वजनिक दस्तावेज या आधिकारिक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
तबादलों के बाद दोबारा पुलिस लाइन में आने का दावा
शिकायतकर्ताओं का एक आरोप यह भी है कि अनुज चौहान और राजेश कुमार का कई बार थानों में तबादला हुआ, लेकिन बाद में वे कथित तौर पर प्रभाव या विभागीय व्यवस्था के माध्यम से फिर पुलिस लाइन में तैनात हो गए। इस संबंध में यदि वास्तव में कई बार स्थानांतरण आदेश जारी हुए हैं, तो उनके रिकॉर्ड की जांच से यह स्पष्ट किया जा सकता है कि दोनों की तैनाती कब-कब और किन आदेशों के तहत हुई।
इसके अलावा, गणना कार्यालय में उनकी तैनाती की अवधि, जिम्मेदारियां और ड्यूटी लगाने से संबंधित रिकॉर्ड की भी जांच किए जाने की मांग उठ रही है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि ड्यूटी आवंटन की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार हुई या नहीं।
संपत्ति की जांच की भी मांग
मामले में शिकायतकर्ताओं की ओर से दोनों सिपाहियों की संपत्ति की जांच की मांग भी की जा रही है। आरोप लगाया गया है कि दोनों ने कथित तौर पर नोएडा सहित अन्य स्थानों पर महंगे फ्लैट और जमीन खरीदी है। साथ ही, उनकी संपत्ति और आय के बीच संभावित अंतर की जांच किए जाने की मांग की गई है।
हालांकि, संपत्ति से जुड़े इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में किसी व्यक्ति की संपत्ति को लेकर लगाए गए दावों को जांच पूरी होने से पहले तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता। यदि विभाग इस शिकायत की जांच करता है तो आय के ज्ञात स्रोत, संपत्ति खरीद के दस्तावेज और संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड की नियमानुसार जांच की जा सकती है।
महिला सिपाही की कार्रवाई के बाद व्यवस्था पर निगाह
महिला सिपाही के मामले में जांच के बाद निलंबन की कार्रवाई होने के बाद अब पुलिस लाइन की गणना व्यवस्था भी जांच के दायरे में आने की मांग की जा रही है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि केवल किसी एक कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय ड्यूटी आवंटन से जुड़े पूरे सिस्टम की समीक्षा की जानी चाहिए।
इसके लिए पुलिस लाइन में कर्मचारियों की आमद, ड्यूटी चार्ट, उपस्थिति रजिस्टर, स्थानांतरण आदेश और गणना कार्यालय से संबंधित रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है। साथ ही, यदि ड्यूटी लगाने में किसी प्रकार के आर्थिक लेनदेन की शिकायत है तो संबंधित आरोपों की विभागीय जांच के साथ आवश्यक दस्तावेज और रिकॉर्ड भी देखे जाने चाहिए।
फिलहाल, महिला सिपाही के निलंबन के बाद पुलिस लाइन की गणना व्यवस्था को लेकर उठे नए आरोपों पर आधिकारिक स्तर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। अनुज चौहान और राजेश कुमार के खिलाफ लगाए गए आरोपों की सत्यता भी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। ऐसे में पूरे मामले में निष्पक्ष जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर कार्रवाई से ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

